सरकार ब्रह्मा जी के द्वार, पवित्र पुष्कर सरोवर दुर्दशा और प्रदूषण का शिकार

करोड़ों धार्मिक जनों की आस्था को आघात

अरुण पाराशर

अरुण पाराशर

माननीय मुख्यमंत्री अपने मंत्री मण्डल के साथ पुष्कर यात्रा के दौरान प्रदूषित हो चुके पवित्र सरोवर के जल का आचमन मार्जन कर ,आस्था की डुबकी लगा,पवित्र सरोवर की परिक्रमा लगा पुण्य कमाना ना भूले 🌷🌷एक पत्र माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम
जगत पिताश्री ब्रह्माजी जिनकी इस मृत्यु लोक में एक मात्र तपो स्थली और उनके द्वारा निर्मित पुण्यदायी पवित्र पुष्कर ब्रह्म सरोवर अपने अतीत और गौरव पर आँसू बहा रहा है ,पद्म पुराण आदि अनेको शास्त्रों में इस पावन सरोवर की जो महिमा बताई गई है उसकी तुलना किसी भी तीर्थ से श्रेष्टतम कही गई ,इस पावन भूमि को आदि अनादि कह कर ,इसे मृत्यु लोक (पृथ्वी का) वैकुण्ठ कहा गया है , जिसे देवताओं के लिए भी दुर्लभ बताया गया है ,और तो और इसकी महिमा में यहाँ तक कहा गया है कि इस पावन भूमि में रात्री निवास , पुण्यदायी सरोवर में स्नान आचमन पूजा अर्चना और तप भाग्यशाली होने और ब्रह्मा जी की इच्छा के बिना मानव तो क्या देवताओं को भी सुलभ नही हो सकता है । ऐसी श्रेष्ठता को प्राप्त तीर्थ में पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु ,धर्म प्रेमी ,देशी विदेशी इस पावन ब्रह्म सरोवर में आस्था की डुबकी लगा , पूजा अर्चना , पितरों के तर्पण पिण्ड दान करने पुण्य प्राप्ति की अभिलाषा लेकरआते है ।
पवित्र पावन सतयुगी तीर्थ पुष्कर के ब्रह्म सरोवर के लिये ऐसी गौरवमयी प्रधानता हमारे शास्त्रों ने गाई और बताई है उस पवित्र सरोवर की आज जो दुर्दशा सरकार और जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता और दूरदर्शिता को नजर अंदाज कर मात्र इसके नाम से वोटों की राजनीति हुई है , वह भारतीय पुरातन ,सनातन ,धर्म संस्कृति को शर्मसार कर रही है ,यह हाल तब है जब स्थानीय से लेकर प्रदेश और देश में हिन्दू धर्म की पौषक सरकारे है जो गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बजट में अरबो रुपयों की घोषणा करती हो उन सरकारो से एक मामूली से क्षेत्रफल वाला पूर्ण रूप से सीवरेज के गन्दे पानी के कारण प्रदूषित हो चुके धार्मिक आस्था से जुड़े सरोवर को निर्मल रखने के लिए न कोई बजट प्रावधान है ना ही कोई इच्छा शक्ति कहीं दूर दूर दिखाई दे रही है ।
पुष्कर तीर्थ वासी और श्रद्धालु जन सालों से इस दर्दनाक ,शर्मसार करने वाली समस्या से खुद परेशान रहते है , अपनी आँखों के सामने पवित्र सरोवर में बरसाती दिनों में सीवरेज के फेल्युअर सिस्टम के कारण सीवरेज के गन्दे पानी को सरोवर में घाटों के रस्ते घुल मिल जाते देख रहे है , स्थानीय जन ,जिनकी लाइफ रोजी रोटी सब कुछ इस पवित्र सरोवर पर निर्भर है वे लोग मूक बन सब कुछ होता देख भी चुप रहते है क्यों की यदि पवित्र सरोवर में सीवरेज के गन्दे पानी की बात जग जाहिर करने का मतलब ,सबके लिए रोजी रोटी का संकट फिर कौन श्रद्धालु जन करेगा पूजा आचमन स्नान तर्पण और कौन चलाएगा आजीविका ,इस भय से कोई भी चाहे मिडिया ही क्योँ नही सरोवर के जल को प्रदूषित बताने में परहेज करते रहे है , लेकिन एक सीमा होती है समस्या को सहने