तीन तलाक और उसके परिणाम

sohanpal singh

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हमें तो ऐसा लगता है की तीन तलाक़ के मुद्दे पर बीजेपी फंस गई है ? एक ओर तो बीजेपी मुसल्मानो को गरियाती रहती है बीफ़ बैन आड़ में खाना और व्यापार दोनों को ही क्षतविक्षत करके केवल मुस्लिम बहनो पर प्यार उढ़ेलने का पवित्र कार्य तीन तलाक को क़ानून के अंतर्गत लाने के लिये लोकसभा से बिल भी पास करवा ही लिया है लेकिन राज्यसभा में अटक गया है बिल ! अब ईस अटक भटक में एक बात निश्चित है कि जिस प्रकार मुस्लिमो को गौ मांस खाने का निषेध किया है उससे जो समस्या पैदा हउई हऐ गऊ माता को सुरसक्षित रखने और बूढी और दूध न देने वाली गऊ माता को कोई भी अपने घर में नहीं रखना चाहता उन्हें एन जी ओ यानि स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से गऊ शालाओं में ही रखने के प्रबंध कर रही सरकार लेकिन जैसा होता आया है इन गौशालाओं की हालात किसी से भी छिपी नहीं है ? फिर भी सरकारी प्रयास तारीफ़ के काबिल ही है ?इस लिए हमें लगता है की मुस्लिम अपने धर्म के प्रति व्याप्त स्नेह और रूढ़िवाद के कारण कोई भी कानून बन जाए ये तीन तलाक़ के मुद्दे पर बाज नहीं आ सकते ? इस लिए जब तीन तलाक़ कह कर कोई भी मुस्लिम जब जेल जाएगा तो तो उसके बीबीबच्चों का गुजारा कौन करेगा क्या सरकार उनके लिए कोई गौशाला की भांति होम बनवाने जा रही है जहां तीन तलाक़ से पीड़ित ऐसी बहनो को सुरक्षित रखा जा सके, और दूसरी चीज यह की क्या हलाला का प्रकरण फिर से दोहराएं जाएंगे अगर सुबह तलाक़ देने वाला पति साम को अपनी पत्नी को स्वीकार कर ले तब ? इस लिए हमारा सुझाव तो ये है की सरकार प्रत्येक जिले में एक रिमांड होम बनवाये जहां तीन तलाक़ पीड़ित बहनो के रहने की उचित व्यवस्था हो ?

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