जयपुर, 12मार्च । जहां साधन- पद्धति शुद्ध उचित होती है, वहां निसन्देह भगवान का आशीर्वाद मिलता है । जहां यह तीनों मिलते हैं ,वहां पराजय असंभव है । एक सत्याग्रही की हमेशा विजय होती है । भले ही स्वतंत्र हो अथवा जेल में डाल दिया गया हो। गांधी जी के इस कालजयी उद्बोधन का वाचन किया जस्टिस जी आर मूलचंदानी ने,जो दांडी सत्याग्रह के अवसर पर राजस्थान सिंधी अकादमी के गांधी विशेषांक ‘रिहाण’के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे ।
उन्होंने कहा कि सविनय अवज्ञा आंदोलन से बड़ा अस्त्र-शस्त्र नहीं, जहां विनय पूर्वक अहिंसा भाव से शत्रु को पराजित किया जा सकता है ।
कार्यक्रम के अध्यक्ष में के रूप में बोलते हुए राज्य के पूर्व महाधिवक्ता और वरिष्ठ गांधीवादी विचारक जीएस बाफना ने जय जगत- जय जगत गीत के मर्म को समझाते हुए कहा कि” सबको सबसे प्यार हो, जीत हो जहान की ,ना किसी की हार हो । ये मंगलकारी विचार ही गांधी आदर्शो की पुनर्स्थापना कर सकते है ।विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए शांति और अहिंसा प्रकोष्ठ के समन्वयक मनीष शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शांति और अहिंसा प्रकोष्ठ को शांति और अहिंसा निदेशालय के रूप में परिवर्तित करना गांधी के विचारों के प्रति प्रतिबद्धता और अनुपालना को दर्शाता है । यह संपूर्ण भारत में अनूठा उदाहरण है ।
दूरदर्शन के पूर्व निदेशक और रिहाण पत्रिका के संपादक हरीश करमचंदानी ने सिंधी के स्वतंत्रता सेनानी पद्मश्री हुंदराज दुखायल का गीत जो बापू के व्यक्तित्व से प्रभावित था, पढ़कर सुनाया उन्होंने कहा कि ,”बापू तुम्हारे चरखे की आवाज मैंने झोपड़ियों में सुनी और उसको सुनकर मैं जनसमूह के साथ स्वतंत्रता संग्राम को तत्पर हो गया ।कार्यक्रम में अकादमी के पूर्व अध्यक्ष नरेश कुमार चंदनानी ने धन्यवाद ज्ञापन किया । लोकार्पण में सिंधी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार और भाषा प्रेमी उपस्थित थे।