सड़े गले सिस्टम ने ले ली संतोषी की जान

संतोषी कुमारी के परिवार के साथ तारामणि साहू
अब अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए एक महिला शिकायतकर्Ÿाा के खिलाफ लामबंद हुआ प्रशासन -बाबूलाल नागा- एक सड़े गले सिस्टम ने पहले तो संतोषी की जान ले ली और अब उसकी मौत को भूख से हुई मौत ना मान कर एक महिला शिकायतकर्ता को ही प्रताड़ित किया जा रहा है। झारखंड राज्य सरकार की एक जा Read more

डॉ मनमोहन सिंह के नाम से स्कोलरशिप शुरु की

मुजफ्फर अली
शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया की जानी मानी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नाम से स्कोलरशिप शुरु की है। जीवन में शिक्षा के महत्व को समझने वालों के लिए यह खबर बहुत अहम है वहीं हर भारतीय को गर्व करने का अवसर देती है। डॉ मनमोहन सिंह का Read more

मुझ जैसा जो बिखरा था, वो मेरा ही कमरा था.

सुरेन्द्र चतुर्वेदी
मुझ जैसा जो बिखरा था, वो मेरा ही कमरा था. मैं तो था मज़ार जैसा, वो भी एक मक़बरा था. चुभने लगा किनारों को, पानी बहुत खुरदरा था. शहर में तो थी आगज़नी, मैं जंगल से गुजरा था. उस पहाड़ पर था चढ़ना, जिस पहाड़ से उतरा था. चेहरे देखे कब मैंने, मैं टूटा आईना था. जिसमे सारी उम्र कटी, अँधा , Read more

गंजों के हाथ में कंघा, अंधों के पास आईना

अमित टंडन
High कोर्ट ने करीब एक माह पूर्व आदेश दिए हैं के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब फिक्स pay (मानदेय अथवा संविदा) पर दोबारा ना रखा जाए। स्थाई कर्मचारियों से काम कराया जाए। बावजूद इसके विभागों और निगमों में रिटायर्ड कर्मचारी लगातार काम किये जा रहे हैं। हालाँकि सोच ये है कि उनके बर Read more

आस्था की दुकान

देवेन्द्रराज सुथार
भारत के गली-गली में आस्था की दुकान चल रही है। आस्था के नाम पर कोई न कोई किसी न किसी को ठग रहा है। आजकल टेलीविजन पर राधे मां के ढिंचैक डांस की चर्चा परवान पर है। गांव में चौपाल पर बैठे बुजुर्ग जिनके पांव कब्र में लेटे है, वे भी राधे मां के ढिंचैक डांस पर जमकर बहस कर रहे है। क Read more

मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श

lalit-garg
प्रत्येक वर्ष 30 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1924 में इटली के मिलान में पहला अंतर्राष्ट्रीय मितव्ययिता सम्मेलन आयोजित किया गया था और उसी में एकमत से एक प्रस्ताव पारित कर विश्व मितव्ययिता दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया। तभी से यह द Read more

भविष्य में दामाद क्यूब के भी अवसर है

शिव शंकर गोयल
फिल्म “धूल का फूल” के एक गाने की पैरोडी है जिसके अनुसार कहा गया है:- “तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं, शहर का शहर में सासरा चाहता हूं” यह पैरोडी योंही नही बन गई है. इसमें शोधकर्ताओं का बहुत ज्ञान एवं अनुभव खर्च हुआ है. शादी के पहले जब “लगन” लग जाती है उन्ही दिनों की बातें है. Read more

लग तो यही रहा है कि भगवा तेवर में होगा अगला चुनाव

निरंजन परिहार
-निरंजन परिहार- रंग दे तू मोहे गेरुआ….. ना तो देश की जनता ने यह गाया और ना ही ‘दिलवाले’ फिल्म में गाए शाहरुख खान के इस गाने के पीछे कोई पूरे देश की भावना थी। फिर भी लग ऐसा रहा है कि जैसे जैसे अगला लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, पूरा देश धीरे धीरे गेरुआ यानी भगवा रंग की त Read more

अतिथि देवो भवः की परम्परा पर दाग लगना

lalit-garg
अतिथि देवो भवः तो हम सदियों से कहते आए हैं लेकिन अतिथि के साथ हम क्या -क्या करते हैं, किस तरह हम इस आदर्श परम्परा को धुंधलाते हैं, किस तरह हम अपनी संस्कृति को शर्मसार करते हैं, इसकी एक ताजा बानगी स्विट्जरलैंड से आए एक युगल के साथ हुई मारपीट एवं अभद्र घटना से सामने आयी है। इस Read more

साथ देखे थे कभी ख़्वाब सुहाने कितने

सुरेन्द्र चतुर्वेदी
साथ देखे थे कभी ख़्वाब सुहाने कितने, और बाक़ी हैं अभी ख़्वाब न जाने कितने. उसको मालूम था रुख्सत की घड़ी है फिर भी, (रुखसत = जुदाई) मुझसे करता रहा मिलने के बहाने कितने. प्यार से पाला हुआ उड़ जो गया है पंछी, उससे रिश्ते थे मेरे यूँ तो पुराने कितने. एक लम्हा न कटा उसके बिना लम्हे सा Read more

बटवारा

हेमंत उपाध्याय
दो भाई प्रकांड पंडित थे। पूरा गांव ही नहीं आसपास के गांवों के लोग भी उन्ही से पूजा पाठ कराते थे । पूजा पाठ व भागवत कथा से जो भी मिलता वे आधा – आधा बांट लेते । एक बार एक ही दिन मै उनके गांव के पास के दो गावों मै पूजा का काम निकला । दोनो भाई एक- एक गाँव चले गए । वह Read more