अपने आपको खुश रखने हेतु प्रभाशाली और उपयोगी मन्त्र भाग 2

डा. जे.के.गर्ग
डा. जे.के.गर्ग
हर व्यक्ति के भीतर हजारों सपने जन्म लेते हैं। इन्हें पलने-बढ़ने दें। कभी मरने दें। अपनी उपलब्धियों और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें। इससे असुरक्षा की भावना दूर होती है, जो आमतौर पर ईर्ष्या की जनक होती है। दुनियामें सात अरब से ज्यादा स्त्री-पुरुषों में कई हमसे से ज्यादा चतुर-प्रतिभाशाली, सुंदर, बुद्धिमान, धनी, भाग्यशाली हो सकते है| याद रखिये कि कोई भी प्राणी पुरी तरह से परफेक्ट नहीं होता है और हर व्यक्ति में कुछ गुण और कुछ अवगुण या दोष होते इसलिए कभी भी दूसरो से तुलना नहीं करें | अपने शरीर के हर अंगों को स्वस्थ रखें, जब कभी अस्वस्थ हो तो बीमारी का उपचार करवाने मे देरी नहीं करें |
पांव इतने पसारिये जितनी लम्बी दोड यानि जिन्दगी ऐसी बनायें जहाँ खर्च खुद की कमाई से कम हो | उधार लेने से परहेज करें, अत्याधिक जरुरी या मजबूरी हो तभी कोई चीज उधार लें | जितना जल्दी हो उतनी जल्दी अपना कर्ज चूका दें | शत्रुता को भी अतिशीघ्र खत्म करें यानि कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दें |गलतियाँ या भूलें सभी से होती है, अपनी ही खुशी के खातिर खुद की भुल को निसंकोच स्वीकार करें | हर आदमी अपनी खुशीयों के सपने संजोता है, किसी भी व्यक्ति के सपनो की कभी भी मजाक नहीं बनाये एवं उनके सपनों कभी भी मत हंसिये | दूसरों के काम में व्यर्थ में टोकाटाकी नहीं करें वहीं अपने काम से मतलब रखें और अपने कार्य को तन्मयता एवं एग्राता से पूरा करें| सच्चाई तो यही है कि समय सबसे ज्यादा कीमती या अमूल्य है, इसलिए अपने समय को फालतु कामो मेँ नष्ट नहीं करें | कभी भी किसी की बुराई नहीं करें और नहीं किसी की बुराई सुनें क्योंकि वास्तविकता में बुराई नाव मेँ छेद के समान है, छेद (बुराई) छोटा हो बड़ा वो नाव को तो डुबोता ही है |कहावत है कि दूसरों की थाली में घी ज्यादा दिखाई देता है इसीलिये जो आपके पास है उसी मेँ खुश रहना सीखिये |
संकलनकर्ता—-डा. जे.के. गर्ग
सन्दर्भ—-मेरी डायरी के पन्नें, संतो के आशीर्वचन

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