सामान्य निवेश कर लगाईए प्लास्टिक कारखाना

सुकुमार भुइयां
सुकुमार भुइयां

-सुकुमार भुइयां- क्या आप जानते हैं कि महज 15 से 30 लाख रुपए का विनियोग कर आप वर्जित प्लास्टिक का खुद का कारखाना लगा सकते हैं। केंद्रीय ग्रामोद्योग की योजना के तहत 25 लाख रुपए की लागत से आप प्रतिघंटा 50 से 75 किलो का उत्पादन कर सकते हैं। हम सभी प्लास्टिक का उपयोग करते हैं। जैसे बाल्टी, मग, पोलीथिन, पतला कैरीबैग वगैरह। एक समय के बाद हम एेसी चीजों को फेंक देते हैं। जिसे प्लास्टिक वेस्ट कहा जाता है। एेसे परित्यक्त प्लास्टिक को रिसाइकिल कर नया प्लास्टिक बनाया जा सकता है। प्रख्यात प्राध्य़ापक साधन कुमार घोष ने इसकी विशेष प्रणाली व यंत्रादि का अविष्कार किया है। ग्रीन रिसाइकलिंग पद्धित से वर्जित प्लास्टिक से नए प्लास्टिक के दाने तैयार करने के लिए यादवपुर विश्व विद्यालय के के.पी. बोस मेमोरियल हाल में अब तक दो बार कार्यशाला का आयोजन किया जा चुका है। देश के कई अग्रणी शिक्षण संस्थान भी इस दिशा में सचेष्ट है कि कैसे पर्यावरण की संरक्षा के साथ ही परित्यक्त प्लास्टिक के जरिए लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। अब तक प्लास्टिक से प्रदूषण की विकट समस्या महसूस की जा रही थी। क्योंकि इससे जलनिकासी व्यवस्था के अवरुद्ध होने के साथ ही मिट्टी के स्पर्श से पेड़ – पौधों के विकास में समस्या की शिकायतें सामने आ रही थी। इसके लिए परित्यक्त व वर्जित प्लास्टिक को एक जगह जमा करके उन्हें जला डालने का सुझाव दिया जाता था। लेकिन इससे वायुमंडल के और भी दूषित होने का खतरा महसूस किया गया। आखिरकार प्राध्यापक साधन कुमार घोष ने अथक परिश्रम कर ग्रीन रिसाइकलिंग के जरिए परित्यक्त प्लास्टिक से प्लास्टिक के नए दाने तैयार करने के यंत्र का अविष्कार किया। इसकी लागत भी काफी कम है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है। प्लास्टिक के इन दानों को कैरीबैग, पाइप, बाल्टी व मग आदि तैयार करने के कारखानों में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इस कारखाने की स्थापना से कच्चे माल की कमी कभी नहीं होगी, साथ ही इसका वृहत्तर बाजार सर्वत्र उपलब्ध है।

तैयार करने की पद्धित
सबसे पहले कर्मचारी संग्रहीत प्लास्टिक को अच्छे से धो लेते हैं। यदि प्लास्टिक का आकार बड़ा है तो उसे कटर मशीन के जरिए छोटे – छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। फिर मशीन के जरिए उसे ग्रीन रिसाइकलिंग प्लास्टिक के दाने के रूप में परिवर्तित किया जाता है। तैयार करते समय उसमें इच्छित रंग भी डाला जा सकता है।

कच्चा माल
परित्यक्त प्लास्टिक उपलब्ध कराने के लिए कई एजेंसियां है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर सक्रिय कबाड़ी और प्लास्टिक तैयार करने वाले कारखानों के वेस्ट से भी इसकी उपलब्धता सुनिश्चित होती है। इसका बाजार सर्वत्र उपलब्ध है। प्लास्टिक तैयार करने वाले बड़े कारखानों की तुलना में इसकी लागत भी कम पड़ती है। इस पर सरकार की ओर से विभिन्न मद में करीब 30 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। इसके जरिए महीने में एक लाख रुपए तक की आमदनी की जा सकती है।

मशीनें कहां मिलेंगी
ग्रीन रिसाइकलिंग पद्धति की सारी मशीनें यादवपुर विश्व विद्यालय में मिलेंगी। इसके लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से संपर्क करना होगा। इस संबंध में लेखक से भी संपर्क कर सकते हैं।

योजना
1ः 1500 वर्ग फीट का एक शेड और पानी पर खर्चः 5 लाख 30 हजार रुपए
2ः मशीनें – ग्रीन रिसाइकलिंग प्रोसेस के लिए जरूरी चार मशीनों की कीमतः 8 लाख 79 हजार रुपए
3ः अन्य खर्चः 15 हजार रुपए

9000 किलो मासिक उत्पादन पर लाभ का परिमाण ( 40 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिक्री से मिलने वाली राशिः 3 लाख 60 हजार रुपए
कच्चा माल, वेतन, बिजली का खर्च व अन्य ः2 लाख 51 हजार 600 रुपए
2ः वेस्टेजः 13 हजार 200 रुपए
बैंक ऋण का ब्याजः 17 हजार 610 रुपए
शुद्ध लाभः 77 हजार 590 रुपए महीना
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लेखक मेदिनीपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता है। संपर्कः 973349236

20 thoughts on “सामान्य निवेश कर लगाईए प्लास्टिक कारखाना

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