लोक सेवा प्रबंधन राज्य मंत्री ने लोक सेवा गारंटी केंद्र का लिया जायजा

छतरपुर/प्रदेश के लोक सेवा प्रबंधन विभाग एवं कृषि राज्य मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को छतरपुर आकर तहसील परिसर स्थित विकासखण्डस्तरीय लोक सेवा गारंटी केंद्र का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिये। उन्होंने जिला प्रबंधक लोक सेवा प्रबंधन विभाग श्री पी एन गंगेले को जिले में ग्राम सभाओं एवं कार्यशालाओं के माध्यम से जनता को अधिनियम की जानकारी देने के निर्देश दिये।
राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित् करें। उन्होंने इस कार्य में जनप्रतिनिधियों व जिले के जागरूक एवं गणमान्य लोगों का भी सहयोग लेने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि छतरपुर जिले में अभी एक ही लोक सेवा केंद्र प्रारंभ हुआ है। शेष विकासखण्डों में भी लोकसेवा केंद्र खोलने की कार्यवाही सुनिश्चित् की जाये। उन्होंने छतरपुर तहसील प्रांगण में स्थित लोक सेवा केंद्र के संचालक एवं कर्मचारियों से उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि लोक सेवा केंद्र में प्राप्त होने वाले आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित् होना चाहिये। उन्होंने आवेदकों को उनके आवेदन की पावती अवश्य प्रदान करने के निर्देश दिए। प्राप्त हुये सभी आवेदनों को उन्होंने कम्प्यूटर में अवश्य फीड करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्रीमती ललिता यादव, भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ. घासीराम पटेल, अपर कलेक्टर श्री जे के श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि श्री इंद्रजीत सिंह बघेल, तहसीलदार श्री विनोद सोनकिया सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

जगन्नाथपुरी की तीर्थ यात्रा हेतु 214 यात्री रवाना
छतरपुर/मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत जगन्नाथपुरी तीर्थ स्थल के लिये शनिवार को जिले के 214 यात्री रवाना हुये। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि तथा लोकसेवा प्रबंधन विभाग राज्य मंत्री श्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने नगरपालिका परिषद् के सामने से तीर्थ यात्रियों से भरी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने सभी तीर्थ यात्रियों को शुभकामनायें देकर उनकी यात्रा मंगलमय होने की कामना की। राज्य मंत्री द्वारा हरी झंडी दिखाये जाने के अवसर पर विधायक श्रीमती ललिता यादव, भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ. घासीराम पटेल, नपाध्यक्ष श्रीमती अर्चना सिंह, अपर कलेक्टर श्री जे के श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि श्री इंद्रजीत सिंह बघेल, डिप्टी कलेक्टर श्री चिरोंजी लाल चनाप, तहसीलदार श्री विनोद सोनकिया सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या मे आमजन उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि जगन्नाथपुरी तीर्थ स्थल के लिये तीर्थ यात्री सागर से रेलगाड़ी द्वारा शासकीय खर्चे पर पहुंचेंगे। सागर तक तीर्थ यात्रियों को पहुंचाने के लिये प्रशासन द्वारा 4 बसों की व्यवस्था की गई्र थी। उक्त तीर्थ यात्रियों के साथ व्यवस्था हेतु प्रशासन द्वारा 3 अनुरक्षक भी भेजे गये हैं। तीर्थ यात्री 1 नवंबर को वापस लौटेंगे। 4 नवंबर को शिर्डी जाने के लिये तीर्थ यात्रियों का जत्था रवाना होगा।

