डीडवाना क्षेत्र में 8 लाख वर्शो पूर्व आबादित थे ‘होमो इरेक्ट्स‘

-हनु तंवर नि:शब्द- डीडवाना क्षेत्र में नीचले पेलियोलिथिक काल से सम्बन्धित ‘‘एषूलियन कल्चरल टेªडीषन्स’’, सरस्वती की सहायक नदी दृशद्वती के बहाव व विलुप्त होने, थार के रेगिस्तान की गतिविधियों का प्रभाव तथा डीडवाना में ही मीठे पानी सेे नमक की झील में परिवर्तन के घटनाक्रमों, भूजल में फ्लोराइड व यूरेनियम की उपस्थ्तिि ने इस क्षेत्र को … Read more

ताकत वतन कि हमसे है

सरहद पर एक रात  जवानो के साथ -चन्दन सिंह  भाटी- बाड़मेर  बी.एस.एफ के जवान पाक रेंजर्स की खामोशी या निकमेमप पर किसी प्रकार की कोई रिस्क लेने को तैयार नही हैं। दुश्मन कतई विश्वास करने लायक नही हैं जिसमें एल.ओ.सी की घटना के बाद बी.एस.एफ ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर और चैकसी बढ़ा दी हैं वैसे बोर्डर पर दिन … Read more

जोर-जबरदस्ती और घूसखोरी का सामना करने में जीवंत है भारतीय लोकतंत्र

वर्ष 2013 समाप्ति की ओर है। एक महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाई अभी हाल ही में समाप्त हुई है, एक निर्णायक लड़ाई आने वाले वर्ष में लड़नी है। आगामी वर्ष की मध्यावधि समाप्त होने से पहले सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह के शासन का भविष्य तय हो जाएगा। समाचारपत्रों की सुर्खियों ने विगत् विधानसभाई चुनावों को ‘कांग्रेस के सफाए‘ के रुप में वर्णित किया … Read more

इस लोकपाल में मेरे लिए है ही क्या

लोकपाल पास हो गया, काफी चर्चा हो रही है, अब आम आदमी पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं, मैं भी सोच रहा हूँ, लोकपाल पास हो गया, अब मुझे आम आदमी पार्टी छोड़ देनी चाहिए, इस सोच में ही मैं घर से निकला, मेरा पैर एक खड्डे में जा गिरा सड़क टूटी हुई थी, नाली … Read more

अन्ना को अब पूर्ण विश्राम ले लेना चाहिए

-राजेन्द्र सिंह हीरा- जहाँ तक अन्ना जी को थोडा बहुत मैं समझ पाया हूँ , उसका लबोलुबाब यह है कि अन्ना जी ने अपने 30 साल के आंदोलनों में नए नए मुकाम तय किये. हर आंदोलन में उनका मकसद , उनकी टीम अलग होती थी. मकसद पूरा होने पर वे आगे बढ़ जाते थे , किसी … Read more

लोकपाल के असली जनक तो केजरीवाल हैं

-डॉ. वेद प्रताप वैदिक- लोकपाल विधेयक जिस हड़बड़ी में कानून बनने जा रहा है, वह अटपटा है, क्योंकि इसके कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर संसद में ही नहीं, संसद के बाहर भी जमकर बहस होनी चाहिए। देश की सारी अक्ल का ठेका संसद ने ले रखा हो, ऐसा नहीं है। संसद ने यों अब … Read more

राजस्थान विधानसभा चुनाव और महिलाएं

-बाबूलाल नागा- चौदहवीं विधानसभा चुनावों में एक तरफ महिला मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई तो दूसरी तरफ 28 महिलाएं चुनकर विधानसभा में पहुंची हैं। इस बार कुल 168 महिलाओं ने चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई थीं। स्वतंत्र भारत में 1952 से वर्ष 2013 तक राजस्थान विधानसभा के चौदह बार हुए चुनाव में अब … Read more

“आप ” को दिल्ली में सरकार बनानी चाहिए

“मैंने अरविन्द केजरीवाल जी और मनीष सिसोदिआ जी को यह सन्देश भेजा है कि “आप ” को दिल्ली में सरकार बनानी चाहिए. कारण मैं यह मानता हूँ कि दिल्ली की जनता का जनादेश “आप ” के लिए ही था. बस थोड़ी सी कमी रह गयी. बहुत सी सीटों पर बीजेपी बस थोड़े से अंतर से … Read more

पिता से सीखा पाठ

लावोन स्टेनर सात भाई-बहन थे और वे सभी पारिवारिक व्यवसाय में अपने पिता की दुकान में काम करते थे. लावोन के जीवन में क्रिसमस के त्यौहार से पहले घटी एक घटना ने उनपर अत्यधिक प्रभाव डाला. जब लावोन आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब वे अपने पिता की दुकान के खिलोने वाले सेक्शन में काम … Read more

चौबे से छब्बे बनने के चक्कर में कहीं दुबेजी बनकर न रह जाए ‘आप’

-डॉ. वेद प्रताप वैदिक- ‘आप’ पार्टी ने जो चमत्कार दिल्ली में किया है, वह अन्य प्रांतों में पहले भी हो चुका है। आंध्र में 1983 में ‘तेलुगु देशम’ और असम में ‘अगप’ ने 1985 में इतनी सीटें और वोट प्राप्त कर लिए थे कि अनुपात की दृष्टि से देखा जाए तो वे ‘आप’ से भी … Read more

जीतकर भी हार गई भाजपा

-सुन्दर लोहिया- जिन चार राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए उनमें राजस्थान मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ देश के बीमारु राज्य कहलाते हैं। इन राज्यों में विकास की अपेक्षा जाति को देश के बजाय धर्म को महत्व दिया जाता है। दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ प्रबुद्ध और जागरूक जनता का केन्द्र माना जा सकता है। इसलिए … Read more

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