पीएचडी डिग्री प्राप्त व्याख्याताओं को राज्य सरकार के आदेश दि. 19.02.2001 के अनुसार दो एडवान्स वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ एवं छठे वेतन आयोग का लाभ एवं वेतन स्थिरीकरण करने के पश्चात् अंतिम वेतन के आधार पर नियमानुसार देय उपदान की राशि तथा कार्यमुक्ति की दिनांक को अवकाश खाते में जमा उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि का भुगतान ब्याज सहित करने के आदेश
(राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण का मामला)
जयपुर, राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण, जयपुर ने प्रार्थीगण डॉ. सविन्द्र सिंह चुग, डॉ. हरीष मोहन सक्सैना, राजेन्द्र कुमार सिंह पारख, सुषील चन्द पाटनी, चन्द्रकान्त शास्त्री, डॉ. कृष्णलाल शर्मा, टीकम चन्द जैन, डॉ. जगदीष चन्द गुप्ता, रामचरण गालव का आवेदन स्वीकार कर अप्रार्थी संस्था प्रबन्ध समिति, दयानन्द कॉलेज अजमेर एवं प्रबन्ध समिति, डी.ए.वी. कॉलेज, अजमेर को निर्देशित किया कि वे प्रार्थीगण का राज्य सरकार के आदेष दिनांक 27.10.2009 के अनुसार राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल्स, 2009 के तहत नियमानुसार वेतन स्थिरीकरण का लाभ प्रदान किया जाकर बकाया वेतन के अन्तर की राषि का भुगतान प्रार्थीगण को करे एवं प्रार्थी डॉ. कृष्ण लाल शर्मा को उक्त लाभ दिलवाये जाने के साथ-2 राज्य सरकार के आदेश दि. 19.02.2001 के अनुसार पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त करने के कारण दो एडवान्स वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दि. 01.01.1996 से चयनित वेतनमान के तहत प्रदान किया जावे तथा अप्रार्थी संस्था द्वारा नियमानुसार देय अन्तिम वेतन के आधार पर संगणना कर उपदान की राशि एवं उनके अवकाश खाते में सेवानिवृŸिा की दिनांक को बकाया उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि का भुगतान बकाया होने की दिनांक से भुगतान किये जाने की दिनांक तक 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देय ब्याज सहित प्रार्थीगण को अदा करेगें। उल्लेखनीय है कि प्रार्थीगण की नियुक्ति अप्रार्थी संस्था में व्याख्याताओं के पद पर नियमानुसार विधि की प्रक्रिया अपनाये जाने के पश्चात् अधिष्ठायी पद पर की गयी थी तत्पश्चात् प्रार्थीैगण को स्थायी किया गया एवं अधिवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर उन्हें सेवानिवृत्त किया गया। प्रार्थीगण द्वारा अप्रार्थी संस्था में अपनी सेवायें सम्पूर्ण निष्ठा के साथ ईमानदारीपूर्वक दी गई लेकिन अप्रार्थी संस्था द्वारा प्रार्थीगण को सेवानिवृŸिा के समय उपदान की राशि एवं सेवानिवृŸिा के समय बकाया उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि तथा राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल्स, 2009 के अनुसार यू.जी.सी. वेतनमान के तहत वेतन स्थिरीकरण किया जाकर वेतन अन्तर राशि का भुगतान नहीं किया गया एवं प्रार्थी कृष्ण लाल शर्मा को राज्य सरकार के आदेश दिनांक 19.02.2001 के अनुसार पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के कारण दो एडवान्स वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ भी नहीं दिया गया। प्रार्थीगण द्वारा अप्रार्थी संस्था से उपरोक्त लाभ प्रदान करने के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत किये गये परन्तु अप्रार्थी संस्था ने अभ्यावेदनों पर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रार्थीगण ने इससे पीड़ित होकर अपने अधिवक्ता डी.पी. शर्मा के माध्यम से अधिकरण के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर उक्त लाभ दिलाने का निवेदन किया। प्रार्थीगण के अधिवक्ता का तर्क था कि अप्रार्थी संस्था राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के अन्तर्गत पंजीकृत होते हुए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है एवं इसे अनुदान की राशि भी प्रार्थीगण के सेवारत रहने के दौरान प्राप्त होती रही थी फिर भी सेवानिवृŸिा के समय प्रार्थीगण को राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था नियम 1993 के नियम 82 के अनुसार उपदान की राशि तथा खाते में जमा उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की राशि नियम, 1993 के नियम 51 के अनुसार नहीं दी गई एवं प्रार्थी कृष्ण लाल शर्मा को आदेश दिनांक 19.02.2001 के अनुसार पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के कारण दो एडवान्स वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ भी राज्य कर्मियों के समान नहीं दिया गया, इसके अलावा प्रार्थीगण राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 की धारा 29 व राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था नियम, 1993 के नियम 34 के अनुसार राज्य अप्रार्थी संस्था के अनुदानित होने के कारण राज्य कर्मचारियों के समान उक्त लाभ अप्रार्थी संस्था से प्राप्त करने के अधिकारी थे। मामले की सुनवाई के पश्चात् अधिकरण ने उक्त लाभ नियमानुसार ब्याज सहित प्रार्थीगण को अदा करने के आदेश अप्रार्थी संस्था को दिये।
डी.पी. शर्मा
एडवोकेट
मो.नं. 9414284018