विधि विशेषज्ञ, अथक परिश्रम के धनी थे बाबा साहेब

मै ऐसे धर्म को मानता हूॅ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है

IMGबीकानेर बुधवार, 06 दिसम्बर 2017, आज जिला देहात कांग्रेस कार्यालय, बीकानेर में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के तेल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर पुण्यतिथि मनाई। जिसमें बाबा साहेब की जीवनी पर प्रकाश डालते हुवे उनके विचारो को अपने जीवन में उतारने के बारे में चर्चा की गई।
प्रदेश संगठक मार्शल प्रहलाद सिंह ने कहा छुआ-छुत का प्रभाव जब सारे देश में फेला हुआ था, उसी दौरान 14 अप्रेल 1891 को बाबा साहेब का जन्म हुआ था, बचपन से ही बाबा साहेब ने छुआ-छुत की पीड़ा महसूस की और जाति के कारण उन्है संस्कृत भाषा पढने से भी वचिंत रहना पड़ा। कहते हैं जहां चाह हैं, वहां राह हैं, मानवतावादी बड़ौदा के महाराज सयाजी गायकवाड़ ने बाबा साहेब को उच्च शिक्षा हेतु 3 साल तक छात्रवृति प्रदान की और महाराजा के आशीर्वाद से बाबा साहेब ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम.ए. तथा बाद में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त की उनके शोध का विषय ’’भारत का राष्ट्रीय लाभ था’’ इस शोध के कारण उनकी बहुत प्रशंसा हुई। बम्बई में सिडेनहम कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफसर नियुक्त हुए, किन्तु कुछ संकिर्ण विचारधारा वालों के कारण वहां भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद आत्मबल के धनी भीमराव आगे बढते रहे, और अपने गुणो के कारण ही सविंधान रचना में सविंधान सभा द्वारा 29 अगस्त 1947 को गठित प्रारुप समिति, जो कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण समिति थी, उसके अध्यक्ष पद के लिए बाबा साहेब को चुना गया, और प्रारुप समिति के अध्यक्ष के रुप में बाबा साहेब ने महत्वपुर्ण भुमिका का निर्वाह किया, और इसी प्रकार अनेक कष्टो को सहन करते हुवे अपने कठिन संघर्ष और कठोर परिश्रम से उन्होने प्रगति की उंचाईयों को स्पर्श किया और राष्ट्रहित में कार्य करते-करते बाबा साहेब बीमारी के कारण 6 दिसम्बर 1956 को इह लोक को त्यागकर परलोक सिधार गयें।
प्रदेश महासचिव सुषमा बारूपाल ने कहा कि एक महान व्यक्ति प्रतिष्ठित व्यक्ति से अलग है, क्योकि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है।
पेंशनर्स सम्भाग अध्यक्ष अम्बाराम इणखिया ने कहा कि विश्वरत्न बाबा साहेब के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए 20वंी शताब्दी के श्रेष्ठ चिन्तक, ओजस्वी लेखक, तथा यशस्वी वक्ता एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय सविंधान के निर्माता थे।
ब्लॉक अध्यक्ष पुखराज गोदारा ने कहा कि बाबा साहेब ने 10 अक्टूबर 1946 ‘‘को शुद्र कोन थे‘‘जयोतीबा फुले को समर्पित की और उन्हे आध्ुानिक भारत का सबसे महान शुद्र बताया। तथा बाबा साहेब ने कहा कि जो धर्म अपवित्र पशुओ के स्पर्श की लेकिन मनुष्य के स्पर्श पर रोक लगाता है,वो धर्म नही बल्कि मुर्खता है।
पीसीसी सदस्य किशनलाल इणखिया ने कहा कि बाबा साहब ने कहा था मैं एक समुदय की प्रगति का माप महिलाओं द्वारा हासिल प्रगति की डिग्री से करता हूॅ।
ब्लॉक कोर्डिनेटर श्याम बीठनोक ने बताया कि आईटीसेल चित्रेश गहलोत, देहात विधि प्रकोष्ठ अध्यक्ष एड. ओमप्रकाश जाखड, सेवादल महिला अध्यक्ष प्रेमलता राठौड, ब्लॉक अध्यक्ष राधा भार्गव, कांग्रेस नेता श्यामवीरसिंह राधव, जगदीश पुरोहित, श्रीराम पवांर, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री राजभटनागर, चम्पालाल बारूपाल, सहीराम जान्दू, महेश कुमार, गौरीशकंर, सहाबूदीन, सहित कार्यकर्ता मोजूद रहे।

( मार्शल प्रहलादसिंह)
प्रदेश संगठक

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