अजमेर

*प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2025*
_*आयोग ने जारी की हिस्ट्री एवं केमिस्ट्री विषय की विचारित सूची*_ अजमेर, 11 अगस्त। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा प्राध्यापक

‘राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हमारी राष्ट्रीय चेतना के दो सशक्त स्वर’—प्रो. अग्रवाल
अजमेर, 11 अगस्त। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे सप्तदिवसीय

ह्रदय रोगियो के उपचार में इमेजिंग और फिजियोलॉजी तकनीक से बढ़ रही सटीकता —डॉ. गिउलियो
पर्यावरण बचाएं, हर एक अपनों के नाम पौधे लगाएं— डॉ ज्योत्सना रंगा अजमेर,11 अगस्त()। हृदय की धमनियों में रुकावट के
चौपाल
टिकट का एक ही धर्म—जीत, बाकी सब बेमानी
नगर निकाय चुनावों की दस्तक के साथ वार्डों में दावेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। गलियों में जनसंपर्क, चौपालों में
कांवड़ यात्रा सुगम बनाई जाए
कांवड़ यात्रा से पहले बदहाल अजमेरदृपुष्कर मार्ग, क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है? सावन माह में भगवान
लोकप्रियता के दम पर निर्दलीय विधायक बने थे ब्रह्मदेव कुमावत
राजस्थान सरकार के पूर्व संसदीय सचिव श्री ब्रह्मदेव कुमावत का गत दिवस देहावसान हो गया। ज्ञातव्य है कि उन्होंने अपनी
नजरिया
दवाइयां सिरहाने नहीं रखनी चाहिए
दवाइयां सिरहाने रखने से बीमारी से मुक्ति कठिन होती है, यह मान्यता भारत के कई हिस्सों में लोकविश्वास के रूप
हमारी शिक्षा पद्धति कितनी बेमानी है?
क्या आपने कभी ख्याल किया है कि हमारे यहां हायर एजुकेशन में जो विषय पढाए जाते हैं, उनका व्यावहारिक जीवन
प्रेंक वीडियो के नाम पर परोसी जा रही है अश्लीलता
इन दिनों यूट्यूब पर प्रेंक वीडियो खूब चलन में हैं। प्रेंक का मतलब होता है शरारत या मजाक। कई लड़के-लड़कियों
राजस्थान

“एक पौधा भविष्य के नाम” अभियान का शुभारंभ, भीलवाड़ा में लगाए जाएंगे 500 पौधे
भीलवाड़ा, 11 अगस्त 2026। प्रकृति संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं हरित भविष्य का संकल्प लेते हुए पूर्वांचल

रयान एडुनेशन स्कूल में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विद्यार्थियों ने जानी बुनाई की विरासत
जयपुर, अगस्त 2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रयान एडुनेशन स्कूल, जयपुर में कैप्टन चौहान फाउंडेशन ट्रस्ट के सहयोग से विद्यार्थियों के

डॉ. मेघना शर्मा राजस्थानी अध्ययन केंद्र की निदेशक नियुक्त, हुआ सम्मान
कुलाधिपति व राज्यपाल राजस्थान के निर्देशों पर महाराजा गंगा सिंह विश्वाविद्यालय में राजस्थानी अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है जिसकी
अजमेर एट ए ग्लांस

अनेक सरकारी दफ्तरों की वजह से खास है अजमेर
सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह और तीर्थराज पुष्कर के साथ रेलवे का मंडल कार्यालय होने के कारण

अजमेर के वजूद में रेलवे का अहम किरदार
माना जाता है कि अजमेर का वजूद दरगाह, पुष्कर और कुछ राज्य स्तरीय दफ्तरों के साथ रेलवे की वजह से

पौराणिक व ऐतिहासिक तीर्थराज पुष्कर
अजमेर शहर से मात्र 11 किलोमीटर दूर तीर्थराज पुष्कर विश्वविख्यात है और पुराणों में वर्णित तीर्थों में इसका महत्वपूर्ण स्थान
कानाफूसी
वैभव गहलोत को अजमेर में लॉंच करने की तैयारी?
कानाफूसी है कि पूर्व मुख्यमंत्री अषोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के लिए अजमेर में जमीन तलाषी जा रही है?

अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन द्वारा दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय मैं विशेष पूजा विधान का आयोजन
श्री अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन शाखा अजमेर के तत्वाधान में मासिक पूजन की श्रंखला के तहत श्री दिगंबर जैन

