बदल जाएगा जल्द नफरत का जो माहौल हो गया है

“अभी बैठे हुए ख्यालों में, मुझे एक ख्याल आया, कि एक अर्सा गुजर गया है, मगर, वो नजर नहीं आया। अभी कल ही कि तो बात थी, वो इन्सान हुआ करता था, पर अचानक मुझे पता चला, मैं हिन्दु और वो मुसलमान हो गया है। दिलों में मुहब्बतें हुआ करती थी, अभी कुछ साल पहले … Read more

आओ . आंदोलन – आंदोलन खेलें.!!

आपका सोचना लाजिमी है कि भला आंदोलन से खेल का क्या वास्ता। देश ही नहीं बल्कि दुनिया में जनांदोलनों ने बड़े बड़े तानाशाहों को धूल में मिला दिया। लेकिन जब आंदोलन भी खेल भावना से किया जाने लगे तो ऐसी कुढ़न स्वाभाविक ही कही जा सकती है। दरअसल मेरे गृहराज्य में कुछ दिन पहले एक … Read more

खुले बाळ , शोक और अशुद्दि की निशानी

आजकल माताये बहने फैशन के चलते कैसा अनर्थ कर रही है पुरा पढें। रामायण में बताया गया है, जब देवी सीता का श्रीराम से विवाह होने वाला था, उस समय उनकी माता सुनयना ने उनके बाल बांधते हुए उनसे कहा था, विवाह उपरांत सदा अपने केश बांध कर रखना। बंधे हुए लंबे बाल आभूषण सिंगार … Read more

सुन लो ना बाबा मोरे

सुन लो ना बाबा मोरे , करने दो ना मन की मोहे , चिड़िया हूँ आँगन की तोरे , उड़ जाऊँगी, क्या जाने कौन ठिकाने । सुन लो ना बाबा मोरी , मटकी ले माँ तो चल देती , भाई बहन छोटे मेरे संग कर देती , कैसे ढूँढूँ गुड्डा गुड़िया का मेरी , छोटा … Read more

Chinese Poems Urdu translated by devi nangrani

دوقدیم چینی نظمیں شاعر :نامعلوم ترجمہ: دیوی نانگرانی، امریکا گھاٹی کے اس پار میں دشمن سے ہاتھوں ہوا ایک قیدی ہوں اسیری کی شرمندگی جھیلتے میری ہڈّیاں باہر نکل آئیں ہیں اور میری طاقت ختم ہو گئی ہے کھانے کو مناسب نہیں ملتا۔ میرا بھائی مینڈرن* ہے۔۔ اور اسکے گھوڑے مکئی پرپرورش پاتے ہیں پر … Read more

निर्भया कांड के बाद, कुछ बदला क्या?

इस तस्वीर को देखकर सहज सरल भाषा मे कुछ कहने की कोशिश की है .. मन मे उभरी पीड़ा को क्रमशः लिखती गयी….बस यूँही… बिना किसी शीर्षक के…..क्योकि मैंने कविता लिखने की मंशा से शब्दों को कलमबद्ध किया ही नही ….. “इतनी रैलियां ,आक्रोश और वेदना देखकर आश्वस्त थी पर निर्भया कांड के बाद, कुछ … Read more

बेटी आसिफा को श्रद्धांजली

नए सन्दर्भों में मेरी एक पुरानी ग़ज़ल ….. नसीबों को शाख़ों पे खिलती हैं बेटी, मुक़द्दर भला हो तो मिलती हैं बेटी. कभी बनके मैना, कभी बनके कोयल, घरों आंगनों में उछलती हैं बेटी. जमा करती सर्दी में, बारिश में बहतीं, अगर गर्मियां हो पिघलती हैं बेटी. जलें ना जलें, हैं चरागाँ तो बेटे, मगर … Read more

गर्भिणी

वो तिल तिल, तन मन से हार दौङती, गर्भिणी! चिंतातुर सी, बढता उदर लिये! झेलती चुभते शूल भरे अपनों के ताने, भोर प्रथम पहर उठती ढेरों फिकर लिये!! एक बच्चा हाथ संभाले,एक कांख दबाये कुदकती यूं अपनो की चिंता को लिये! तरा उपर तीसरे पर रखती पूरी आंख, जो चिंघता पीछे साङी का पल्लू लिये! … Read more

खुशियों भरा जमाना

आजकल के भागते युग में अक्सर लोग वक्त के ठहराव को ढूंढते है। क्यूंकि उसे तहे दिल से जब तक महसूस नही कर लेते वह लम्हा जिया हुआ नही लगता। सही भी है क्योंकि एक-एक धागा सीकर ही कारीगरी का हुनर साधा जा सकता है, या बैठ कर उन अच्छे बुरे वक्त को दिल में … Read more

काहे को ब्याहे महतारी ?

सौंधी माटी की खुश्बू को यूं चाक चाक ढल जाने दो, छोटी सी कच्ची है गगरिया, तन को तो पक जाने दो। मधु स्मृतियों के बीच पनपते बचपन को खिल जाने दो, काहे को ब्याहे महतारी ? मुझे, थोङा तो पढलिख जाने दो…. नादानी के खेल चढी है, बल बुद्दि की बेल नही बढी है, … Read more

भूख का इतिहास – भूगोल … !!

क्या पता जब न्यूज चैनल नहीं थे तब हमारे सेलिब्रिटीज जेल जाते थे या नहीं… लेकिन हाल – फिलहाल उनसे जुड़ी तमाम अपडेट सूचनाएं लगातार मिलती रहती है। जब भी कोई सेलेब्रिटीज जेल जाता है तो मेरी निगाह उस पहले समाचार पर टिक जाती है जिसमें बताया जाता है कि फलां अब कैदी नंबर इतना … Read more