अजमेर

महिलाओं के उत्सव मातृशक्ति मानसून फेस्ट को लेकर विधायक भदेल ने की प्रेस वार्ता
23 अगस्त को आयोजित होगा भव्य मातृशक्ति मानसून फेस्ट अजमेर, 17 अगस्त। अजमेर दक्षिण विधायक अनीता भदेल ने सोमवार को होटल एम्बरडाइन
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दी सौगात
अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 12 करोड़ की लागत से बनेगी सड़कें, होगा पेचवर्क अजमेर, 17 अगस्त। अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में सड़क

*प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2025*
_*आयोग ने जारी की पॉलिटिकल साइंस विषय की विचारित सूची*_ अजमेर, 17 अगस्त। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा प्राध्यापक एवं
चौपाल

पलाड़ा परिवार की दोहरी सियासी दस्तक
नगर निगम और जिला परिषद : दोनों पर नजर अजमेर की स्थानीय राजनीति में आरक्षण की नई तस्वीर ने कई

टिकट की भीड़ से अलग दिखी जनाधार की ताकत
भाटी के जन्मदिन ने कांग्रेस को दिखाया आईना कांग्रेस के कद्दावर नेता, प्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवी हेमंत भाटी के जन्मदिन
अजमेर को बहुत कुछ और देने की इच्छा अधूरी रह गई
भाजपा व संघ के वरिष्ठतम नेता स्वर्गीय श्री धर्मेश जैन ने अजमेर को बहुत कुछ दिया और जीवन के अंतिम
नजरिया
दवाइयां सिरहाने नहीं रखनी चाहिए
दवाइयां सिरहाने रखने से बीमारी से मुक्ति कठिन होती है, यह मान्यता भारत के कई हिस्सों में लोकविश्वास के रूप
हमारी शिक्षा पद्धति कितनी बेमानी है?
क्या आपने कभी ख्याल किया है कि हमारे यहां हायर एजुकेशन में जो विषय पढाए जाते हैं, उनका व्यावहारिक जीवन
प्रेंक वीडियो के नाम पर परोसी जा रही है अश्लीलता
इन दिनों यूट्यूब पर प्रेंक वीडियो खूब चलन में हैं। प्रेंक का मतलब होता है शरारत या मजाक। कई लड़के-लड़कियों
राजस्थान

राजस्थान बीजेपी के सत्ता व संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू
वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया को संगठन में जगह मिलने बाद व्यापक बदलाव सुनिश्चित विशेष संवाददाता जयपुर। बीजेपी की नई केंद्रीय कार्यकारिणी

रयान एडुनेशन स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति, पर्यावरण और खेल प्रतिभा का संगम
100 पौधे रोपे गए, विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया; सीबीएसई क्लस्टर बैडमिंटन पदक विजेताओं का सम्मान जयपुर: रयान एडुनेशन

स्वतंत्रता सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, 500 तुलसी पौधों और तिरंगे का वितरण
भीलवाड़ा। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर पूर्वांचल जन चेतना समिति चैरिटेबल ट्रस्ट ने राष्ट्र के प्रति सम्मान और पर्यावरण
अजमेर एट ए ग्लांस

अनेक सरकारी दफ्तरों की वजह से खास है अजमेर
सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह और तीर्थराज पुष्कर के साथ रेलवे का मंडल कार्यालय होने के कारण

अजमेर के वजूद में रेलवे का अहम किरदार
माना जाता है कि अजमेर का वजूद दरगाह, पुष्कर और कुछ राज्य स्तरीय दफ्तरों के साथ रेलवे की वजह से

पौराणिक व ऐतिहासिक तीर्थराज पुष्कर
अजमेर शहर से मात्र 11 किलोमीटर दूर तीर्थराज पुष्कर विश्वविख्यात है और पुराणों में वर्णित तीर्थों में इसका महत्वपूर्ण स्थान
कानाफूसी
वैभव गहलोत को अजमेर में लॉंच करने की तैयारी?
कानाफूसी है कि पूर्व मुख्यमंत्री अषोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के लिए अजमेर में जमीन तलाषी जा रही है?

अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन द्वारा दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय मैं विशेष पूजा विधान का आयोजन
श्री अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन शाखा अजमेर के तत्वाधान में मासिक पूजन की श्रंखला के तहत श्री दिगंबर जैन