वर्तमान में होश संभालियें, भविष्य आनंदमय हो जायेगा: मैथिलीशण भाईजी
छतरपुर। श्री राम की कथा को त्रेता युग से जोडऩे की जगह अपने जीवन से जोडऩे का प्रयास कीजिये तो जीवन धन्य हो जायेगा अन्था यह कथा कभी पूरी नहीं होगी। भूत और भविष्य काल को वर्तमान काल के ही दो कल्पित नाम है भगवान का भक्त तो हमेशा वर्तमान में ही रहता है। जो वर्तमान में अपना होश सम्भाले रहता है। उसका भविष्य आनंदमय रहता है। यह उपदेश युग तुलसी श्री राम किंकर जी के कृपा पात्र शिष्य भाई मैथिलीशरण जी ने कल्याण मड्पम में श्रीराम किंकर प्रवचन माला के पहले दिन दिया। भाई जी ने श्रीराम नाम की महिमा पर प्रवचन करते हुये श्रोताओं से आग्रह किया कि भगवान की साधना से वर्तमान को आनंदमय कीजिये।
बुन्देलखण्ड परिवार द्वारा कल्याण मण्ड्पम में आयोजित श्रीराम कथा के प्रारम्भ में वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेन्द्र शर्मा सिरीष ने छतरपुर में श्रीराम किंकर जी की कथा यात्रा का वर्णन करते हुये राम रसिक श्रोताओं को यह सुअवसर उपलब्ध कराने के लिये साकेतवासी श्री नारायणदास अग्रवाल बड़े भैया का स्मरण करते हुये उनके अनुज श्री जयनारायण अग्रवाल जय भैया द्वारा कथा की निरंतरता बनाये रखने के लिये साधुवाद दिया। उन्होंने इस अवसर पर बुन्देलखण्ड केशरी महाराजा छत्रसाल द्वारा रचित राम नाम महिमा के दो छंदों का भी वाचन किया। बुन्देलखण्ड परिवार के श्री पंकज अग्रवाल के बेटे श्री प्रशांत अग्रवाल ने कथा रसिक श्रोताओं का स्वागत किया। भाई श्री मैथलीशरण जी ने कहा की राम नाम में तीन अक्षर रकार, अकार और मकार है। भगवान श्रीराम के स्वभाव में भी यही तीन विशेषतायें है। रकार अग्रि का, अकार सूर्य का और मकार चन्द्रमा का प्रतीक है। अग्रि ज्वाला , सूर्य प्रकाशऔर चन्द्रमा शीतलता प्रदान करती है। भगवान के स्वभाव में भी यह विशेषतायें समय समय पर देखने मिलती है। जनकपुर में सीता स्वयंवर के समय मुनि परसुराम जी से युद्ध करने की जगह वह अपने स्वभाव की शीतलता से उन्हें निरु तर कर देते है। यदि परन्तु रावण से युद्ध के समय भगवान ने अपने स्वभाव की ज्वाला का प्रदर्शन किया। भाई जी ने कहा जीवन में एक जैसी मन: स्थिति नहीं रहती है, परन्तु सुख दु:ख और शांत तीनो ही स्थितियों में भगवान राम का स्मरण करते रहना चाहिये। जब मन सुखी हो तो राम राम जपियें और जब मन दु:खी हो तो राम राम रटियें और जब मन शांत स्थिति में हो तो राम नाम में रम जाइये। अशोक वाटिका में माता सीता सदैव भगवान का नाम ही तो रटती रहती है। ”सोयी छवि सीता राखि उर रटति रहति हरि नाम भाई मैथिलीशरण जी ने श्रीराम नाम की महिमा का बखान करते हुये कहा की कागभुसुण्डि की तरह हर स्थिति में अपने ऊपर भगवान की कृपा देखते रहिये व्यक्ति को अपने जीवन की हर घटना की सुसमीक्षा करते रहना चाहिए। रामचरित मानस में देखने में आता है, कि जिन जिन व्यक्तियों को किसी वजह से श्राप मिला वह भगवान की कृपा से वरदान में बदल गया। जबकि ब्रह्मा और शंकर से वरदान पाने वाला रावण का भगवान से विमुख होने के कारण पराभव को प्राप्त हुआ महर्षि लोमस द्वारा कागभुसुण्डि जी को कौआ बन जाने का श्राप दिया गया कागभुसुण्डि जी ने उसे सहजता से स्वीकार कर इसे अपने जीवन में वरदान के रूप में ही स्वीकार किया। क्रोध अज्ञानता का ही परिचय देता है। भाई जी ने कहा की कुछ लोग जीवन में वरदान को श्राप में बदल लेते है। तो कुछ श्राप को ही जीवन में वरदान के रूप में बदल लेते है। यह इस बात का स्पष्ट संदेश है। कि जीवन में आपको क्या मिला यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। जितना की महत्वपूर्ण यह है कि आपको जो मिला है उसका उपयोग आप किस तरह करते है। बानर नल और नील द्वारा बचपन में पार्थिव शिवलिंग को पानी में फे क देने की आदत से नाराज अगस्त्य ऋषि ने उन्हें श्राप दिया था कि उनके फेंके पत्थर पानी में नहीं डूबें। नल और नील को मिला यह श्राप उस समय वरदान में बदल गया जब भगवान श्रीराम ने लंका पहुँचने के लिये सेतु बंध की रचना की। भाई जी ने कहा कि भगवान से यदि वर मागना ही है तो सद्बुद्धि मागियें। आप को कितने ही वरदान प्राप्त हो जाये यदि सद्बुद्धि नहीं है। तो आप उनका उपयोग नहीं कर सकेंगे। उन्होने कहा कि इस संसार सागर में अमृत और विष दोनो ही हैं। और हमारा जीवन समुद्र मंथन की तरह ही तो है। परन्तु अमृत तो सब पीना चाहते है। परन्तु जहर पीने वाला सिर्फ शंकर ही हो सकता है। वृक्ष सिर्फ इसीलिये विशाल काय होते है। क्योंकि वे अनुकूलता और प्रतिकूलता दोनो को ही सहजता से स्वीकार कर लेते है। संसार में जितने भी संत और भक्त हुये है। उन सभी ने विष पिया है। जब विष में राम को मिला दिया जाता है। तो वह विश्राम हो जाता है। पर याद रखियें यदि विश्राम से राम को हटा दिया जाय तो विष ही शेष रहेगा।
भाई जी ने राम नाम महिमा की रस मयी व्याख्या करते हुये कहा की जब राम नाम हृदय में होता है तो वह निर्गुण निराकार है। और जब वही राम नाम नेत्रों में होता है। तो वह सगुन साकार है। जीवन में रामनाम रूपी मणि को मध्य में रखिये तो यह देहरी पर रखे दीपक की भांति अंदर और बाहर उजाला करता रहेगा। राम नाम की मणि को न तो तेल की जरूरत है न बाती की और न ही दीपक की। राम नाम की मणि तो स्वयं प्रकाशमय होती है। और सच्चा संत रामनाम की मणि ही रखता है। उसे हीरे मोतियों की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यदि किसी संत को भक्ति करने के लिये वाह्य उपादानों की (सांसारिक संसाधनों की) जरूरत पड़े तो समझ लिये वह साधुता के समीप ही नहीं पहुंचा है। पूरा संसार तो वाह्य उपादानों के पीछे पड़ा ही है। और यदि संत भी उसी के पीछे पड़ जाये तो फिर वह कैसे संत कहला सकते हैं। ऐसे संत अपने अनुयायियों का भविष्य भी अंधकार मय करते हैं।

Print Friendly

One thought on “लोक सेवा प्रबंधन राज्य मंत्री ने लोक सेवा गारंटी केंद्र का लिया जायजा

Choose your typing language Ajmer Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>