हैरान हो जाया करता हूं।

पिताश्री को डैड़, माताश्री को मॉम
पुकारता हुआ देख,
बिगड़ते हुए संस्कारों पर
हैरान हो जाया करता हूं।

बड़े बुजुर्गो के पैर छूने की परम्परा
घटता हुआ देख,
बदलती हुई श्रद्धा पर
हैरान हो जाया करता हूं।

शिक्षा मंदिर में शिक्षक छात्रा से
इश्क लड़ाता देख,
गुरुओं के आचरणों पर
हैरान हो जाया करता हूं।

फौजी जवान मुल्क से गद्दारी कर
बेइमानी करता देख,
उनकी खाईं शपथ पर
हैरान हो जाया करता हूं।

देश के नौजवान आतंकवादी बनकर
आतंक फैलाते देख,
उनके संकीर्ण मानसिकता पर
हैरान हो जाया करता हूं।

पुलिसकर्मी जनता के रक्षक
भक्षक बनता देख,
उनके अनुशासन पर
हैरान हो जाया करता हूं।

चुनकर आए देश के भ्रष्ट नेता
भ्रष्टों से लिप्त देख,
उनकी भ्रष्ट करतूतों पर
हैरान हो जाया करता हूं।

इस तरह के लोगों द्वारा
देश का भविष्य क्या होगा,
यही सोच-सोच कर
हैरान हो जाया करता हूं।

गोपाल नेवार, ‘गणेश’सलुवा, प.बं। 9832170390.

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