किताब की कमाई चैरिटी (दान) में देने का फैसला

—अमित टंडन—
प्रिय दोस्तों, 30 सितम्बर को मेरे ग़ज़ल संग्रह “अभी ख़्वाब ज़िन्दा हैं” का विमोचन संपन्न हुआ। आज जब साहित्य और काव्य खरीद कर पढ़ने का चलन लगभग खत्म हो चला है, ऐसे में ये उम्मीद तो नहीं करता के मेरी क़िताब बाज़ार में अच्छा व्यवसाय करेगी।
एक कारण ये भी है कि धीरे धीरे लोगों की रीडिंग हैबिट्स ख़त्म हो रही हैं। नई पीढ़ी ने तो जन्म ही स्मार्ट के दौर में लिया है। उन्हें किताबों से उतना ही वास्ता है जितना स्कूल कॉलेज का कोर्स है। स्मार्ट क्लासेज से बुक रीडिंग की वो हैबिट भी कम हो रही है।

अमित टंडन

अमित टंडन

बहरहाल, ऐसे में हम जैसे रचनाकार, जिनका नाम व पहचान नहीं है, उनकी किताब का बिकना एक नामुमकिन सी बात है।
बावजूद इसके, मैं दिल के जज़्बात यहां कहना चाहता हूँ। ग़ज़ल कविता लेखन मेरा शौक है, मेरा पेशा नहीं। लिहाज़ा इस क़िताब से कमाई का ना मेरा कोई ख़्वाब है, ना चाह। इसलिए मैंने फैसला किया है कि चाहे इस किताब की एक कॉपी बिके, 100 कॉपी (प्रतियां) बिकें या हज़ार; जो भी पैसा आयेगा, वो चैरिटी में दे दूंगा। किताब की बिक्री से आने वाली कोई भी रकम किसी सामाजिक पुण्य के काम में खर्च कर दी जायेगी। चाहे वुद्ध आश्रम हो, अनाथालय हो, विशेष बच्चों की सांस्था हो, विधवा आश्रम हो, गरीब कन्या का विवाह हो, अथवा ऐसा ही कोई अन्य सामाजिक पुनीत कार्य।
*आप सब जो साहित्य में रूचि रखते हैं, या ना भी रखते हैं… एक ही गुज़ारिश है, इस पुनीत कार्य में योगदान देना चाहें तो अवश्य मेरी किताब खरीदें। यदि इस हवन में एक आहुति आपकी तरफ से भी हुयी तो अवश्य ही एक नई शुरुआत होगी समाज के लिए। क्यों न हम और आप मिल के परमार्थ का एक सन्देश सहित्य के माध्यम से दुनिया को दें। आप सहमत हों, और सहयोग करना चाहें तो बस एक प्रति लेकर परमार्थ कार्य में भागीदार बनें।*
किताब का मूल्य यूँ तो 300 रूपये है, लेकिन चैरिटी के मद्देनज़र इसे 250 रूपये में दिया जा रहा है। जैसे ही एक अच्छी रकम इकट्ठी होगी, उसको किसी पुनीत कार्य में लगा के उसकी सूचना भी आम की जायेगी।
*पुनः विनती एक क़िताब सिर्फ 250 रूपये, और एक सामाजिक अनुष्ठान में आपका सहयोग*

आपका
अमित टंडन
75/12, हाथी भाटा,
श्याम गली,
अजमेर (राज.)
305001
फोन – 9462071182

*किताब के लिए नीचे दिए पते पर संपर्क कर के कोरियर से किताब मंगा सकते हैं। इसके लिए 250 रूपये का चेक …..अमित टंडन…. के नाम भेज कर कोरियर से आप अपनी किताब प्राप्त के सकते हैं। अथवा सुविधा हो तो हाथों हाथ क़िताब प्राप्त करने के लिए भी संपर्क कर सकते हैं।*
धन्यवाद।

कोरियर से किताब मंगाने के इच्छुक व्यक्ति कृपया अपना पता व फोन नंबर स्पष्ट लिख के भेजें ताकि कोरियर करने में असुविधा ना हो।

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