मासिक राशिफल, सितम्बर -2014

यह मासिक कुण्डली पूर्वानुमान सितम्बर -2014 वैदिक विश्लेषण चन्द्र राशि आधारित राशिफल है। यह राशिफल -फलादेश,गोचर तथा नाम राशि के आधार पर दिया गया हैं,पाठक अपनी जन्म कुंडली में स्थित दशा -महादशा एवं ग्रहफल को प्राथमिकता देवें.. वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को अत्यन्त महत्ता दी गयी है। “ चन्द्रमा मनसो जात:” ज्योतिष में चन्द्रमा को … Read more

श्रीगणेश को दुर्वा इतनी प्रिय क्यों है?

कहा जाता है कि इसकी जड़ें पाताल लोक तक जाती हैं और अमृत खींचती हैं। जिस प्रकार यह स्वयं बढ़ती है उसी प्रकार यह वंश वृद्धि की भी संकेतक है। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार यो दूर्वांकरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति। अर्थात- जो दुर्वा की कोपलों से (गणपति की) उपासना करते हैं उन्हें कुबेर के समान धन … Read more

गणेश चतुर्थी

इस वर्ष गणेश चौथ का पर्व शुक्रवार (29 अगस्त,2014 को) पुरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जायेगा… इस समय 2014 में विक्रम सम्वत् 2071 के भाद्रपद मास की शुक्ल पक्षीय चतुर्थी को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी यह अवसर इस वर्ष 29th अगस्त,2014 (शुक्रवार) को आ रहा हैं..इस दिन हस्त नक्षत्र होने के साथ साथ … Read more

जानिए की वर्ष 2014 में किन राशियों के लोगों को शनि के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा

मेष राशि—– साल 2014 में शनि आपकी राशि से सप्तम स्थान पर 2 नवंबर 2014 तक भ्रमण करेंगे। सप्तम भाव में शनि की स्थिति कार्यक्षेत्र व आजीविका की स्थिति ठीक-ठाक रखेगी परंतु पारिवारिक दृष्टि से यह समय आपके लिए काफी उत्तेजनापूर्ण रहेगा। संतान व बड़े बुजुर्गों को लेकर चिंता की स्थिति बनेगी। पति-पत्नी में मतभेद … Read more

वास्तु शास्त्र द्वारा गृह क्लेश निवारण

आज के आधुनिक युग में भवन निर्माण का कार्य अत्यन्त कठिन हो गया है। साधारण मनुष्य जैसे तैसे गठजोड़ करके अपने लिए भवन की निर्माण करता है। तब भी यदि भवन वास्तु के अनुसार न हो तो मनुष्य दुखी, चिंतित एवं परेशान रहने लगता है। वास्तु शास्त्र वस्तुतः कला भी हैं और विज्ञान भी । … Read more

भगवान श्री कृष्ण के 5241वें जनम दिवस पर विशेष

यदा यदा हि धर्मस्य, ग्लानिर भवति भारत | अभ्युत्थानं अधर्मस्य, तदात्मानं स्र्जम्यहम || परित्रनाया च साधुनाम, विनाशाय च दुष्कृताम | धर्मं संस्थाप्नायार्थाया, सम्भवामी युगे युगे || जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है तब-तब भगवान पापों से विश्व को मुक्त करवाने हेतु किसी ना किसी रूप में अवतरित होते हैं| द्वापर युग में भगवान विष्णु ने … Read more

वीरांगना अवंती बाई का आत्मोत्सर्ग

16 अगस्त 2014 183वें जन्मदिवस पर विशेष 1857 की क्रांति में रामगढ़ की रानी अवंतीबाई रेवांचल में मुक्ति आंदोलन की सूत्रधार थी। 1857 के मुक्ति आंदोलन में इस राज्य की अहम भूमिका थी, जिससे इतिहास जगत अनभिज्ञ है। 1817 से 1851 तक रामगढ़ राज्य के शासक लक्ष्मण सिंह थे। उनके निधन के बाद राजकुमार विक्रमाजीत … Read more

चाहिए तन-मन स्‍वस्‍थ तो आफिस भी बनाएं वास्‍तु सम्‍मत

यह सच है कि ज्‍यादातर लोगों की अधिकांश चिंताएं आर्थिक मामलों को लेकर होती हैं। किसी को बिजनेस की चिंता तो किसी को नौकरी और बॉस का डर। इस चिंता का सीधा असर हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पडता है। कभी-कभी तमाम प्रयासों के बाद भी हम कार्यस्‍थल से तनाव लेकर वापस लौटते हैं। इसका कारण हमारे … Read more

समृद्धि के खोले द्वार

प्रत्येक मनुष्य अपना जीवन आनन्दमय, सुखी व समृद्ध बनाने में हमेशा लगा रहता हैं । कभी-कभी बहुत अधिक प्रयास करने पर भी वह सफल नहीं हो पाता हैं । ऐसे में वह ग्रह शांति, अपने ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करता हैं । परन्तु उससे भी उसे आशाअनुरूप फल प्राप्त नहीं होने पर वह अपने … Read more

रक्षाबंधन पर बन रहा हैं विशेष “आयुष्यमान योग”

इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन चन्द्रमा मकर राशि का होने के कारण एक अनूठा योग “आयुष्यमान योग” निर्मित हो रहा हैं, जो दिनभर रहेगा…. यह अनूठा संयोग काल गणना के अनुसार बहुत लम्बे समय के बाद आ रहा हैं..इस कारण इस वर्ष रक्षाबंधन का महत्त्व बढ़ गया हैं.. यह योग इस वर्ष इस पर्व को … Read more

भाई बहन के अटूट प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन

शास्त्रों में उल्लेख है कि श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि (श्रावणी पूर्णिमा) को रक्षाबंधन का त्योहार श्रवण नक्षत्र में सुबह के दो प्रहर छोड़कर(अपरहण) दोपहर से मनाया जाना चाहिए। अत्रैव रक्षाबंधनमुक्तं हेमाद्रौ भविष्ये- सम्प्राप्ते श्रावणस्यान्ते पौर्णमास्यां दिनोदये। स्नानं कुर्वीत मतिमान् श्रुतिस्मृतिविधानत:।।          उपाकर्मोदिकं प्रोक्तमृषीणां चैव तर्पणम्। शूद्राणां मन्त्ररहितं स्नानं दानं प्रशस्यते।|                            उपाकर्माणि कर्तव्यमृषीणां चैव पूजनम्।                             ततोऽपरान्ह समये रक्षापोटलिकां शुभाम्।|                            कारयेदक्षतै: शस्तै: सिद्धार्थैर्हेमभूषितै:।                  इति। अत्रोपाकर्मानन्तरस्य पूर्णातिथावार्थिकस्यानुवादो न तु विधि:। गौरवात् प्रयोगविधिभेदेन क्रमायोगाच्छूद्रादौ तदयोगाच्च। तेन परेद्युरुपाकरणेऽपि पूर्वेद्युरपरान्हे तत्करणं सिद्धम्। इस बार 10 अगस्त 2014 को पूर्णिमा दिवसपर्यंत और … Read more