कि जिसे एक हद तक सहन किया जा सकता है अब तो हालात ये हो गए है कि देखते ही देखते सरकार और प्रशासन की अकर्मण्यता और अनदेखी ने समस्या को इस कदर विकराल बना दिया है कि पहले तो बरसाती पानी के साथ ही सीवरेज की गन्दगी सरोवर में जाती रही है बल्कि अब तो सामान्य दिनों में ही नकारा सीवरेज सिस्टम के बिजली गुल , मशीन जल गई , कोई भी कारण बनता है और सीवरेज का गन्दा पानी , शहर के किसी भी हिस्से में चैंबरों से उफ़न कर सड़कों बाजारों , पवित्र परिक्रमा मार्ग आदि पर जमा हो सीमा लांघकर सीधे सरोवर में जाने लगा है ये एक दिन की नही ये रोज रोज की समस्या हो गई है कि फिर भी चुप रहकर सब झेल ही रहे है श्रद्धालु , स्थानीय लोग परिक्रमा लगाये तो गन्दे पानी में , घाट पर स्नान ,पूजा के लिए जाये तो गन्दे पानी में , कोई सुनने वाला नही , इस असंवेदनशील सरकार में रोते रहो , और भुगतते रहो की स्थिति ने पिछले दो दिनों में समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया ,जहाँ देखो सीवरेज का गन्दा पानी ,अब सीमा लांघकर सीधे पवित्र सरोवर में जा रहा है तो लोग और मिडिया जो आज तक चुप था ये सब होता देख या यों कहें की ,लोगो और तीर्थ पुरोहितो का अपने नकारा जनप्रतिनिधिओ और सरकार के प्रति गुस्सा फूट पड़ा और आन्दोलित हो प्रदर्शन पर उत्तर आये , नकारा जन प्रतिनिधि तो इन्हें भी साम ,दाम दण्ड भेद की नीति से साध कर इनके मुँह बन्द कर देते , यदि सरकार का ब्रह्मा जी द्वार आने का कार्यक्रम नही बनता ,घण्टी बजी जिला प्रशासन भी पहली बार हरकत में दिखा , जब पानी सर के ऊपर बहने लगा तो डूबने की चिंता से आनन ,फानन में लोग दिखाऊ गुस्साएं लोगो का मुँह चुप करने के लिए एक स्थायी समाधान विहीन , 5 करोड़ की राशि से सरोवर में सीवरेज के गन्दे पानी की रोक थाम के लिए डी पी आर बनाने की घोषणा ,मुख्यमंत्री जी की मुँह दिखाई में करनी पड़ी ताकि जब मुख्यमंत्री आगामी दौरे पर पुष्कर आये तो उनके हाथों धार्मिक आस्था पर जो आघात हो रहा है उस पर मरहम लगाई जा सके कि हम योजना बना रहे है , कि अब सरोवर में सीवरेज की गंदगी बहकर नही जायेगी , ये समस्या पिछले कई सालो से बनी हुई है , हिन्दू पौषक सरकार बने चार साल हो गए सब सोये रहे, आखरी साल में योजना बन रही है और कब पास होगी ,कब कार्य प्रारम्भ होंगे , कब पूरे होंगे , कहीं मौके की नजाकत में जुमला ही नही रह जाये ? अच्छी बात है तीर्थ के प्रति असंवेदनशील प्रशासन कुम्भकर्ण की नींद से जागा तो सही ,प्रश्न ये भी है कि आज की नई घोषणा से पहले इस समस्या के लिए कितनी योजनाये ,जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन , ए डी ए द्वारा बनाई गई जो इससे कई गुना बडे बजट की थी उनका क्या हुवा , वो आज तक ठंडे बस्ते में क्यों पड़ी रह गई उन पर आज तक काम क्यों नही हुवा ,इसका जबाब कौन देगा , यदि नही तो अब जो योजना का सपना दिखया जा रहा है उसकी क्या गारन्टी की ये योजना इस भयानक समस्या से निजात दिला पायेगी , कही पहले की जैसे ही आज की घोषणा की ना हो जाये , क्या जरूरत थी नई घोषणा की जब पहले से कई योजनाये सरकारी आलमारियों की शोभा बढ़ा रही हो ,उन्हें ही खंगाल लेते , देख लेते ,कि सीवरेज सिस्टम को स्थाई समाधान के लिए 8 .5 करोड़ की