गधे का भ्रम

हेमंत उपाध्याय

हेमंत उपाध्याय

एक धोबी की गधी थी। मालिक उससे दिन भर खूब काम लेता था । खूब थकने के बाद वो रात को दर्द के मारे खूब कराहती थी । उसकी दर्द भरी चीख के कारण मालिक की नींद मै खलल होता था । एक दिन उसने शाम को उसे बांधने के बजाय घुमने फिरने के लिए खुला छोड़ दिया। गधी घुमती फिरती अपना हमदर्द ढुंढने निकल पडी । घुमते -घुमते उसे एक गधे की कराहने की आवाज आई। उसने देखा गधे के सामने बहुत घास डली है पर वह खा नही रहा है। छलांग लगाकर बागड लांघकर वो गधे के पास बाडे मै पहुंच गई। गधे ने उसकी ओर देखे बिना ही उसे हरी घास आफर की । गधा टकटकी लगाकर मालिक के महल की तरफ देख रहा था और बीच- बीच मै दर्द से कराह रहा था। गधी ने घास खाते हुए उसे थेंक्यू कहा। गधी ने गधे से कहा- तुम क्यो कराह रहे हो ।उसने कहा- मेरा मालिक मुझसे बहुत काम लेता है । खूब मारता भी है । गधी ने कहा–आईलवयू और बोली मै तुम्हारी रस्सी काट देती हूं । अपन भगकर शादी कर लेंगे। साथ रहने से अपने परिवार मै वृद्धि भी होगी । अपने नन्हें मुन्ने बच्चे होंगे। पर गधे ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया।गधी ने इसका कारण पूछा तो गधे ने कहा –उस खिडकी की तरफ देखो।उसने देखा खिडकी मै एक सुंदर लडकी बैठी है।जो पुस्तक के बीच मै मोबाइल रखकर वाट्सएप पर चेटिंग कर रही है । पिछे से उसके पिता आकर उसे रोज की तरह धमकाते हुए कहते है “फिर तुने पढाई छ़ोडकर चेटिंग चालू कर दी ।” अगर फैल हुई ना तो मै तेरी शादी गधे से कर दूंगा। मेरा विश्वास है वो जरूर फैल होगी और मालिक मुझ से उसकी शादी कर मुझे दामाद बना लेगा और एकलोती पुत्री होने से मैं घर जवाई बन जाऊंगा। फिर आराम ही आराम होगा। गधी ने कहा — तू नहीं सुधरेगा गधे का गधा ही रहेगा और बाय, गुडनाईट कह कर गधी अपने मालिक के यहाँ चली गई । ऊधर रिजल्ट मै फैल होते ही बेटी ने पिता से अपने वादे के अनुसार अपनी मर्जी के गधे से शादी की जिद की । पिता ने उसकी पसंद के क्लास मै फैल होने वाले गधे लडके से उसकी शादीतय कर दी । चूंकि वे दोनो ही आपस मै चेटिंग करते थे और शादी करना चाहते थे। विजातीय होने से उसे पास होकर भी उस लडके से शादी की अनुमति नही मिल सकती थी । फैल होकर उनके मन की हो गई। लडकी ने पापा के अंजाने मै कहे वचनो को इंकेश कराते हुऐ जिद की थी कि पापा आप अपना वचन पूरा करो । सब इसे और मुझे ही गधा -गधी कह रहे हैं और कहते रहेंगे।मै भी इसी गधे को पाने के लिए जानबूझकर फैल हुई।गधी बनी । अगर आप मुझे रोज कहते कि तू अच्छे नम्बर से पास हुई तो मै तेरी शादी सबसे अच्छे नंबर लाने वाले से कर दूंगा चाहे वो परजात का क्यो न हो तो हम दोनो ही एक पेपर फैल होने के लिए जानबुझकर अधूरा नही छोडते और सबसे अच्छे नम्बर लाते। क्लास मै हम दोनो ही तो टापर थे। एक दूसरे को पाने के लिए हमारे पास कोई और चारा नहीं था सिवाय फैल होकर गधा- गधी बनने के । आखिर बेटी की शादी पिता के वचन के अनुसार फैल होने वाले गधे से ही तय हुई। पिता ने भी अपने अपशब्दों पर खूब पश्चाताप किया। ऊधर घर मै बंधा गधा बैड पर राजा की आयेगी बारात सुनकर उदास हो गया । पस्ताने लगा । उसका मालिक से विश्वास उठ चुका था।मालिक उससे शादी करेंगा यह उसका भ्रम मात्र था। वह सोचने लगा काश मै सजातीय घर आई गधी का आफर स्वीकार लेता तो मै भी शादी शुदा होता।मै तो गधे का गधा ही रहा।फिर उसने सोचा अपना मन माफिक साथी पाने के लिए लोग हमरे नाम का भी सहारा ले सकते हैं ।यह भी मेरे लिए गर्व की बात होनी चाहिए। इसी बीच एक नौकर ने आकर उस गधे को भी नहला कर नए कपडे पहना दिए । पाव मै घुंघरू बांध दिए । अब वो बारात के बेंड की धूनो पर ठुमके लगाने लगा और लोग उसका नृत्य देखकर उसे गूलाब जामुन खिलाने लगे । उसे भाई का दर्जा मिल गया यह सुन कर बाजे वाले पैरोडी बजाने लगे ।आज मेरी दीदी की शादी है ऐसे लगता सबकी दीदी की शादी है। शुगरवालो ने गुलाब जामुन का खूब सदुपयोग किया। बेटी की बिदाई के बाद मालिक उसे बेटे के समान ही प्यार से रखने लगा । वो ही तो उसका कमाऊ पूत ही था ।

हेमंत उपाध्याय । व्यंग्यकार व लघुकथाकार ।पं रामायण उपाध्याय वार्ड 9424949839 9425086246 7999749125 gangour knw.gmail.com

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