जननेता गिरोड़ीमल का भाषण

– देवेंद्रराज सुथार

चौदह सितंबर यानि हिन्दी का दिन है। यह दिवस आज गांव के गांधी मैदान में बड़ी धूमधाम से मनाया जाना है। जगह-जगह हिन्दी दिवस की चर्चा है। अनपढ़ लोगों में कानाफूसी जारी है। साथ ही में देहाती लोगों में हिन्दी दिवस को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा है। कार्यक्रम की रुपरेखा पहली ही बना दी गई थी। दो दिन पहले ही पूरे गांव में रेडियो के माध्यम से हिन्दी दिवस मनाये जाने की सूचना प्रचाारित-प्रसारित कर दी गयी थी। अखबारों में बड़ी-बड़ी खबरें नियमित प्रकाशित करवायी जा रही थी। आखिर जाने-माने प्रसिद्ध जननेता गिरोड़ीमल का संबोधन जो होने वाला है। लोग अपने नेता गिरोड़ीमल को सुनने के लिए बेताब है।

देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार

आखिरकार कार्यक्रम का आगाज जननेता गिरोड़ीमल के भव्य स्वागत के साथ हुआ। मैदान लोगों की भीड़ से खचाखच भरा हुआ है। अब किसी ओर के पैर तक रखने की जगह नहीं बची है। सब में अपने नेता गिरोड़ीमल के भाषण को सुनने की बड़ी तलब है। गांव के लोगों ने बहुत किस्से सुन रखे है जननेता गिरोड़ीमल के। आखिरकार गिरोड़ीमल मंच पर हिन्दी दिवस पर भाषण देने के लिए आ ही गये।

लोगों के हुजूम ने जननेता गिरोड़ीमल का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जोरों-शोरों से स्वागत किया। गिरोड़ीमल ने माइक से सबको ”थैंकू“ कहा। और बोलने लगे – मेरे प्यारे भाईयों और बहनों ! आज हम सभी हिन्दी दिवस ”सेलिब्रेट“ करने के लिए यहां इकट्ठे हुए है। हम सबको हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा ”यूज“ करना चाहिए क्योंकि, हिन्दी अपनी मातृभाषा है। इतने में मेरे पास में बैठे गांव के अस्सी वर्षीय रामू काका ने अपनी कोनी मेरी कमर पर मारते हुए कहा – बेटा ! यह सब तो ठीक है पर नेताजी के भाषण में सेलिब्रेट और यूज शब्द का अर्थ तो तनिक बताना। हमको हिन्दी पढते और सुनते अस्सी वर्ष हो गये है। हमने तो कभी हिन्दी में ऐसे किसी शब्द को आजतक नाम न तो सुना और न ही पढा है। कोई नया शब्द आया है क्या ? मैंने कहा काका नेताजी पढे-लिखे है, अंग्रेजी में बतिया रहे है। हिन्दी में सेलिब्रेट यानि मनाना और यूज यानि उपयोग होता है। समझें का ! रामू काका ने आश्चर्यपूर्वक हमें देखा।

नेताजी ने आगे कहा – हिन्दी को लेकर हम ”पार्लियामेंट“ में बहुत लड़े है। इतने लड़े है कि जितना तो कोई पहलवान गांव के अखाडे में भी कुश्ती नहीं लड़ता। हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए भाईयों और बहनों ! हम बहुत ”स्ट्रगल“ किये है और यदि आप अगले चुनाव में भारी वोटों से हमें जीतवायेंगे तो आगे भी बहुत ”स्ट्रगल“ करेंगे। रामू काका ने फिर कोनी मारी ओर कहा – बेटा ! पार्लियामेंट और स्ट्रगल क्या होता है ? क्या यह भी कोई अंग्रेजी मच्छर है क्या ? मैंने कहा – हां ! काका, अब कि बार सही पकड़े हो। पार्लियामेंट यानि संसद भवन होता है। जहां नेताजी बहुत लड़े है। जितनी झांसी की रानी 1857 के स्वाधीनता संग्राम में लड़ी थी। स्ट्रगल यानि संघर्ष। नेताजी ने हिन्दी के लिए इतना संघर्ष किया है कि एक बडा बंगला और दो बीएमडब्लू कारे बंगले के बाहर खडी कर दी है।

नेताजी ने आगे कहा – हम सभी को हिन्दी को ”इम्पोडेन्ट“ देना है। और अपने छोटे-छोटे बच्चों का ”एडमिशन“ हिन्दी ”मीडियम“ ”स्कूल“ मंे करवाना है। भाईयों और बहनों ! आप लोग करवायंेगे कि नहीं ? जनता के अंदर से शोर गूंजता है – हां ! करवायेंगे। तभी रामू काका ने फिर कोनी मारी और बोल पडे – इम्पोडेन्ट, एडमिशन, मीडियम और स्कूल का मतलब ? मैंने कहा – महत्व, दाखिला, माध्यम और पाठशाला होता है।

अंत में नेताजी ने मार्मिक स्वर में रोती शक्ल बनाते हुए कहा – भाईयों और बहनों ! हमसे प्रोमिस कीजिये ! दोनों हाथ ऊपर करके कीजिये ! हम सब हिन्दी का हर वक्त सम्मान करेंगे। हिन्दी के लिए मरेंगे और जीयेंगे। बोलिये मेरे साथ निज भाषा का मान हो, हिन्दी का सम्मान हो। जनता ने जोर से बोला। नेताजी ने हाथ हिलाते हुए विदा ली। लेकिन, रामू काका भीड में मुझे ढूंढ रहे थे, शायद ! प्रोमिस का मतलब जानना होगा। रामू काका मिले तो हमारा शक सही निकला। प्रोमिस का मतलब वादा होता है। वह वादा जो वादा ही रहता है।

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