भय

हेमंत उपाध्याय

हेमंत उपाध्याय

भृत्य ने बाबूजी से कहा– बधाई हो । आप हमेश टेबल पर सोते -सोते साहब बनने का ख्वाब देखते थे ना आप अधिकारी बन गए वो भी जिलाधीश महोदय के हस्ताक्षर से” पीठासीन अधिकारी ” । बाबूजी उठकर एक दम बैठते हुए बोले “मुझे नही बनना ऐसा अधिकारी ” और चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ । पास सोई हुई धर्मपत्नी उठ बैठी कहने लगी क्योंं काप रहे हो ? क्या बक रहे हो । अब कौन तुमको पीठासीन अधिकारी बना सकता है । तुम्हें तो सेवानिवृत्त हुऐ दो साल हो गए ये देखो फेयरवेल की फोटू । दो साल से सोये -सोये घर बैठे पेंशन ले रहे हो फिर भी चुनाव ड्यूटी का का डर नहीं गया ।

हेमंत उपाध्याय, व्यंग्यकार एवं लघुकथाकार। साहित्य कुटिर, गणगौर साधना। केंद्र, पं रामनारायण उपाध्याय वार्ड क्र 43 खंडवा म प्र । gangourknw@gmail.com 9425086246 9424949839 7999749125

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