खबर आई है कि उनका दम घुट रहा है…

सुना है कि धुंध ने दिल्‍ली में डेरा जमा लिया है। ये कैसी धुंध है जो एक कसमसाती ठंड के आगमन की सूचना लेकर नहीं आती बल्‍कि एक ज़हर की चादर हमारे अस्‍तित्‍व पर जमा करती चली आती है। इस धुंध ने आदमी की उस ख्‍वाइश को तिनका-तिनका कर दिया है जो अपने हर काम … Read more

महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

देश में अस्तित्व एवं अस्मिता की दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से महिलाओं के हालात बदतर एवं चिन्तनीय है। देखा जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में तमाम महिला जागृति के कार्यक्रमों एवं सरकार की योजनाओं के बावजूद महिलाओं का शोषण होता है, उनके अधिकारों का हनन होता है, इज्जज लूटी … Read more

संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला रही है, उन्हें खदेड़ रही है, उनके रोजी-रोटी को बाधित कर रही है, इस तरह अपनी राजनीति को मजबूत करने की सोच एवं रणनीति लोकतांत्रिक दृष्टि से कत्तई उचित नहीं है। देश … Read more

मानव रोजगार कम करते रोबोट

समय परिवर्तनशील है। समय के साथ इंसान बदल जाता है, इंसानी जीवन के तौर-तरीके बदल जाते है। यही कारण है जो इंसान एक समय में नंगा घूमा करता था, कन्द मूल खाकर अपना पेट भरता था। आज वही इंसान विज्ञान की प्रगति के कारण इतना सक्षम हो गया कि उसने अपने जैसीे हूबहू मशीन का … Read more

आधार को लेकर ममता के तेवर

एक बार फिर आधार की अनिवार्यता का प्रश्न चर्चा में हैं। यह इसलिये चर्चा में है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देने का दुस्साहस किया है। इसके लिये उन्होंने सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के खिलाफ सुप्रीम कोई में याचिका दाखिल कर दी। यह तो अच्छा हुआ कि उन्हें … Read more

गुजरात के भाल पर चुनावी महासंग्राम

गुजरात विधानसभा के चुनाव घोषित होते ही देश में उसके संभावित परिणामों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। वैसे तो सभी चुनाव चुनौतीपूर्ण होते हैं, परंतु गुजरात चुनावों को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्सुकता है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहराज्य है। इस बार के वहां के चुनाव परिणाम देश की भावी राजनीति की … Read more

सरकार की प्रथम जबाबदेही जनता के प्रति है लोकसेवकों के प्रति नहीं

वैसे तो भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर परिभाषा की बात की जाए तो यहाँ जनता के द्वारा जनता के लिए और जनता का ही शासन है लेकिन राजस्थान सरकार के एक ताजा अध्यादेश ने लोकतंत्र की इस परिभाषा की धज्जियां उड़ाने की एक असफल कोशिश की। हालांकी जिस प्रकार विधानसभा में बहुमत होने के … Read more

जी एस टी @48%

जी हाँ सरकार का एक विभाग शायद अपनी ही जी एस टी चला रहा है उसे केंद्र सरकार के अधिकतम 28% जी एस टी से कोई मतलब नही है वो अपनी मर्जी से 48% जी एस टी ले रहा है और बाकायदा इसकी रसीद भी दी जा रही है , राजस्थान सरकार के सरकारी स्टेट … Read more

भ्रष्टाचार को पोषित करने का फरमान क्यों?

भ्रष्टाचार की खबर छापने तक पर रोक लगाने के राजस्थान सरकार के नये कानून ने न केवल लोकतंत्र की बुनियाद को ही हिला दिया है बल्कि चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के इस वादे की भी धज्जियां उडा दी है जिसमें सुशासन एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिये हरसंभव प्रयत्न का संकल्प व्यक्त किया … Read more

काले कानून की वसुंधरा राजे को जरूरत क्यों पड़ी ?

आखिर इस काले कानून की वसुंधरा राजे को जरूरत क्यों पड़ी ? यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है यह बात तब से प्रारम्भ हुई जब आनन्दपाल एनकाउंटर की जांच और आनन्दपाल की हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच सीबीआई से करवाने की उठी मगर सरकार अड़ी रही क्योकि इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री खुद … Read more

पत्रकारों पर लगाम लगाने का एक और असफल प्रयास

*मति मारी गई राजस्थान सरकार की* राज की मंशा में खोट दोस्तों, नमस्कार लगता है अब राजस्थान सरकार की भी मति मारी गई है। उसके मंत्रियों का भी दिमाग खराब हो गया है। तभी तो पत्रकारों की लेखनी पर लगाम लगाने और भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण देने का असफल प्रयास किया जा रहा है। इससे … Read more