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के जन्मदिवस पर कांग्रेसजन ने किये सेवाकार्य
आज दिनांक 30 नवंबर – राजस्थान प्रतिपक्ष नेता एवं अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली जी का 44 व जन्मदिन अजमेर
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गेस्ट-रायटर
अल्पसंख्यकों की असुरक्षा से आतंकवाद तक पाक का यथार्थ
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया गया हालिया बयान केवल एक जहरीली एवं
1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम और महर्षि दयानंद सरस्वती : इतिहास के विस्मृत अध्याय को पढ़ने का समय
भारत के इतिहास में 1857 का वर्ष केवल एक विद्रोह, सैनिक असंतोष अथवा अचानक भड़की हुई हिंसक घटना का वर्ष
सावन के तीसरे सोमवार को लगता है आगरा का सुप्रसिद्ध कैलाश मेला (विशेष आलेख)
हमारे भारत देश में एक समृद्ध आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत के साथ, कई धर्मों का पालन किया जाता है। नतीजतन धार्मिक त्योहारों की एक बड़ी संख्या को मनाया जाता है। ऐसा ही एक त्योहार आगरा का सुप्रसिद्ध कैलाश मेला है। आगरा का यह सुप्रसिद्ध कैलाश मेला हर वर्ष सावन महीने के तीसरे सोमवार को लगता है। कैलाश मेला हर साल बड़ी धूमधाम से आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में यमुना के किनारे स्थित कैलाश मंदिर पर लगता है। कैलाश मेला सावन महीने में भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है। वैसे तो साल के हर सोमवार को आगरा के कैलाश मंदिर पर भक्तों का जमावड़ा लगता है, लेकिन सावन महीने में कैलाश मंदिर का मनमोहक नजारा होता है। हर तरफ भक्ति की बयार बही होती है और भगवान शिव के भक्त दूर दराज के क्षेत्रों से दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि आगरा के कैलाश मंदिर पर मांगी गयी हर मनौती भगवान शिव पूर्ण करते हैं। कैलाश मेले पर आगरा का माहौल बहुत हंसमुख होता है। आगरा के लोग कैलाश मेले को एक पर्व की तरह मनाते हैं। कैलाश मेले के दिन आगरा के स्थानीय प्रशासन द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है और इस दिन आगरा के सभी स्कूल-कॉलेज, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में छुट्टी होती है। मेले के अवसर पर जो बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है, उनकी भक्ति और खुशी देखने लायक होती है। इस दिन कैलाश मंदिर के कई-कई किलोमीटर दूर तक खेल-खिलौनों, खाने-पीने सहित अनेकों दुकानों की स्थापना की जाती है। इस दिन यमुना किनारे कैलाश मंदिर पर हजारों कांवड़िये दूर-दूर से कांवड़ लाकर भगवान शिव की भक्ति से ओत-प्रोत होकर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए कांवड़ चढ़ाते हैं। वैसे तो सावन के हर सोमवार को आगरा के सभी सुप्रसिद्ध शिव मंदिरों में कांवड़ चढ़ाई जाती हैं लेकिन सावन के तीसरे सोमवार को कैलाश मंदिर पर कांवड़ चढाने का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन कैलाश मंदिर के किनारे से गुजरने वाली यमुना में स्नान करना भी काफी शुभ माना जाता है, इसलिए भक्त मंदिर में शिवलिंगों के दर्शन करने से पहले यमुना में जरूर स्नान करते हैं। माना जाता है कि आगरा के कैलाश महादेव का मंदिर पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में स्थापित दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ा देते हैं। कहा जाता है कि कैलाश मंदिर के शिवलिंग भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि के द्वारा स्थापित किए गए थे। महर्षि परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का अपना अलग ही एक महत्व है। त्रेता युग में भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने गए। दोनों पिता-पुत्र की कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उनसे अपने साथ चलने और हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांग लिया। इसके बाद भगवान शिव ने दोनों पिता-पुत्र को एक-एक शिवलिंग भेंट स्वरूप दिया। जब दोनों पिता-पुत्र यमुना किनारे अग्रवन में बने अपने आश्रम रेणुका के लिए चले (रेणुका धाम का अतीत श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित है) तो आश्रम से 6 किलोमीटर पहले ही रात्रि विश्राम को रुके। फिर सुबह होते ही दोनों पिता-पुत्र हर रोज की तरह नित्य कर्म के लिए गए। इसके बाद ज्योर्तिलिंगों की पूजा करने के लिए पहुंचे, तो वह जुड़वा ज्योर्तिलिंग वहीं स्थापित हो गए। इन शिवलिंगों को महर्षि परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने काफी उठाने का प्रयास किया, लेकिन उस जगह से उठा नहीं पाए। हारकर दोनों पिता-पुत्र ने उसी जगह पर दोनों शिवलिंगों की पूजा अर्चना कर पूरे विधि-विधान से स्थापित कर दिया और तब से इस धार्मिक स्थल का नाम कैलाश पड़ गया। यह मंदिर भगवान शिव और पवित्र यमुना नदी जो कि मंदिर के किनारे से होकर गुजरती है के लिए प्रसिद्ध है। कभी-कभार जब यमुना का जल-स्तर बढ़ा हुआ होता है और यमुना में बाढ़ की स्थिति होती है तो यमुना का पवित्र जल कैलाश महादेव मंदिर के शिवलिंगों तक को छू जाता है। यह अत्यंत मनमोहक दृश्य होता है। इस बार यह मेला 17 अगस्त 2026 को लगाया जा रहा है। कैलाश मंदिर पर आने वाला हर व्यक्ति इस खूबसूरत ऐतिहासिक जगह की सराहना करे वगैरह नहीं रहता है। लेखक – डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत (Brahmanand Rajput) On twitter @33908rajput On facebook – facebook.com/rajputbrahmanand E-Mail – [email protected] Mob/WhatsApp- 08864840607