‘उमेश- कार्तिक ‘ अब कैसे जाएं कलकत्ता …!!

-तारकेश कुमार ओझा- किसी भी महानगर से उपनगरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में मैले – कुचैले कपड़ों में भारी माल – आसबाब के साथ पसीने से तर – बतर दैनिक यात्री आपको सहज ही नजर आ जाएंगे। मेरे शहर से प्रतिदिन सैकड़ों लोग कोलकाता के लिए  116 किमी की एकतरफा दूरी तय कर अपने व … Read more

बबूल के पेड़ पर आम……..!!

-तारकेश कुमार ओझा- फिल्मों की दीवानगी के दौर में  कई साल पहले  एक बार प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर  मेरे जिला मुख्यालय में कार्यक्रम देने आई, तो मेरे शहर के काफी लोग भी बाकायदा टिकट लेकर वहां कार्यक्रम देखने  गए। लेकिन उनसे एक गड़बड़ हो गई। तब नामचीन कलाकारों के लिए किसी कार्यक्रम में तीन से चार … Read more

अनहोनी को होनी कर दे…..!!

-तारकेश कुमार ओझा- तब मेहमानों के स्वागत में शरबत ही पेश किया जाता था। किसी के दरवाजे पहुंचने पर पानी के साथ चीनी या गुड़ मिल जाए तो यही बहुत माना जाता था। बहुत हुआ तो घर वालों से मेहमान के लिए रस यानी शरबत बना कर लाने का आदेश होता। खास मेहमानों के लिए नींबूयुक्त … Read more

क्योंकि हम हैं अंधेरा उलीचने के आदी …!!

-तारकेश कुमार ओझा- कहते हैं अंधेरे का कोई अस्तित्व नहीं होता, बल्कि उजाले की कमी ही अंधेरे को जन्म देता है। इसी तरह नाव के पानी को उलीचने से ज्यादा जरूरी उसके छेद को बंद करना होता है। लेकिन लगता है हमारे देश व समाज का एक बड़ा हिस्सा अंधेरे को उलीचने की कवायद में … Read more

कैसे सुधरे बनारस …!!

-तारकेश कुमार ओझा- भारी भीड़ को चीरती हुई ट्रेन वाराणसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पहुंच चुकी थी। मैं जिस डिब्बे में सवार था, कहने को तो वह आरक्षित था। लेकिन यर्थार्थ में वह जनरल डिब्बे जैसा ही था। चारों तरफ भीड़ ही भीड़। कोई कहता भाई साहब आरएसी है। कोई वेटिंग लिस्ट बताता। किसी की … Read more

उफ…! एक बुजुर्ग राजनेता की ऐसी दुर्दशा …!!

-तारकेश कुमार ओझा- अब काफी बुजुर्ग हो चुके वयोवृद्ध राजनेता नारायण दत्त तिवारी को मैं तब से जानता हूं, जब 80 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी की हत्या के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी प्रचंड बहुमत के साथ देश के प्रधानमंत्री बने थे। बेशक उनकी सरकार में नंबर दो की हैसियत मध्य प्रदेश के … Read more

क्या मोदी के मामले में संभव नहीं है मध्यमार्ग …!!

-तारकेश कुमार ओझा- मुद्दा नहीं मोदी आधारित चुनाव। 2014 के लोकसभा चुनाव का मेरे ख्याल से यही लब्बोलुआब रहा। इस चुनाव के दौरान महंगाई व बेरोजगारी समेत जनता से जुड़े तमाम मुद्दे नेपथ्य में चले गए। जबकि मोदी का समर्थन या विरोध ही पूरे राजनैतिक परिदृश्य पर छाया रहा। एक नजरिए से देखा जाए, तो यह … Read more

पेंटिंग पर ‘ महाभारत ‘ …!!

-तारकेश कुमार ओझा- आदमी गरीब हो अमीर…। उसके कुछ न कुछ शौक जरूर होते हैं। यह और बात है कि साधारणतः गरीब का शौक गरीबी के चलते ज्यादा परवान नहीं चढ़ पाता। लेकिन अमीर लोग या बड़े आदमी अाजीवन अपने शौक आजमाते रहने को स्वतंत्र है। जितना बड़ा आदमी , उसके उतने बड़े शौक। मैने गौर … Read more

सचमुच निराली है महिमा चुनाव की …!!

-तारकेश कुमार ओझा- वाकई हमारे देश में होने वाले तरह – तरह के चुनाव की बात ही कुछ औऱ है। इन दिनों समूचे देश में सबसे बड़ा यानी लोकसभा का चुनाव हो रहा है। इस दौरान तरह – तरह के विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं। पता नहीं दूसरे देशों में होने वाले चुनावों में एेसी … Read more