देवी नागरानी जी के आशयार पर तज़ामीन

सोचिए, क्या मैं इनका करूँ कैसे इन पर भरोसा करूँ क्या उजालों को तरसा करूँ “ जुगनुओं का भला क्या करूँ मेरी मंज़िलें तो है कहकशां “ * माँ से बढ़कर नहीं कहीं कोई माँ है सबके लिए ही इक जैसी प्यार में है वो इक मिसाल अपनी ” ममता बच्चों में बंट गई मेरी … Read more

दादा को दूदू से दे दो

स्थितियां निरन्तर विकट होती जा रही है, कैलाश मेघवाल के साथ भाजपा हो अथवा उनका अपना समुदाय, आज कोई नजर नहीं आ रहा है, विरोध के स्वर आलाकमान तक पहुंच चुके है, मेघवाल को शाहपुरा से कूच करने के संकेत मिल चुके है, मगर जिन्दगी के आखिरी चुनाव में वे बड़े बेआबरू होकर भी इस … Read more

सोशल मीडिया और हिंदी ब्लॉगिंग : वर्धा में सत्य के प्रयोग

-संजीव तिवारी- उंघियाते ब्लॉगिंग के बीच इस माह के आरंभ में रमाकांत सिंह जी का फोन आया और उन्होंनें पूछा कि वर्धा चल रहे हैं क्या. मैंनें अनिश्चितता की बात की तब भी उन्होंनें टिकट बनवा लिया, कहा संभव नहीं होगा तो बाद में रद्द करावा लेगें. हमने इसे गंभीरता से नहीं लिया और अपने काम … Read more

पंडित दीनदयाल उपाध्याय से दगाबाजी

-संजय तिवारी- भारतीय जनता पार्टी की भोपाल रैली के लिए सिर्फ अलग अलग संभागों और विभागों से कार्यकर्ता ही नहीं बुलाए गये थे। गिनिज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी वहां मौजूद रहने के लिए कहा गया था। कारण यह कि किसी भी राजनीतिक दल द्वारा यह इतिहास का सबसे बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन … Read more

मैं कौन हूँ?

मैं वो कविता हूँ जो कोई क़लम न लिख पाई रात के सन्नाटों में तन्हाइयों का शोर में जाने क्यों ज्वालामुखी बन कर उबल पड़ता है इक दर्द, जो सदियों से चट्टान बनकर मेरे भीतर जम गया था सोच की आंच से वही पिघलता हुआ एक पारदर्शी लावा बनकर बह गया जब मैं खाली हुई … Read more

जीवन में काम की बातें

1.खुद की कमाई से कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनाओ..! 2. दिन मेँ कम से कम 3 लोगो की प्रशंशा करो..! 3. खुद की भुल स्वीकार ने मेँ कभी भी संकोच मत करो..! 4. किसी के सपनो पर हँसो मत..! 5. आपके पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी कभी आगे जाने का मौका दो..! 6. … Read more

क्या निर्भया को इंसाफ मिल गया?

16 दिसम्बर 2012 को जो चलती बस में हुआ वह दुहराने की जरुरत नही है क्युकी वह साडी दुनिया के सामने है । और जब तक वे गुनाह कर के इस दुनिया में जीवित रहते है एक नासूर की तरह वह जख्म लोगो के सामने जीवित रहेगा । एक ने आत्महत्या कर ली चार को फांसी … Read more

राष्ट्रीय मीडिया चौपाल–2013 : एक अवलोकन

मीडिया के सभी माध्यमों में ‘वेब मीडिया’ सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि इसने पत्रकारिता का लोकतांत्रिकरण किया है। मुख्यधारा के मीडिया से लोग हताश और निराश हैं। सो, बड़े पैमाने पर लोग सोशल साइट्स, ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए अपने विचार अभिव्यक्त कर रहे हैं। यहां वे स्वयं … Read more

आम आदमी पार्टी की अग्नि परीक्षा होगी दिल्ली विधानसभा चुनाव में

–डॉ. मनीष कुमार– काजल की काली कोठरी के बाहर रह कर खुद को बेदाग कहना आसान है, लेकिन काजल की काली कोठरी के अंदर रह कर खुद को बेदाग रखना ही असली परीक्षा है. आम आदमी पार्टी राजनीति की काली कोठरी से अब तक बाहर है. अभी अंदर गई भी नहीं है, लेकिन इसके अंदाज बदलने … Read more

तो क्या अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी को राजनीतिक रूप से जगा दिया है?

-रवीश कुमार- पता चला आई आई टी बदल गया है… इस लाइन से ही आप जज कर सकते हैं कि आई आई टी को लेकर इस लेखक की पहले से कोई तय राय रही होगी । आज जिस टापिक पर आई आई टी दिल्ली में चर्चा का संचालन करने जाना था उसके बारे में सुनते ही … Read more

आडवाणी-भागवत के संघर्ष में मोदी महज प्यादा

-पुण्य प्रसून बाजपेयी- लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज को खारिज कर नरेन्द्र मोदी के पक्ष में सरसंघचालक मोहन भागवत यूं ही नहीं खड़े हुये। इसके पीछे अगर पहली बार संघ की सीधे राजनीतिक हस्तक्षेप की सोच है तो दूसरी तरफ उस राजनीतिक परंपरा को भी तो़ड़ना है, जो सिर्फ मनमोहन सरकार के गवर्नेंस … Read more

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