लागत के स्वीकृत कार्यो में सीवरेज के सम्पूर्ण गन्दे पानी को ग्रेविटी यानि ढ़लान लेवल से ही एस टी पी तक ले जाने का जब स्वीकृत योजना में प्रावधान था तो , किन कारणों से नकारा पम्पिंग सिस्टम पर ही रखे जाने का परिवर्तन कर दिया ,यदि ऐसा नही कर योजना अनुसार ऐसे ग्रेविटी सिस्टम से ही गन्दे पानी को निकासी रखी जाती रहे तो समस्या का स्थायी समाधान आज भी निकाला जा सकता है , नए अधिकारी नए इंजीनियर इसे अपनी सुविधा अनुसार योजना को तोड़ते , बर्बाद करते रहे , ।
पुष्कर नगर की भौगोलिक स्थिति कटोरें नुमा है , इसमे से लाख कोई कोशिश कर ले बिना ग्रेविटी सिस्टम के एक बून्द जल चाहे व् वर्षा जल हो चाहे सीवरेज का गन्दा पानी , शहर से बाहर नही निकाला जा सकता , तकनीकी रूप से ही समाधान निकाला जा सकता है , बरसाती नाले , सीवरेज सिस्टम से अलग कर उनके लिए अलग से नालों का निर्माण हो और दोनों का बहाव और निकासी भी अलग हो तब जाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सकता है , ऐसे आधारभूत ,और बुनियादी कार्यो के लिए सरकार को राजनीती से परे , अनुभवी और तकनीकी जानकारी रखने वाले विशेषयज्ञ जानकारों की मदद से आगे कार्य करे तो सफलता मिल सकती है , वरना होना वहीँ है जो होता आया है एक और योजना और घोषणा ठंडे बस्ते में चली जायेगी ?
हमारी शुभकामना है कितीर्थ सरोवर में सीवरेज के गन्दे पानी के जाने से दुर्दशा होकर जो धार्मिक आस्था को आघात पहुँच रहा है इसे माननीय मुख्यमंत्री जीआगामी पुष्कर यात्रा में स्वयं अपने मंत्री मण्डल के व् मुख्य शासन सचिव ,जिला कलक्टर सहित पावन पवित्र पुष्कर सरोवर में आचमन ,मार्जन कर ,आस्था की डुबकी लगाकर आम जन , श्रद्धालु , आस्थावानों के प्रति एक आदर्श सन्देश प्रस्तुत करे की , श्री ब्रह्मा जी का पवित्र ब्रह्म सरोवर गंगा माँ की तरह आज भी उतना ही पवित्र है जैसे कितनी भी प्रदूषित गंगा हो पर हमारी भावना में वो आज भी पवित्र पावन है मानते है ऐसे ही आपकी सरकार द्वारा सामूहिक आस्था की डुबकी लगाने और पुष्कर सरोवर परिक्रमा करने से सरोवर जल के प्रदूषित होने की भ्रान्ति कुछ हद तक दूर की जा सकती है ,क्यों कि जब 1 अक्टूम्बर को सीवरेज का गन्दा पानी सीधे सरोवर में जा मिला इस पर एक प्रसिद्ध दैनिक समाचार पत्र ने साफ कर दिया कि पुष्कर सरोवर का जल इतना प्रदूषित हो

चूका है कि आचमन लेना भी दुश्वार है लेने का मतलब बीमारियो को न्योता देना जैसा हो गया है , ये तब छपा जब पूरा देश 2 अक्टूम्बर गांधी जयंती के दिन को स्वच्छ भारत अभियान को साझा कर रहा था ।
हमें पूर्ण विश्वास कि माननीय मुख्यमंत्री जी अपनी सरकार के साथ पवित्र पुष्कर ब्रह्म सरोवर में आस्था की डुबकी लगा , सरोवर परिक्रमा भI लगाएँगी । जैसे कि हमारे लोकप्रिय माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी गंगा माँ के जल में डुबकी लगा पुण्य प्राप्ति ग्रहण कर आत्म तृप्ति महसूस करते है ऐसे ही पुण्यफल दायीं ब्रह्मा जी के पावन पुष्कर ब्रह्म सरोवर का जल अपनी आदि अनादि महिमा के अनुरूप आपको भी आत्म तृप्ति प्रदान करेंगा , इन भावनाओ के साथ – जनता की आवाज से

-अरुण पाराशर ,सामाजिक कार्यकर्ता ,पुष्कर ।

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