दूध का कर्ज

हेमंत उपाध्याय
हेमंत उपाध्याय
पति ने चिंतित होकर पत्नी से कहा- बेटा हमेशा तुमसे कहता है -” माँ ? मै तेरे दूध का कर्ज उतार दूंगा ।” तुमने तो उसे साल भर ही दूध पिलाया वो भी बिना शकर का जबकि मैने तो पन्द्रह साल से सुबह शाम उसके शकर व मलाई युक्त दूध की बंदी लगा रखी है ,पर वो कभी नहीं कहता ,पापा मै तुम्हारे दूध का कर्ज उतार दूंगा। पति से इतना सुनते ही पत्नी तुरंत बोली – मैने अपने खून व पसीने से बना दूध पिलाय है , इस लिए मेरा दूध असरकारी है। तुम उसे सरकारी पैसे का दूध पिलाते हो, इस लिए वो दूध सरकारी जैसा ही है , वो असरकारी नहीं है ।

हेमंत उपाध्याय, व्यंग्यकार व लघु कथाकार साहित्य कुटीर पं . रामनारायण उपाध्याय वार्ड खंडवा म प्र

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