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के जन्मदिवस पर कांग्रेसजन ने किये सेवाकार्य
आज दिनांक 30 नवंबर – राजस्थान प्रतिपक्ष नेता एवं अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली जी का 44 व जन्मदिन अजमेर
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गेस्ट-रायटर
युवा शक्ति को मिले दिशा, सपनों को मिले उड़ान
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त 2026) पर विशेषः युवा केवल उम्र की एक अवस्था नहीं, बल्कि ऊर्जा, साहस, कल्पना, परिवर्तन
गीतों के राज कुमार गोपाल सिंह नेपाली के ११६वें जन्मदिन (११ अगस्त) पर विशेष
सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और पत्रकार स्व. गोपाल सिंह नेपाली का आज जन्म दिन है। आज ११ अगस्त १९११ के दिन
कुंभिनासी : लंका से मथुरा तक जाती एक विस्मृत पौराणिक गाथा
भारत की पौराणिक स्मृति में कुछ कथाएँ ऐसी हैं, जो मुख्य आख्यानों के पीछे रह जाती हैं। रामायण का नाम आते ही हमारे सामने राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और रावण के विराट चरित्र उभरते हैं। विभीषण, कुंभकर्ण और शूर्पणखा भी हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। लेकिन उसी विशाल कथा-परंपरा में एक स्त्री ऐसी भी है, जिसकी कहानी लंका के राजमहल से आरंभ होकर यमुना के किनारे बसे मधुवन तक पहुँचती है और अंततः मथुरा की प्राचीन स्मृति से जुड़ जाती है। उसका नाम है “कुंभिनासी”। कहीं उन्हें कुंभिनी कहा गया है, कहीं कुम्भीनसी। लोकप्रिय कथाओं में उन्हें रावण की बहन के रूप में याद किया जाता है। लेकिन जब रामायण की अलग-अलग परंपराओं और वंश-विवरणों को साथ रखकर देखा जाता है, तो उनका संबंध कुछ अधिक जटिल दिखाई देता है। यही जटिलता इस कथा को और रोचक बनाती है।कुंभिनासी की कहानी केवल एक राक्षसी स्त्री की कथा नहीं है। यह परिवार, सत्ता, प्रेम, प्रतिशोध, विवेक और नियति की ऐसी कहानी है, जिसके एक छोर पर लंका है और दूसरे छोर पर मथुरा। और इन दोनों के बीच खड़ी है – एक स्त्री। लंका के राजवंश से जुड़ी एक स्त्री रामायण की वंश-परंपरा में कुंभिनासी का संबंध लंका के राक्षस-कुल से अत्यंत निकट बताया गया है। विभीषण जब रावण को उनके अपहरण का समाचार देते हैं, तो उनके संबंध को मातृकुल के माध्यम से समझाते हैं। वे उन्हें भाइयों की बहन के समान बताते हैं। इसी कारण बाद की लोकप्रिय परंपरा में कुंभिनासी को रावण की बहन के रूप में जाना गया। लेकिन रामायण की कथा में एक दूसरा वंश-विवरण भी मिलता है, जिसमें कुंभिनासी को विश्वावसु और अनला की पुत्री तथा मधु की पत्नी कहा गया है। उन्हीं से लवण नामक पुत्र का जन्म बताया गया है। इसलिए कुंभिनासी को लेकर सबसे सावधानीपूर्ण बात यही होगी कि उन्हें रावण के मातृकुल से अत्यंत निकटता रखने वाली स्त्री कहा जाए, जिसे कथा में बहन के समान संबोधित किया गया है। भारतीय प्राचीन आख्यानों में रिश्तों की भाषा हमेशा आधुनिक जैविक संबंधों जैसी सीधी रेखा में नहीं चलती। मातृकुल, पितृकुल और कुल-संबंधों की अपनी सामाजिक संरचना थी। संभवतः इसी कारण कुंभिनासी की पहचान अलग-अलग पाठ-परंपराओं में कुछ भिन्न रूपों में दिखाई देती है। लेकिन उनके जीवन की अगली घटना बिल्कुल स्पष्ट है; और यहीं से कहानी में एक नया मोड़ आता है। मधु का आगमन उस समय लंका में शक्ति का केंद्र रावण था। उसकी महत्वाकांक्षा सीमाओं से परे फैल चुकी थी। वह विजय-अभियान पर था और उसके पीछे लंका की सत्ता, सेना और राजकीय प्रतिष्ठा का भार था। इसी समय एक शक्तिशाली राक्षस लंका पहुँचा। उसका नाम था “मधु”। मधु केवल बलवान ही नहीं था। रामायण की परंपरा में उसका चित्रण लवणासुर से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। वह ब्राह्मणों का सम्मान करता था, शरणागत की रक्षा करता था और देवताओं के साथ भी मैत्रीपूर्ण संबंध रखने वाला बताया गया है। उसके व्यक्तित्व में शक्ति थी, लेकिन वह शक्ति अभी तक अनियंत्रित हिंसा में नहीं बदली थी। लेकिन कुंभिनासी को देखकर मधु का मन बदल गया। उसने कुंभिनासी को बलपूर्वक अपने साथ ले लिया। यह घटना उस समय हुई जब लंका के राजपरिवार के प्रमुख सदस्य अलग-अलग कार्यों में व्यस्त थे। रावण विजय-अभियान पर था, विभीषण अपने धार्मिक कर्म में लगे थे और कुंभकर्ण निद्रा में था। मधु ने अवसर का लाभ उठाया और कुंभिनासी को अपने साथ मधुपुरी ले गया। कुंभिनासी का यह हरण केवल एक स्त्री के जीवन में आए संकट की घटना नहीं थी। यह आने वाले एक बड़े संघर्ष का बीज था। क्योंकि कुंभिनासी जिस परिवार से आती थीं, वहाँ अपमान का उत्तर प्रायः तलवार से दिया जाता था। और रावण को जब यह समाचार मिला, तो उसका क्रोध स्वाभाविक ही था।