अपने आपको खुश रखने हेतु प्रभाशाली और उपयोगी मन्त्र भाग 3

डा. जे.के.गर्ग
डा. जे.के.गर्ग
याद रक्खें कि हर आदमी-औरत एक हुनर लेकर पैदा होते हैं, जरूरत है उस हुनर को दुनिया के सामने लाने की | किसी की उपेक्षा नहीं करें एवं ना ही किसी से कोई अपेक्षा रक्खें |अपने सहकर्मियों को भी आगे बड़ने का अवसर दें यानि आपके पीछे खडे हुए आदमी को भी कभी कभी आगे जाने का मौका दें | किसी से कुछ जानना हो तो उनसे विनम्रता पूर्वक विवेक के साथ दो बार पूछिये | बिना प्रयास या परिश्रम और कर्म के सफलता नहीं मिल सकती हैं | सफलता उन्हीं को मिलती है जो मेहनत करते है इसीलिए वर्क इज वरशिप में विश्वास करें | याद रखिये कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है किन्तु वास्तविकता के अन्दर हर काम बडा होता है इसलिए हर कामगार को सम्मान एवं प्यार दें | डिग्निटी ऑफ़ लेबर में विश्वास करें | जो बीत गया वो बीत गया उसे याद नहीं करें इसके उलट भूल जाओ और माफ़ करना प्रारम्भ करें |हर आदमी का अभिवादन मुस्कराहट के साथ करें, दूसरों को सम्मान दें | जैसा व्यवाहर हम दूसरों से आपके के साथ चाहतें हैं वैसा ही व्यवाहर उनके साथ करें |कोई भी काम करने से पहिलें देख लें कि आपके काम से किसी का नुकसान तो नहीं हो जायेगा और ऐसा हो सकता है तो उस काम को करने से बचें |कभी भी कर्कश वाणी नहीं बोलें वरन मीठी शहद जैसी वाणी बोलें | सच्चाई तो यही है कि सूर्य की तेज़ किरणें भी धरती के लिये लाभदायक होती है और उनमें धरती के लिए प्यार ही होता है उसी प्रकार अगर कोई आपको गलत तरीके से बोलता है तो वे उसका प्यार ही है। सुबह यथाशक्ति जल्दी उठें,परमपिता परमात्मा को मन ही मन में याद करके धन्यवाद दें एवं शांतचित रहें क्योंकि सुबह के वक्त हम जितना खुद पर काबू रख सकेंगे, उतना ही दिन आनंदित होगा। परमात्मा पर पुरा भरोसा रखें, अपने आपको परमात्मा को समर्पित कर दें |जिस किसी इष्टदेव में आपकी आस्था है उनकी प्रार्थना करना कभी मत भुलें, याद रखिये कि प्रार्थना मेँ अपार शक्ति होती है |

संकलनकर्ता—-डा. जे.के. गर्ग
सन्दर्भ—-मेरी डायरी के पन्नें, संतो के आशीर्वचन

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