लाखों मै एक

हेमंत उपाध्याय

हेमंत उपाध्याय

एक टाउनशिप की कई मल्टियों मै कई फ्लैट खाली थे । कुछ 10 मंजिला इमारत के 10-10फ्लेटो मै से किसी मंजिल पर दो तो किसी मंजिल पर अधिकतम तीन ही परिवार आये थे। एक नवजवान मेडम ने पांचवी मंजिल पर अपने खरीदे फ्लेट मै मजबूरन रहना प्रारंभ कर दिया था । पर उसकी नींद हराम हो गई थी. क्योँकि सामने वाले फ्लैट मै कालेज का एक स्टूडेंट रहने आ गया था । बड़े – बड़े बाल घनी दाडी । जो रात बे रात आता जाता था । सब उससे भयभीत थे । एक दिन वो दो बजे रात को घोर अंधेरे मै टपटप करते हुए आया मेडम के फ्लेट के पास आते- आते उसके पांव थमने लगे ।अंदर मेडम की सांस थमने लगी। उसने मेडम- मेडम बोलकर दरवाजा खटखटाया । लाईट गई थी ।इस लिए घंटी नही बजी । मेडम ने मोबाइल का टार्च चालू कर उसे डराने के लिए कहा– घर मै बहुत मेहमान आए है । सब लोग सो गए आप भागो नही वे उठकर मारपीट करेंगे व पुलिस भी बुला लेंगे । फिर भी दरवाजा खटखटाने पर मेडम हिम्मत कर बोली क्या है ? बाहर से आवाज आई आपके दरवाजे के चाबी दरवाजे के ताले मै ही लगी रह गई है । आजकल रोज चोरियां हो रही है । कोई भी रात को चाबी घुमाकर दरवाजा खोलकर अंदर आ सकता है।मेडम ने दरवाजा खोलकर चाबी दरवाजे मै से निकालकर उसे एक बार थेंक्स कहा व भगवान को बार -बार धन्यवाद देने लगी । आपने इतनी बडी मल्टी मै एक पडोसी दिया पर वह लाखो मै एक दिया।

हेमंत उपाध्याय
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