एक नये जीवन की शुरुआत हो

आज दुनियाभर में जीवनशैली चर्चा का विषय बनी हुई है और इस पर ध्यान भी दिया जा रहा है। हाल ही में अनेक देशों की यात्रा के दौरान मैंने लाइफ स्टाइल पर बड़ी-बड़ी काॅन्फ्रेंस और सेमिनार में भाग लिया। इनदिनों मैं फिर अमेरिका की एक माह की यात्रा पर हूं, मेरे सामने यही प्रश्न प्रमुखता … Read more

किसान आंदोलन : वह धरती को पूजता मगर उसकी कोई नहीं सुनता

वह किसान है। धरती को पूजता है। धरती उसे अन्न उपजाने के आशीर्वाद देती है। वह उस अन्न को पृथ्वी जन का पेट भरने के लिए वितरित करता है। सारी दुनिया को अन्न देता है । अपनी मेहनत से उपजाया अन्न। धरती मां की आशीर्वाद से मिला अपना अन्न । धरती के पूजक को क्या … Read more

बदनाम हस्तियों पर फिल्म बनाने की बॉलीवुड की बढ़ती प्रवृति पर खांटी खड़गपुरिया का प्रहार

जमाने की न जाने , ये कैसी बयार है… नेपथ्य में नायक, मगर खलनायकों की बहार है नाम से ज्यादा बदनामी की पूछ बजता डंका जोरदार है… नेक माने जा रहे बेवकूफ धूर्त – बेईमानों की जय – जयकार है अग्निपथ पर चलने वाले संघर्षशील कहला रहे बोरिंग हिस्ट्रीशीटरों की बहार ही बहार है न … Read more

बस्तों का बोझ कम करने का सराहनीय उपक्रम

शिक्षा के निजीकरण के दौर में बस्ते का बोझ हल्का करने की बात एक सपना बन कर रह गयी, बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने के प्रयास निरर्थक होते नजर आने लगे एवं बच्चों का बचपन लुप्त होने लगा, ऐसे जटिल हालात में सरकार ने स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम का बोझ कम करने का … Read more

योग उपवास के बाद अब पुशअप….!!

तारकेश कुमार ओझा वातानुकूलित कमरों में बैठ कर चिंतन – मनन करने वाले खाए – पीए और अघाए नेता के लिए लोगों की मुश्किलों को समझ पाना वैसा ही है मानो शीतल वादियों के आगोश में रहने वाला कोई शख्स तपते रेगिस्तान की फिक्र करे। ट्रेनों में आपात कोटे के आरक्षण के लिए रिक्यूजिशन भेजने … Read more

राष्ट्रवादी की खोज

आज के वक्त में राष्ट्रवाद शब्द की गलत तरीके से व्याख्या हो रही है राष्ट्रवाद के नारों के पीछे साम्प्रदायक विचारधारा पोषित की जा रही है और साम्प्रदायकता का पोषण भी धर्म के पोषण के लिए नही केवल राजनीतिक फायदे की द्रष्टि से ही किया जा रहा है पद की भूख मिटाने के लिए किया … Read more

उपचुनाव में एक बार फिर मतदाता मुखर हुआ

भारत के लोकतन्त्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि चुनाव के समय मतदाता ही बादशाह होता है। इस समय राजनेताओं के भाग्य का फैसला करने का अधिकार उसी को होता है। हमने यह बात सत्तर वर्षीय लोकतंत्र के जीवन में एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार देखी है। जब-जब इन मतदाताओं को नजरअंदाज … Read more

काम करके काम का श्रेय लेना गलत कैसे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे चिलचिलाती धूप में रोड शो के साथ लोकार्पण किया जाना स्वागतयोग्य है। इससे दिल्ली और एनसीआर की अनेक ज्वलंत समस्याओं का समाधान हो सकेगा, विशेषतः प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी एवं यातायात सुगम होगा। इन एक्स्प्रेस वे के बन जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली … Read more

कुर्सी को मुस्कुराने दो

जादूगर जादूगरी कर कर गया। कुर्सी मुस्कुराती रही । बाजीगर देखता ही रह गया । उसके झोले से हमें मानो आवाज सुनाई दी कुर्सी को मुस्कुराने दो । गाय घोड़े पशु पक्षियों के चारा दाना तक में घोटाले हुए । सीमा पर दुश्मन से लोहा लेने के लिए खरीदे जाने वाले अस्त्र शस्त्रों में घोटाले … Read more

चार साल बनाम एक साल, असली चुनौती

नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने पर इसका गहन आकलन होना स्वाभाविक है कि उम्मीदें कहां तक पूरी हुईं और अच्छे दिन के वादे का क्या हुआ? मोदी सरकार जिस प्रबल बहुमत से साथ सत्ता में आई थी उसके चलते उससे उम्मीदें भी बहुत बढ़ गई थीं। सच तो यह है … Read more

बिन पानी सब सून

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून | अगर चौथा विश्वयुद्ध होगा तो वो पानी को लेकर होगा | तो पानी को लेकर कभी कबीर दास जी ने सोचा तो कभी आधुनिक दौर मे आइंस्टीन जी ने भी चेताया और अपनी चिंताए जाहीर की | अगर पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की ही कमी होती है … Read more