क्या राजे के परिवार से उम्मीदवार खड़ा हो रहा है

क्या विकास को मांडलगढ़ मे ही छोड़ा जायेगा…….
vasundhara 7मीडिया पर मांडलगढ़ उपचुनाव की जोरदार चर्चाएं हो रही है। उन चर्चाओं पर भारी मुख्यमंत्री की की यात्रा का प्रचार सोशल मीडिया पर जोर शोर से हो रहा है। कई व्यक्ति अपनी समस्या, समाज की समस्या और विकास को लेकर ज्ञापन, आवेदन तैयार कर रहे हैं। सब अपनी-अपनी योजनाएं सीएम के सामने, इस उम्मीद से रखना चाहते हैं कि क्षेत्र का विकास हो ही जाएगा।यह यात्रा सरकारी खर्चे पर पूर्णत चुनावी यात्रा है। आजकल मंत्रियों के दौरे भी क्षेत्र में बहुत हो रहे हैं। यह सारा जमावड़ा क्षेत्र में उपचुनाव को लेकर चल रही उठा-पटक है।जनता सोच रही है कि सीएम के आने से बहुत विकास हो रहे हैं, और हो जायेगा।जब की जमीनी धरातल पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, मुख्यमंत्री के वायु मार्ग से आने की वजह से सड़कों में कुछ सुधार होता वह भी नहीं हुआ, क्षेत्र के आसपास के मार्गो को जरूर सुधारा गया।मांडलगढ़ के गौरव पथ का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ था, वह राजे के आने से जल्दी-जल्दी बिना क्वालिटी देखें पूरा किया जा रहा है, हां क्षेत्र में साफ-सफाई जरूर हो रही है एवं अधिकारियों की भागादौड़ी देखने को मिल रही है।महारानी की यात्रा के कार्यक्रम से स्पष्ट है कि उपचुनाव की स्थिति का अवलोकन, जिस तरह से ऊर्जा मंत्री को एवं अन्य प्रतिनिधियों को समय-समय पर भेज कर फीडबैक लिया गया, चुनाव के उम्मीदवार की घोषणा, तारीख की घोषणा, अधिकारियों के स्थानांतरण यहां पहले भी राजपूत अधिकारियों का वर्चस्व था और अभी भी लगाए गए अधिकारी राजपूत हैं, इन सब तैयारियों के बाद बिना उम्मीदवार की घोषणा के पहले राजे का यह दौरा कई आशंकाएं उत्पन्न करता है।आशंका है कि, राजे अपने परिवार से भी उम्मीदवार बना सकती है।अब रही घोषणा एवं विकास की बात तो आज दिन तक कभी चुनावी घोषणाएं पूरी हुई है। यह केवल लॉलीपॉप का काम करती है। अभी कुछ दिन पूर्व ऊर्जा मंत्री ने जनसुनवाई के वक्त किसानों को 6 घंटे बिजली बिना ट्रिप किए, वह भी दिन में देने की घोषणा की थी, उल्टा उसी दिन से राज्य मे कटौती चालू हो गई।राजे के कार्यक्रम में अलग-अलग जातियों के समूह से मिलना एवं बीजेपी के संगठनों एवं कार्यकर्ताओं से मिलना मुख्य एजेंडा हैं। इससे स्पष्ट है की या तो राजे अपने परिवार से किसी को उम्मीदवार बनाना चाहती है या चुनाव हारने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है, क्योंकि इन उप चुनाव का असर राज्य के मुख्य चुनाव पर रहेगा।वैसे आजकल जातिवाद के समीकरणों के बिना चुनाव लड़ना संभव नहीं है।सभी राजनीतिक पार्टियां जातिवाद का सहारा लेते दिख रही है।क्षेत्र में एक समय ऐसा भी था जब अधिकारी, जनप्रतिनिधि, 80 परसेंट तक राजपूत थे। खैर चुनावी चर्चा कर रहे थे और इस चर्चा का परिणाम यह हैं की-सरकार हर कीमत पर यह चुनाव बीजेपी को जीताना चाहती हैं।दूसरा हो सकता है राजे अपने परिवार से किसी को उम्मीदवार बनाए यह भी दबी जुबान से चर्चा है। यहां सरकार शब्द मैंने क्यों इस्तेमाल किया इसकी वजह आप सब जानते ही हैं… चुनाव का खर्चा अभी तक कौन कर रहा है…….. यह एक विचार है एवं जन चर्चा है…..कोंग्रेस का तो शायद चुनाव लड़ने का मानस ही लग रहा …उमीदवार तय होने के बाद लग सकता है….. समय का इन्तजार करे ….

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