त्रिवेन्द्र पाठक न तो अन्धा है और न ही बेवकूफ

कुछ लोगों को लगता है कि जो धर्म निरपेक्ष है वो खुद का धर्म भी नहीं समझता वो सब चिंता ना करें बन्धुवर त्रिवेन्द्र पाठक हिन्दू है, वह सनातनी पंडित भी है, किन्तु न तो कांग्रेसी है ना भाजपाई। किन्तु न तो अन्धा है और न ही बेवकूफ। मुझे दिखता भी है मित्रों और समझ … Read more

दिल्ली सरकार में भ्रष्टाचार के दंश

देश में भ्रष्टाचार पर जब भी चर्चा होती है तो राजनीति को निशाना बनाया जाता है। आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी भ्रष्टाचार को शक्तिशाली बनाने में राजनेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका का होना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि भारत की राजनीति पर एक बदनुमा दाग है। इस दाग को भ्रष्टाचार को समाप्त … Read more

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नाम खुला पत्र

सम्मानीय वसुन्धरा जी मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार मुझे स्मरण आता है। भूतपूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने आपको राज्य की बागडोर सम्भालने को नामित किया। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आपने राजस्थान में जाजम बिछाने की शुरुआत की। उसे लेकर तब आप काफी सशंकित भी रही। *तब राज्य के कुछेक आलाधिकारियों से हुई निजी बातचीत में एक … Read more

कॉंग्रेस की सत्ता में वापसी की प्रबल संमभावनायें

राजस्थान में दो संसदीय क्षेत्रों अजमेर व अलवर एंव एक विधान सभा क्षेत्र मॉडलगढ( भीलवाडा)के उप चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत व भाजपा की करारी हार राज्य व देश को संदेशदेते हैं कि मतदाता का भ्रम टूट चुका व मतदाता को अहसास हो चुका है कि भाजपा के प्रधानमंत्री के जुमलेबाजी,स्वप्न भ्रमित पूर्ण रोज़गार … Read more

भाजपा सत्ता और संगठन ने उपचुनाव में हार का ठीकरा फोड़ा नौकरशाही के सिर पर

अन्धा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपनो को दे , वाली कहावत भाजपा में पूर्ण रूप से चरितार्थ हो रही है। पहले नौकरशाहों को राजनीतिज्ञ बना दिया अब ब्यूरोक्रेसी पर दोषारोपण कर अब ब्यूरोक्रेसी पर गाज गिराने की बात कर रही है , भाजपा सरकार खुद की ओर देख ही नहीं रही है कि कैसे सरकार ने … Read more

गांव, गरीब और किसान की सुुध लेता बजट

बजट हर वर्ष आता है। अनेक विचारधाराओं वाले वित्तमंत्रियों ने विगत में कई बजट प्रस्तुत किए। पर हर बजट लोगों की मुसीबतें बढ़ाकर ही जाता है। लेकिन इस बार बजट ने नयी परम्परा के साथ राहत की सांसें दी है तो नया भारत- सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी व्यक्त किया है। इस बजट … Read more

पकौड़ा तलिए खुद खाइए औरों को खिलाइए

अब्दुल रशीद।। आमचुनाव के कुछ महीने ही शेष बचे हैं। चनाव से पहले सरकार का आखिरी आम बजट 2018-2019 वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया। जिसमें एक बार फिर बड़े बड़े सपनों को दिखाते हुए घोषणा किया गया है।ये और बात है कि इन घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए बजट कहाँ से आएगा इसका … Read more

अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग

आजकल देश में भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। एक तरह से भ्रष्टाचार शिष्टाचार हो गया है। ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड एवं भ्रष्टाचार के किस्से उद्घाटित हो रहे हैं जिन्हें सुनकर एवं देखकर शर्मसार हो जाते हैं। समानांतर काली अर्थव्यवस्था इतनी प्रभावी है कि वह कुछ भी बदल सकती है, बना सकती है और मिटा सकती है। भ्रष्टाचार … Read more

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहेब

“साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे उड़ाय।। ” कबीर दास जी भले ही यह कह गए हों, लेकिन आज सोशल मीडिया का जमाना है जहाँ किसी भी बात पर ट्रेन्डिंग और ट्रोलिंग का चलन है। कहने का आशय तो आप समझ ही चुके होंगे। जी हाँ, विषय है … Read more

बजट की छांव में उम्मीदों का सच

भारत भविष्य की आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देख रहा है और उस दिशा में आगे बढ़ भी रहा है। लोकसभा में प्रस्तुत किये गये आर्थिक सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था का जो नक्शा निकला है वह इस मायने में उम्मीद की छांव देने वाला है। सकल विकास वृद्धि दर के मोर्चे पर भारत तेजी … Read more

वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

वाकई इस दुनिया में पग – पग पर कंफ्यूजन है। कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब तो मिलते नहीं अलबत्ता वे मानवीय कौतूहल को और बढ़ाते रहते हैं।हैरानी होती है जब चुनावी सभाओं में राजनेता हर उस स्थान से अपनापन जाहिर करते हैं जहां चुनाव हो रहा होता है। चुनावी मौसम में देखा जाता … Read more