जीरो का महत्व है अपने वतन में!

आखिर जीरो का ही सहारा लिया गृहमंत्रीजी ने भी और ऐलान कर दिया कि कोयले में जीरो लॉस हुआ हैं. उन्होंने कहा कि 57 कोयला खदानों से नुकसान का कैग का दावा गलत है। जब खदान से कोयला निकाला ही नहीं गया तो 1.86 लाख करोड रुपए के नुकसान की बात कहां से आ गई? इसलिए स्पष्ट है कि कोल ब्लॉक आंवटन में देश को जीरो नुकसान हुआ है। मंत्रीजी शायद यह बताना भूल गए कि मान लो कोई उनके बैंक अकाउंट को हाईजैक करके रुपए अपने अकाउन्ट में ट्रांसफर करले, लेकिन निकाले नहीं-तो उसे वह क्या मानेंगे?
इससे पहले उन्हीं के साथी केन्द्रिय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी, कुछ समय पूर्व अपनी विद्वता का परिचय देते हुए कहा था कि जब 2जी स्पैक्ट्रम के बारे में कोई नीति बनी ही नहीं थी तो घाटा कैसे हो सकता है? स्पैक्ट्रम पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बांटे गए थे और यह नीति एनडीए की ही थी। कैग ने जो 1.76 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की बात कही है वह आधारहीन है। यह जीरो लॉसेस है। यानि यह सरकार बार बार जो जीरो का सहारा ले रही है।
इसमें भी राज है। जीरो यानि शून्य हमारे देश के ही ऋषि वैज्ञानिक आर्यभट्ट का इजाद किया हुआ है। हालांकि जीरो की अकेले में कोई कीमत नहीं है लेकिन किसी के साथ लग जाए तो एक के दस और दस के सौ करने में इसे देर नही लगती। शून्य अथवा जीरो का काफी महत्व है। प्रसिद्ध भविष्यवेत्ता कीरो के अनुसार इस अंक का स्वामी प्लूटो है। सर्दियों में जब तापक्रम जमाव बिन्दु यानि जीरो डिग्री पर आ जाता है तो पानी भी अपना रूप बदल कर बर्फ बन जाता है।
भारत विभाजन से पूर्व जब ब्रिटिश काल में सारे उपमहाद्वीप का जियोलोजिकल सर्वे हुआ तो करांची के समुद्र तल को डेटम यानि जीरो लेवल माना गया। आज भी भारत के किसी भी स्थान की उंचाई उसी जीरो लेवल पर आधारित है। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में रोजाना की संसदीय कार्यवाही में प्रश्नोत्तरकाल के बाद दोपहर 12 बजे से एक बजे तक जीरो ऑवर होता है। इस अवधि में हमारे माननीय सदस्य देश की ज्वलंत समस्याओं को उठाते हैं, जिसका जवाब संबंधित मंत्री देते हैं। कोई समय था, जब कामरेड सुन्दरैया, मधुलिमये, नाथ पै, ए के गोपालन, एस ए डांगे, अटल बिहारी वाजपेयी तथा भूपेश गुप्त जैसे दिग्गज इस अवसर का सदुपयोग करते थे और ब्रिटिश लेखक पीटर मे की किताब पारलियामैन्ट्री डेमोक्रेसी के अनुरूप संसदीय व्यवस्था चलती थी। काश! यह स्तर वापस आ जाता।
जब आधुनिक अर्थशास्त्र का विकास हुआ और नवयुवक एमबीए करके आने लगे तो जगह जगह जीरो बजटिंग की बातें कही जाने लगीं। संस्थान बिना लाभ हानि के चलाने हेतु इस विधा का इस्तेमाल किया जाने लगा। इसके बाद तो जीरो इन्फ्लेशन, शून्य मुद्रा स्फीति, जीरो ग्रोथ इत्यादि वोक्योबलेरी ही चल पड़ी। फिर जब फोटोस्टेट का जमाना आया तो स्थान स्थान पर जीरोक्स की मशीनें लग गईं। अब सरकार कई चीजों पर वेट-टैक्स लगाने लगी है, लेकिन जिन जिन पर टैक्स नहीं लगाती है, उन्हें जीरो रेटेड गुड्स की संज्ञा देती है। दूषित वातावरण से उपजी विभिन्न बीमारियों, मसलन हार्ट, डायबिटीज इत्यादि के इलाज का एक कारगर तरीका जीरो ऑयल कुकिंग में बताया जाता है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति के खाने में कम से कम वसायुक्त तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
यह जीरो का ही प्रभाव लगता है, जिसकी बदोलत लंदन ऑलम्पिक में गए हमारे खिलाडिय़ों की शानदार कोशिशों के बावजूद हम गोल्ड मैडल नहीं जीत सके। हालांकि महज मनोरंजन, सैर सपाटे के लिए गए अन्य लोग आते वक्त यह कहते रहे कि हम जीरो गोल्ड मैडल के साथ लौटे हैं। काश! विभिन्न खेलकूद संघों पर कब्जा जमाये बैठे इन नेताओं और अफसरों की भीड़ से हमें जल्दी से जल्दी छुटकारा मिलता और हम क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेल एवं खिलाडिय़ों पर अधिक ध्यान देते।
-शिव शंकर गोयल

1 thought on “जीरो का महत्व है अपने वतन में!

  1. इस के लिए सबसे अच्छा उदहारण है, कोई रेप केस की कोशिश में अदालत में कहे की रेप तो हुआ ही नहीं फिर काहे की सजा.

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