वसूली आदेश पर रोक

(राजस्थान उच्च न्यायालय का मामला)

Rajasthan High Court Jaipur Bench 450जयपुर, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री वीरेन्द्र सिंह सराधना ने राजस्थान पथ परिवहन निगम में कन्डक्टर के पद पर कार्यरत कर्मचारी श्याम लाल शर्मा की वेतन से वसूली आदेश पर रोक लगा दी। उल्लेखनीय है कि श्याम लाल शर्मा राजस्थान पथ परिवहन निगम में दिनांक 4-11-1985 को नियुक्त हुआ तथा दिनांक 26-11-2016 को उसके बेग से टिकटों की बुक गायब हो गई। जिसके विरूद्ध प्रार्थी ने पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई। राजस्थान पथ परिवहन निगम द्वारा कारण बताओ नोटिस देकर जांच कर प्रार्थी पर 2,44,060/- रूपये की वसूली के आदेश जारी कर दिये। जिससे पीड़ित होकर प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता डी पी शर्मा के माध्यम से रिट याचिका माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। प्रार्थी के अधिवक्ता का तर्क था कि प्रार्थी ने निगम को कोई हानि नहीं पहुंचाई। क्योंकि निगम की तरफ से प्रार्थी पर यह आरोप नहीं है कि उसने टिकट बुक का दुरूपयोग किया हो। निगम को मात्र टिकट बुक की छपाई के खर्चे का नुकसान हुआ है जो कि मात्र 56 पृष्ठ की है। ऐसे में प्रार्थी से 2,44,060/- रूपये के वसूली आदेश पूर्णतया मनमाना है। मामले की सुनवाई के पश्चात् माननीय न्यायालय ने उक्त आदेश जारी किया।

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गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण, जयपुर के पीठासीन अधिकारी श्री रामसिंह मीना ने प्रार्थीया श्रीमती सुशीला रतनपाल का आवेदन स्वीकार कर अप्रार्थी संस्था प्रबन्ध समिति, कमला नेहरू माध्यमिक विद्यालय, हटुण्डी, अजमेर एवं प्रबन्ध समिति, राजस्थान विद्यापीठ कुल, उदयपुर को निर्देश दिये है कि वे प्रार्थी को राज्य कर्मचारियों के समान राजस्थान सिविल सर्विसेज रिवाईज पे स्केल रूल्स, 1998 के अनुसार 8 वर्ष की सेवायें पूर्ण करने पर वरिष्ठ वेतन श्रृंखला का लाभ देकर प्रार्थी का वेतन स्थिरीकरण करने के उपरान्त बकाया वेतन की अन्तर राशि का भुगतान करे तथा उक्त वेतन स्थिरीकरण के उपरान्त नियमानुसार देय अंतिम वेतन के आधार पर उपदान की राशि एवं सेवानिवृत्ति की दिनांक 31.12.1999 को बकाया उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि का भुगतान बकाया होने की दिनांक से भुगतान किये जाने की दिनांक तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करे एवं प्रार्थी की तथा प्रार्थी की यदि कोई पी.एफ. की राशि बकाया हो तो उक्त समस्त राशि ब्याज सहित प्रावधायी निधि से दिलवाये जाने हेतु प्रार्थी का सहयोग करे। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी श्रीमती सुशीला रतनपाल की नियुक्ति अप्रार्थी संस्था में तृतीय श्रैणी अध्यापक के पद पर दिनांक 02.08.1974 को नियमानुसार चयन प्रक्रिया अपनाये जाने के पश्चात् हुई तब से प्रार्थी ने सेवानिवृत्ति की दिनांक 31.12.1999 तक अप्रार्थी सं0 01 संस्था में सेवा कार्य किया परन्तु अप्रार्थी संस्था द्वारा प्रार्थी को राजस्थान सिविल सर्विसेज रिवाईज पे स्केल रूल्स, 1998 के अनुसार 8 वर्ष की सेवायें पूर्ण करने पर वरिष्ठ वेतन श्रृंखला का लाभ एवं उक्त वेतन स्थिरीकरण के पश्चात् नियमानुसार देय उपदान की राशि एवं सेवानिवृत्ति के समय बकाया उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि एवं अप्रार्थी संस्था में जमा पी.एफ. राशि का भुगतान प्रार्थी को नहीं किया गया। तत्पश्चात् प्रार्थी ने उपरोक्त राशि प्रदान करने हेतु अप्रार्थी संस्था से कई बार निवेदन किया गया परन्तु अप्रार्थी संस्था ने प्रार्थी के निवेदन पर कोई ध्यान नहीं दिया। इससे पीड़ित होकर प्रार्थीया ने अपने अधिवक्ता डी.पी. शर्मा के माध्यम से अधिकरण के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर उक्त लाभ दिलाने का निवेदन किया। प्रार्थीगण के अधिवक्ता का तर्क था कि अप्रार्थी संस्था राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के अन्तर्गत पंजीकृत होते हुए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है तथा 90 प्रतिशत से अधिक अनुदान की राशि भी राजस्थान सरकार से प्राप्त करती रही थी इसलिये उस पर राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 और नियम, 1993 के प्रावधान लागू होते है फिर भी अप्रार्थी संस्था ने सेवानिवृत्ति के समय प्रार्थी को राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था नियम 1993 के नियम 82 के अनुसार उपदान की राशि तथा खाते में जमा उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि नियम, 1993 के नियम 51 के अनुसार नहीं दी गई। इसके अलावा प्रार्थी राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 की धारा 29 व राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था नियम, 1993 के नियम 34 के अनुसार राज्य अप्रार्थी संस्था के अनुदानित होने के कारण राज्य कर्मचारियों के समान उक्त लाभ अप्रार्थी संस्था से प्राप्त करने के अधिकारी थी। मामले की सुनवाई के पश्चात् अधिकरण ने उक्त लाभ नियमानुसार ब्याज सहित प्रार्थी को अदा करने के आदेश अप्रार्थी संस्था को दिये।

डी.पी. शर्मा
एडवोकेट
मो.नं. 9414284018

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