रामक्रष्ण परमहंस और उनके मुस्लिम अनुयायी के बीच मार्मिक संवाद पार्ट 2

डा. जे.के.गर्ग

डा. जे.के.गर्ग

“स्वामी जी फैज अलि की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, ” हिन्दु कहते हैं कि मंदिर में जाने से पहले या पूजा करने से पहले स्नान करो। मुसलमान नमाज पढने से पहले वाजु करते हैं। क्या अल्लहा ने कहा है कि नहाओ मत, केवल लोटे भर पानी से हांथ-मुँह धो लो?
“फैज अलि बोला, क्या पता कहा ही होगा | स्वामी जी ने आगे कहा, नहीं, अल्लहा ने नही कहा! अरब देश में इतना पानी कहाँ है कि वहाँ पाँच समय नहाया जाए। जहाँ पीने के लिए पानी बङी मुश्किल से मिलता हो वहाँ कोई पाँच समय कैसे नहा सकता है।
यह तो भारत में ही संभव है, जहाँ नदियां बहती हैं, झरने बहते हैं, कुएँ जल देते हैं। तिब्बत में यदि पानी हो तो वहाँ पाँच बार व्यक्ति यदि नहाता है तो ठंड के कारण ही मर जायेगा। यह सब प्रकृति ने सबको समझाने के लिये किया है।
“स्वामी विवेका नंद जी ने आगे समझाते हुए कहा कि,” मनुष्य की मृत्यु होती है। उसके शव का अंतिम संस्कार करना होता है।
अरब देशों में वृक्ष नही होते थे, केवल रेत थी। अतः वहाँ मृतिका समाधी का प्रचलन हुआ, जिसे आप दफनाना कहते हैं। भारत में वृक्ष बहुत बङी संख्या में थे, लकडी.पर्याप्त उपलब्ध थी अतः भारत में अग्नि संस्कार का प्रचलन हुआ। जिस देश में जो सुविधा थी वहाँ उसी का प्रचलन बढा। वहाँ जो मजहब पनपा उसने उसे अपने दर्शन से जोङ लिया।
“फैज अलि विस्मित होते हुए बोला! “स्वामी जी इसका मतलब है कि हमें शव का अंतिम संस्कार प्रदेश और देश के अनुसार करना चाहिये।
मजहब के अनुसार नही। “स्वामी जी बोले , “हाँ ! यही उचित है। ” किन्तु अब लोगों ने उसके साथ धर्म को जोङ दिया।
मुसलमान ये मानता है कि उसका ये शरीर कयामत के दिन उठेगा इसलिए वह शरीर को जलाकर समाप्त नही करना चाहता।
हिन्दु मानता है कि उसकी आत्मा फिर से नया शरीर धारण करेगी इसलिए उसे मृत शरीर से एक क्षंण भी मोह नही होता।
“फैज अलि ने पूछा कि, “एक मुसलमान के शव को जलाया जाए और एक हिन्दु के शव को दफनाया जाए तो क्या प्रभु नाराज नही होंगे?
“स्वामी जी ने कहा,” प्रकृति के नियम ही प्रभु का आदेश हैं। वैसे प्रभु कभी रुष्ट नही होते वे प्रेमसागर हैं, करुणा सागर है।

मुशी जी ने पूछा, “इतने मजहब क्यों” ? स्वामी जी ने कहा, ” मजहब तो मनुष्य ने बनाए हैं, प्रभु ने तो केवल धर्म बनाया है।
“मुशी जी ने कहा कि, ” ऐसा क्यों है कि एक मजहब में कहा गया है कि गाय और सुअर खाओ और दूसरे में कहा गया है कि गाय मत खाओ, सुअर खाओ एवं तीसरे में कहा गया कि गाय खाओ सुअर न खाओ; इतना ही नही कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि मना करने पर जो इसे खाये उसे अपना दुश्मन समझो।” स्वामी जी जोर से हँसते हुए मुंशी जी से पूछे कि ,”क्या ये सब प्रभु ने कहा है ?”
मुंशी जी बोले नही,”मजहबी लोग यही कहते हैं।” स्वामी जी बोले, “मित्र! किसी भी देश या प्रदेश का भोजन वहाँ की जलवायु की देन है।
सागरतट पर बसने वाला व्यक्ति वहाँ खेती नही कर सकता, वह सागर से पकङ कर मछलियां ही खायेगा। उपजाऊ भूमि के प्रदेश में खेती हो सकती है। वहाँ अन्न फल एवं शाक-भाजी उगाई जा सकती है। उन्हे अपनी खेती के लिए गाय और बैल बहुत उपयोगी लगे। उन्होने
गाय को अपनी माता माना, धरती को अपनी माता माना और नदी को माता माना । क्योंकि ये सब उनका पालन पोषण माता के समान ही करती हैं।” “अब जहाँ मरुभूमि है वहाँ खेती कैसे होगी? खेती नही होगी तो वे गाय और बैल का क्या करेंगे? अन्न है नही तो खाद्य के रूप में पशु को ही खायेंगे। तिब्बत में कोई शाकाहारी कैसे हो सकता है? वही स्थिति अरब देशों में है। जापान में भी इतनी भूमि नही है कि कृषि पर निर्भर रह सकें।

संकलनकर्ता—–डा.जे.के.गर्ग
सन्दर्भ——— व्हाट्सएप
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विशेष.

About Jugal Kishor

Date of Birth----17th May, 1943, Academic Qualification---M.sc (chemistry, Ph.D (Chemistry) Research Publication----20 Research Papers in various International and National Journals Presented many research papers in various National and Inter National conferences. Teaching Experience------- Degree classes----------------33 years P. G. Classes------------------31 years Worked as Lecturer in Chemistry, Selection Grade Lecturer, Head Of Department of Chemistry at GOVT COLLEGE Ajmer from 1969 to 1998. Work Vice Principal At Govt College, Ajmer Work as Principal Govt Girls College, Ajmer and Govt College Kekari. Retired as Joint Director of College Education, Rajasthan, Jaipur, Worked as subject expert for selection of Lecturers in various colleges. Address----2-Ga-16, Vaishali Nagar Ajmer--305006 Phone---0145-2641020 Mobile---9413879635
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