रवीश कुमार की बात पर, मोहर नहीं हैं हाथ पर !

-निरंजन परिहार- रवीश कुमार बिहार में अपने गांव जाकर आए हैं। गांव में जो उन्होंने देखा, जाना, समझा, महसूस किया और पाया, वह पूरी बेबाक किस्म की ईमानदारी से अपनी कलम से निचोड़कर उन्होंने जस का तस पेश कर दिया। रवीश की बातों के सार को अपने शब्दों में पेश करते हुए एक लाइन में तो … Read more

इतिहास पर वर्त्तमान कि जीत?

-अब्दुल रशीद- सचिन तेंदुलकर यक़ीनन एक महान खिलाड़ी हैं,और उनका क्रिकेट के लिए दिया गया योगदान बहुमूल्य है। संन्यास या रिटायरमेंट एक नियति होता है जिससे नए पीढ़ी को मौक़ा मिलाता है। सचिन जैसे महान खिलाड़ी के संन्यास लेने पर लोगों का भावुक होना लाजमी है,लेकिन भावनाओं में बहकर इतिहास के महान व्यक्तिव को नज़र अंदाज … Read more

ब्‍लड प्रेशर को नॉर्मल रखे नीला रंग

कहते हैं कि स्‍वस्‍थ शरीर में ही स्‍वस्‍थ मस्तिष्‍क वास करता है। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए हम तमाम जतन करते हैं। इस मामले में रंग भी हमारी सहायता करते हैं, क्‍योंकि रंगों का सीधा संबंध हमारे स्‍वास्‍थ्‍य, समृद्धि और खुशियों से होता है। बस, आवश्‍यकता है रंगों का संभलकर इस्‍तेमाल करने की। फेंग्‍शुई … Read more

राजनीतिक पतन की पराकाष्ठा हो चुकी है

दोस्तों राजनीती कि पराकाष्ठा देखे। यदि देश कि खातिर कोई शहीद होता है तो उसके परिवार को पुरुस्कार के रूप में सरकारी सहायता दी जाती जिससे उसका परिवार शहीद कि अनुपस्थिति में दुखी न हो और जिसे भी पुरुस्कार दिया जाता है वो अच्छे काम के लिए दिया जाता है लेकिन राजनीती में इस बार … Read more

उल्लास और जिंदादिली के पर्याय थे विजयदान देथा

-केदारनाथ सिंह- मैं अभी एक सप्ताह पहले जोधपुर गया था और जाने का उद्देश्य यही था कि विजयदान देथा जी से मिल सकूंगा. उनका गांव जोधपुर से करीब 60-70 किलोमीटर दूर है. मुझे बताया गया कि वृद्धावस्था के कारण अब उनसे बात नहीं हो पाएगी. वो अब लगभग मौन हो गए हैं. कुछ भी कहने पर उनकी … Read more

भुखमरी को बनाया समुदाय का सवाल

  -बाबूलाल नागा- सदियों से भूख एवं गरीबी के कुचक्र में फंसे बारां जिले के सहरिया आदिवासी परिवारों ने भुखमरी को समुदाय का सवाल बना लिया है। अब वे पूरे सालभर के लिए न केवल अपने परिवारों बल्कि गांव व समुदाय के लिए भी अनाज एकत्रित कर रहे हैं। इसके लिए सहरियाओं ने ‘अनाज बैंक’ … Read more

अनुभवों की सुरभि को सलाम

सम्माननीय वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी श्री लक्ष्मण भंभाणी साहब के संपादन में 14 वर्ष से प्रकाशित हो रही अर्द्धवार्षिक पत्रिका सिंधी साहित्य सुरभि सिंधी का उत्कृष्ट साहित्य सिंधी में उपलब्ध करवा रही है। सुरभि का अप्रैल 2013 का अंक हिंदी सिनेमा में सिंधी फनकारों के फन को, उनके परिश्रम को, उनकी प्रतिभा को पाठकों के सम्मुख … Read more

वाजपेयी-आडवाणी की राह पर मोदी ?

-पुण्य प्रसून बाजपेयी- पीएम की दौड़ में नरेन्द्र मोदी जिस तेजी से सरदार पटेल को हथियाने में लगे हैं, उसने पहली बार यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि कहीं वाजपेयी और आडवाणी की राह पर ही तो मोदी नहीं चल पड़े हैं। क्योंकि जिस धर्मनिरपेक्षता को वैचारिक स्तर पर सरदार पटेल ने रखा उससे … Read more

अब जन नेता नहीं धन नेताओ का बोलबाला

-चन्दन सिंह भाटी- बाड़मेर सरहदी जिले बाड़मेर कि राजनीती ने भारतीय राजनीती को अनमोल रत्न दिए हें। इन रत्नो ने बाड़मेर कि राजनीती को परवान चढ़ाया। आज राजनीती इन महानुभावो कि कमी महसूस कर रही हें ,यह वो नेता थे जिनके प्रति आज जनता ने आस्था थी उनके प्रति जूनून था। आज का नेता नेता … Read more

वास्‍तु से बना अंडरवाटर टैंक लाता है समृद्धि

-नरेश सिंगल- लिविंग रूम, बेडरूम, बॉलकनी और डाइनिंग रूम आदि की तरह भवन में जल स्रोत का भी विशेष महत्‍व होता है। जल संग्रह के लिए ओवरहेड वाटर टैंक अथवा अंडर वाटर टैंक का निर्माण किया जाता है। वाटर टैंक का निर्माण किस दिशा में किया जाए, इसका ज्ञान होना अत्‍यंत आवश्‍यक है। वास्‍तु के अनुरूप … Read more

विज्ञान, राष्ट्रवाद और एकता

लोकसभा और दिल्ली विधान सभा चुनाव के निष्कर्ष कोई अगर सोशल मीडिया से निकाल रहा हैं और अगर वह यह सोच रहा है कि सोशल मीडिया में तथाकथित किसी पार्टी या नेता की विजय ही यथार्थ विजय है तो यह कागज के नांव से ज्यादा कुछ नहीं। निहितार्थ निकालने वाले कुछ लोग और सोशल मीडिया … Read more

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