पब्लिक अॉन डय़ूटी … !!

तारकेश कुमार ओझा
बैंक में एक कुर्सी के सामने लंबी कतार लगी है। हालांकि बाबू अपनी सीट पर नहीं है। हर कोई घबराया नजर आ रहा है। हर हाथ में तरह – तरह के कागजों का पुलिंदा है। किसी को दफ्तर जाने की जल्दी है तो कोई बच्चे को लेने स्कूल जाने को बेचैन है। इस बीच अनेक बुजुर्गों पर नजर पड़ी जो चल Read more

हमने इतिहास को बनते हुए देखा है !

sohanpal singh
हमने भी इतिहास को बनते देखा है ! 30 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने नई दिल्ली से दूर ओडिशा की एक चुनावी सभा में कहा की “मेरे शरीर के खून का एक एक कतरा भी देश की खातिर काम आएगा” और फिर अगले ही दिन 31 अक्तूबर 1984 को प्रातः काल ही उन Read more

आदर्श महिला

हेमंत उपाध्याय
एक आदर्श महिला थी। वो अपनी सांस की खूब सेवा करती । आने वाले हर मेहमान का खूब आदर करती थी ,पर उसकी अपनी सांस से बिलकुल नहीं पटती थी। बाद मैं पाया कि उसकी अपनी जेठानी से भी नहीं निभती थी । उसकी देवरानी से भी नहीं जमती थी । जब ननंदे आती तो वो उनका खूब आदर सत्कार तरह -तरह के Read more

निजी अस्पतालों की लूट कब तक?

lalit-garg
देश के निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य की दृष्टि से तो हालात बदतर एवं चिन्तनीय है ही, लेकिन ये लूटपाट एवं धन उगाने के ऐसे अड्डे बन गये हैं जो अधिक परेशानी का सबब है। हमारे देश में जगह-जगह छोटे शहरों से लेकर प्रान्त की राजधानियों एवं एनसीआर तक में निजी अस्पतालों में मरीजों की ल Read more

हारून भाई को किसने मारा…

Fortis-Hospital
वो फैमिली हेयर ड्रेसर थे, दुबई रिटर्न…जी हां…”दुबई रिटर्न”, ये तमगा 90 के दशक में बड़ी बात हुआ करती थी, वो बताते थे कि वो स्‍वयं तब वहां शेखों के पर्सनल सैलून्‍स में हजामत किया करते थे। खुशदिल, मिलनसार और ओवरऑल एक अच्‍छी पर्सनालिटी के मालिक थे हारून Read more

“अँधेरा घाना है”

कल्पित हरित
गांधी जी का मानना था “लोकतंत्र बहुमत की तानाशाही है ” ये कथन अपने आप में ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत विपक्ष और सशक्त मीडिया की भूमिका को परिलक्षित करता है पर क्या आप किसी विपक्ष से ये उम्मीद कर सकते है की वो निष्पक्ष हो सकता है क्योकि उसकी निगाहे सदैव सत्ता के दरवाज Read more

ढूंढते ही रह जाओगे

शिव शंकर गोयल
लगता है कि ट्रेनों में जहरखुआनी गैंग के कारनामों से समाज में फैली अविश्वास की लहर मौजूदा हालात में शासक वर्ग से प्रेरणा पाकर दिनो दिन बढती ही जारही है. हाल के दिनों में घटित कुछ सच्ची घटनाएं इस बात को और भी पुख्ता करती है. कुछ दिनों पहले एक स्थान पर एक अधिक होशियार व्यक्ति Read more

अमर सिंधु की सिंधी रचना का देवी नागरानी द्वारा हिंदी अनुवाद

Amar_Sindhu
मूल सिंधी: अमर सिन्धु مان…!! پنهنجي ديس جي اڪيلائپ کي پنهنجو خواب آڇيان ٿي. پر، گيت جيڪو ڀڳت ڪنور رام جي ڳلي ۾ ڪٺو ويو منهنجي جسم جو عنوان بڻجي نٿو سگهي. هن جي ڇاتي تي سر رکي مون روئڻ چاهيو ٿي، امان ٻڌايو ته منهنجي لڙڪن ۽ رڙين مان هوءُ نکيٽي جو لوڪ گيت ٺاهي رهي آهي ۽ Read more

भारत एक खोज — “चौकीदार”

sohanpal singh
हमारे यहाँ सर्राफा बाजार में सुनार अपना सब माल असबाब भारी और बड़ी बड़ी तिजोरियों में बंद करके फिर बहार से भी ताला लगाते है लेकिन उसके बाद भी बाजार में रात में सुरक्षा करने के लिए चौकीदार रखते है जो सारी सारी रात जाग कर चिल्लाता है “जागते रहो -जागते रहो की लेकिन फिर भ Read more

अतीत से ज्यादा वर्तमान पर लड़ना हितकर

देवेन्द्रराज सुथार
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर आमजन का आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। गुजरात से गुवाहाटी और कश्मीर से कन्याकुमारी तक फिल्म को लेकर चर्चा का बाजार गरम है। यहां तक की राजपूत जाति समुदाय ने तो फिल्म को पूरा देखने से पहले ही इसके बैन की मांग कर दी है। विरोध का स्वर इ Read more

मूडीज की मोहर से बदलेगी दिशाएं

lalit-garg
नोटबंदी एवं जीएसजी के आर्थिक सुधारों को लागू करने के लिये मोदी सरकार को जिन स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, उन स्थितियों में अर्थव्यवस्था को गति देने के तौर-तरीके खोजे जा रहे हैं, ऐसे समय में मोदी सरकार के लिए एक बेहतर खबर आई है कि अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज’ ने Read more