बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!!

तारकेश कुमार ओझा कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को एक जगह ला खड़ी करती है। 80 के दशक तक जबरन बाल विवाह की सूली … Read more

बीजेपी की दुविधा

विभिन्न रिपोर्ट और अनेक लेखों के अध्यन के बाद अनुमानतः देश के १३२ करोड़ की आबादी में विभन्न वर्गों का प्रतिशत कुछ यूँ होता है ब्राह्मण ४% क्षत्रिय ७% वैश्य ५% मुश्लिम १७% ईसाई २% ये सब मिलकर हुए ३५%,१३२ करोड़ में से ४६.२ करोड़ निकले तो बचे ८५.८ करोड़ जो दलित पिछड़ा औ बी … Read more

अदाकारी

ज़िंदगी के रंग मंच पर आदमी है सिर्फ़ एक कठपुतली । कठपुतली अपनी अदाकारी में कितने भी रंग भर ले आख़िर; वह पहचान ही ली जाती है, कि वह मात्र एक कठपुतली है । ऐसे ही आदमी चेहरे पर कितने ही झूठे-सच्चे रंग भरे अंत में, रंगीन चेहरे के पीछे असली चेहरा पहचान ही लिया … Read more

जागो ग्राहक जागो !

साथियों, उत्पाद निर्माता कंपनियों द्वारा किस प्रकार उपभोक्ताओ को भ्रमित कर अपना माल बेचा जाता है, इसकी एक जानकारी आपसे शेयर करना चाहता हूँ। समाचार पत्रों में विज्ञापन पढ़ते समय आपने देखा होगा कि निर्माता कंपनी / विक्रेता / विज्ञापनदाता विज्ञापन में एक स्टार * जिसे asterisk कहा जाता है, का इस्तेमाल करते हैं यह … Read more

ख़लिश

जिस सहर पे यकीं था वो ख़ुशगवार न हुयी देखो ये कैसी अदा है नसीब की समझा था जिसे बेकार, वो बेकार न हुयी मांगी थी जब तड़प रूह बेक़रार न हुयी कहूँ अब क्या किसी से देखकर माल-ओ-ज़र भी मिरि चाहतें तलबगार न हुयीं सोचा था जिन्हे अपना वो साँसें मददगार न हुयीं है … Read more

व्यंगात्मक ग़ज़ल :- पति की अभिलाषा

सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें सोच रखा है छुट्टी का दिन सारा आराम करके गुजार दूँगा चाय पीके सो जाऊंगा, कहीं वो शॉपिंग की याद न दिला दें हफ़्ते भर की थकान मीठी नींद, भीने सपनो … Read more

जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई

जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई दफ़्तरी से हुए वाबस्ता तो आवारगी चली गई शौक़ अब रहे न कोई ज़िंदगी की भागदौड़ में दुनियाँ के दस्तूर में मिरि कुशादगी चली गई ज़िम्मेदारियों का वज़न ज्यूँ बढ़ता चला गया ईमान पीछे छूट गया और शर्मिंदगी चली गई भागते भागते दौलतें न बटोर सके ज़माने … Read more

अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर

भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन एवं विनिर्माण के कारण चालु वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है जबकि इसी तिमाही में चीन … Read more

मिशन मून से पहले नदियों को जोड़ना जरूरी

देश के कुछ राज्यों में बाढ़ से हुई तबाही ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या हमारे देश में विकास की प्राथमिकताएं तय होती है या नहीं ? उत्तराखंड ,यूपी, बिहार,बंगाल ही नहीं,राजधानी दिल्ली में भी बरसात के बाद जो हालत होती है ,वह यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि मिशन मून … Read more

मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था

मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा … Read more

आपबीती पर पेश है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा की चंद लाइनें

दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!! बचपन में कहीं पढ़ा था रोना नहीं तू कभी हार के सचमुच रोना भूल गया मैं बगैर खुशी की उम्मीद के दुख – दर्दों के सैलाब में बहता रहा – घिसटता रहा भींगी रही आंखे आंसुओं से हमेशा लेकिन नजर आता रहा बिना दर्द के समय देता रहा … Read more