जीवन में सुख-दुःख का साथी दोस्त

सच्चाई तो यही है कि सच्चा दोस्त तो वही है जो उस समय हमारे साथ खड़ा रहता है जब सारी दुनियाँ यहाँ तक हमारे स्वजन भी हमारा साथ छोड़ देते हैं | सच्चा दोस्त वही है जो हमारे अंदर की अच्छाइयों को उभारने मे हमारी मदद करे। सच्चा मित्र हमारी परेशानियों और तकलीफों को अपना … Read more

क्या म्रत्यु पर आदमी खाली हाथ जाता है ?

याद रक्खें कि वर्तमान जीवन में हम जो भी कर्म करते हैं, यही कर्म हमारे भविष्य में होने वाले जन्मों में हमारा भाग्य बन बन जाते हैं, कर्मों के सिद्धांत के मुताबिक हमारे कर्मों का लेखा जोखा आने वाले जन्मों के लिये आरक्षित रहते हैं | निसंदेह मनुष्य को उसके वर्तमान जीवन में दोहरे काम … Read more

मैडिटेशन (ध्यान) से अपनी आध्यात्मिकता को बड़ायें

मैडिटेशन या ध्यान हमको हमारे भूतकाल या भविष्य के मध्य उछलकूद करने से तो बचाते हैं , साथ ही साथ हमें हमको अपने वर्तमान में ही स्थिर रखने मे मददगार होता है | मान कर चले कि केवल मैडिटेशन या ध्यान से ही हमारा माइंड या मन अचल स्थिर या निश्चल रह सकता है | … Read more

मस्तिष्क और मन (Mind & Brain)

हमारा मन या माइंड अपने आप में अति विचित्र है, इसके भीतर हमेशा भिन्न प्रकार की सोच निरंतर उछल-कूद करती ही रहती है इसीलिए मन की तुलना बन्दर से भी कीजा सकती है | माइंड या मन में विचारों का अथाह समुद्र भी होता है इसलिए कुछ लोग मन या माइंड को विचारों की खदान … Read more

मस्तिष्क और मन (Mind & Brain)

जब कभी भी आप का मन या ह्रदय बैचेन या विचलित हो जाय, तब आप अपने आप से कहें कि जीवनशक्ति (लाइफफ़ोर्स जो समस्त विश्व ( की देख भाल करती है वही शक्ति आपकी भी देख भाल और | रक्षा करेगी,ऐसा सोचने से आप स्वयं देखगें कि आपकी सारी निराशा एवं चिन्ताएं खत्म हो गई … Read more

अन्याय पर न्याय, कटुता पर मधुरता, झूठ-फरेब पर स्नेह-सदभावना की जीत का पर्व ——होली भाग-2

होलीका दहन का वैज्ञानिक महत्व भी अनूठा है क्योंकि होलिकादहन वातावरण को सुरक्षित और स्वच्छ भी बनाता है | सर्दी- बसंत का मौसम बैक्टीरियाओं के विकास के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करता है। पूरे देश में विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन की प्रक्रिया से वातावरण का तापमान 145 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक तक बढ़ … Read more

होली के सम्बन्ध में विभिन्न कहानियाँ

प्राचीन काल मेंहिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली दानव था। अपने बल के अंहकार से वशीभूत हो कर वह खुद को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु का नाम लेने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद परमात्मा का परमभक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध … Read more

अन्याय पर न्याय, कटुता पर मधुरता, झूठ-फरेब पर स्नेह-सदभावना की जीत का पर्व होली भाग-1

तामसी प्रवर्तीयां एवं कुसंस्कार यानि ईर्ष्या,अनाचार,दुर्भावना एवं, अभिमान, असहिष्णुता,अविश्वास रूपी होलिका को होली की दिव्य अग्नि में भस्म कर देना ही सच्चा ‘होलिका दहन’ है। रगोंत्स्व यानि होली खेलने की सार्थकता तभी होगी जब हम परमात्मा में श्रदा रखते हुए सात्विक विचार, सकारात्मकता,स्नेह, प्रेम, सोहार्द, सहिष्णुता,सह्रदयता और करुणा के रंग में अपनी अंतरात्मा को रँग … Read more

देवों के देव महादेव का वाहन नंदी बैल क्यों ?

संसार की लगभग सभी प्राचीन सभ्यताओं में बैल को महत्व दिया गया है। सुमेरियन, बेबीलोनिया, असीरिया और सिंधु घाटी की खुदाई में भी बैल की मूर्ति पाई गई है। भारत में भी बैल खेती के लिए हल में जोते जाने वाला एक महत्वपूर्ण पशु रहा है। जिस तरह गायों में कामधेनु को श्रेष्ठ माना जाता … Read more

देवों के देव महादेव की पूजा अर्चना का पर्व—-महाशिवरात्री Part 5

शिवजी केवल म्रगछाल ही क्यों धारण करते हैं?—-भगवान शिव का केवलमृगछाल धारण करना अपरिग्रह का प्रतीक है | परिग्रह एक प्रकार का पाप है, क्योंकि किसी वस्तु का परिग्रह करने का अर्थ हुआ कि दूसरोंको उस वस्तु से वंचित करना | अपरिग्रही (जो आवश्यकता से अधिक मात्र मे धन-वस्तु का संग्रह) व्यक्ति ही समाज के … Read more