बीकानेर। राजस्थानी कविता को नये शिल्प-विधान एवं भाषा के वैभव के साथ नवबोध-नवप्रयोग करने वाले राजस्थानी के समर्थ-वरिष्ठ कवि कमल रंगा का एकल काव्य पाठ वरिष्ठ कवि-आलोचक भवानीशंकर व्यास की अध्यक्षता एवं डूंगर महाविद्यालय में उर्दू के विभागाध्यक्ष शायर डॉ. मो. हुसैन के आथित्य में बीकानेर साहित्य संस्कृति कला संगम के साहित्यिक आयोजनों की श्रृंखला ‘हमारे सुखनवर’ की 13वीं कड़ी के तहत आगामी 10 जनवरी 2018 वार बुधवार को शाम 5 बजे नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम में रखा गया है। संस्था के अध्यक्ष शायर कासिम बीकानेरी एवं सचिव कवि प्रमोद शर्मा ने बताया कि कवि कमल रंगा की गत चार दशकों की सृजनयात्रा में यह दूसरा अवसर होगा तब वे साआग्रह एकल कविता पाठ करेंगे। आपका पहला एकल काव्यपाठ वर्ष 2005 में हुआ था, तब उनकी राजस्थानी का एक भी काव्य संग्रह प्रकाशित नहीं था। अभी उनके दो काव्य संग्रह ‘तिरस री तासीर’ और ‘बसंत म्हारी दीठ में’ पाठकों के बीच काफी चर्चित रहे है। इसी तरह उनका नया काव्य संग्रह ‘अदीठ साच’ भी तैयार है, उसका उल्लेख इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज तक की राजस्थानी काव्य-यात्रा में संभवत: यह पहली काव्यकृति है, जिसमें सिर्फ और सिर्फ त्रेतायुग, द्वापरयुग के साथ पौराणिक संदर्भों एवं घटना-चरित्रों के माध्यम से समकालीन बोध एवं नवप्रयोग करते हुए कविता को नई अर्थवत्ता देने का एक सृजनात्मक उपक्रम किया गया है। रंगा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी बात युवा कवि-पत्रकार हरीश बी शर्मा रखेंगे एवं मंच संचालन युवा कवि कथाकार संजय पुरोहित का रहेगा। कासिम ने बताया कि ज्ञात रहे कि गत 30 दिसम्बर 2017 को होने वाला एकल काव्यपाठ रंगा के आग्रह एवं संस्था निर्णय उपरान्त स्व. भवानीशंकर शर्मा के निधन के कारण स्थगित कर दिया गया था। जो अब 10 जनवरी को हो रहा है।
इस आयोजन हेतु नगर के साहित्यकार, रंगकर्मी एवं अन्य कला से जुड़ी प्रतिभाओं एवं गणमान्य लोगों को साआग्रह आमंत्रित किया गया है।