संथारा आत्महत्या नहीं, आत्म समाधि की मिसाल है

जैन धर्म के छोटे-से आम्नाय तेरापंथ धर्मसंघ के वरिष्ठतम मुनि श्री सुमेरमलजी सुदर्शन का इनदिनों दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में संथारा यानी समाधिमरण का आध्यात्मिक अनुष्ठान असंख्य लोगों के लिये कोतुहल का विषय बना हुआ है। मृत्यु के इस महामहोत्सव के साक्षात्कार के लिये असंख्य श्रद्धालुजन देश के विभिन्न भागों से पहुंच रहे हैं। … Read more

नोटबंदी की नाकामी का जवाब कौन देगा?

चुनाव जीतने के लिए भी जुमला और सरकार बनने के बाद भी जुमला।पहले कहा था कि बैंकों में इतना काला धन जमा है कि हर भारतीय के खाते में 15 -15 लाख रुपए जमा कराए जा सकते हैं । लेकिन बाद में इसे चुनावी जुमला बताकर खारिज कर दिया । भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने … Read more

इंसानियत से प्यार

इंसानियत से प्यार जब दीन-ओ-जान हो जायेगा मुज़्तरिब हाल में हाथ थामना ईमान हो जायेगा रस्म है, ज़िंदगी करवटें बदलती रही इब्तिदा से शिद्दत से जिया जो मालिक मेहरबान हो जायेगा ख़ुदसे मुलाक़ात कीजिये रोज़ाना आईने के रूबरू बिख़र गया चकाचौंध में फिर इंसान हो जायेगा हो गया ख़ामोश गिर कर इंसाँ तौबा भी कीजिये … Read more

अब गधे को जेब्रा बनाकर ठगा जा रहा है !

खबर है कि मिश्र की राजधानी काहिरा के चिडिया घर में गधे पर काली-सफेद धारियां पेंट कर जेब्रा बना कर खडा कर दिया गया ताकि वहां जाने वाले दर्शक भ्रमित होते रहे. इधर गधे के भी भाव बढ गए. जब यह खबर दुनियां भर के अखबारों में छपी तो हमारें देश के कुछ लोगों को … Read more

सही कहा गया है … भगवान केवल भक्तं भाव के भूखे होते हैं !!

इस वर्ष के चारो सोमवार व्‍यतीत हो गए और मैं एक भी सोमवारी व्रत न कर सकी। इधर कुछ वर्षों से ऐसा ही हो रहा है , कभी काम की भीड और कभी तबियत के कारण सोमवारी व्रत नहीं कर पा रही हूं। हमारे धर्म में सावन महीने के सोमवार का बहुत म‍हत्‍व है। सावन … Read more

ईश्वर की तलाश खुद में करें

परमात्मा को अनेक रूपों में पूजा जाता है। कोई ईश्वर की आराधना मूर्ति रूप में करता है, कोई अग्नि रूप में तो कोई निराकार! परमात्मा के बारे में सभी की अवधारणाएं भिन्न हैं, लेकिन ईश्वर व्यक्ति के हृदय में शक्ति स्रोत और पथ-प्रदर्शक के रूप में बसा है। जैसे दही मथने से मक्खन निकलता है, … Read more

रेल की खिड़की से शहर – दर्शन …!!

तारकेश कुमार ओझा किसी ट्रेन की खिड़की से भला किसी शहर के पल्स को कितना देखा – समझा जा सकता है। क्या किसी शहर के जनजीवन की तासीर को समझने के लिए रेलवे ट्रेन की खिड़की से झांक लेना पर्याप्त हो सकता है। अरसे से मैं इस कश्मकश से गुजर रहा हूं। जीवन संघर्ष के … Read more

समझो तुम तो कोई बात हो

मेरी बैचेनियों को कभी, समझो तुम तो कोई बात हो, मेरी सांसो की मन्थर गति को, समझो तुम तो कोई बात हो, तुम जो समझो राधे सी बन, तडप को श्री कृष्ण की, जो भी मेरे ह्दय में हैं भावना बस, समझो तुम तो कोई बात हो। तुम ना समझी मुझको कभी, अब समझ लो … Read more

सत्तामद होता ही पतन के लिए है

सत्तामद होता ही पतन के लिए है। पतन कई कारणों से होता है । सत्ता का पतन निरंकुशता के कारण माना जाता है । निरंकुश कभी भी दीर्घ अवधि तक गद्दी पर आसीन नहीं रहे। इतिहास बताता है हिटलर को स्वयं आंखें मूंदनी पड़ी । अभी अधिक समय नहीं हुआ, मीडिया पर अंकुश यानी दमन … Read more

सशक्त विपक्षी गठबंधन की बाधाएं

आगामी लोकसभा चुनाव की हलचल उग्र होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी बनाम विपक्षी गठबंधन का दृश्य बन रहा है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, विपक्षी एकता के स्वर सुनाई दे रहे हैं। लेकिन सशक्त विपक्ष के गठबंधन की सबसे बड़ी बाधा भावी प्रधानमंत्री को लेकर है। फिर भी विपक्षी गठबंधन को … Read more

आप माउंट आबू फिर आएंगे न अटलजी !

-निरंजन परिहार- अटल बिहारी वाजपेयी पहाड़ों की खूबसूरती के कायल थे। हिल स्टेशनों की छटा उन्हें खूब आकर्षित करती थी। यही कारण था कि अटलजी राजस्थान के बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन माउंट आबू में बस जाना चाहते थे। उन्होंने एक बार तो अपने साथियों से खुद के लिए घर भी तलाशने को कहा। घर तलाशा … Read more