धूम धाम से मनाया श्री चंद्र प्रभु का मोक्ष कल्याणक उत्सव

*अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण मोदक अर्पण सहित किया गया चंद्रप्रभु महामंडल विधान पूजन, मंदिर के शिखरों पर चढ़ाई गई धर्म ध्वजाऐं*

केकड़ी 20 मार्च(पवन राठी)
सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा 108 मुनि श्री कंचन सागर महाराज के मंगल सानिध्य एवं पंडित भुवनेश जैन के निर्देशन में शनिवार को चन्द्रप्रभु भगवान का मोक्षकल्याणक महामहोत्सव दिवस बड़े ही भक्ति-भाव,उत्साह के साथ धार्मिक रीतियों के अनुरूप मनाया गया।श्री दिगम्बर जैन समाज के प्रचार संयोजक नरेश जैन
ने बताया कि इस मौके पर विद्यासागर मार्ग स्थित चन्द्रप्रभु चैत्यालय में महोत्सव के दौरान मुनि श्री कंचन सागर जी महाराज ने मंगलमयी प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान की पूजा भक्ति स्तुति हमेशा सांसारिक प्रपंचों से परे होकर प्रफुल्लित अवस्था में,आनन्दित होकर करनी चाहिए।जीवन में त्याग का बहुत बड़ा महत्व है छोटे छोटे त्याग हमें तप की ओर अग्रसर करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान के नाम स्मरण से उनके गुण ध्यान में आ जाते हैं गुणों का स्मरण हमारा पुण्य बढ़ाता है। भगवान की पूजा अर्चना, आराधना का पुण्य इस जीवन के साथ अगले भवो में भी काम आता है। जीवन में सरलता,निर्मलता, सहजता विचारों को भावों को शुभ एवं शुद्ध बनाते हैं। विचारों को पवित्र बनाकर जीवन को धर्म के मार्ग पर लाकर सार्थक बनाना चाहिए। जिससे निश्चित ही मानव जीवन साधारण इंसान से धर्मात्मा बन जाता है।
चंद्रप्रभु चैत्यालय में विराजित मूलनायक और जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु भगवान का मोक्षकल्याणक दिवस पर विशेष भक्ति भाव पूर्वक हुए आयोजनों में श्री जिनेन्द्र देव का रजत कलशों से जलाभिषेक किया।
जिनेन्द्र देव का प्रथम अभिषेक का सौभाग्य प्रेमचंद मनोज कुमार पाण्ड्या ,भंवर लाल अमित कुमार टौंग्या नांदसी वाले,कमल कुमार विमल कुमार भाल, महावीर प्रसाद सूरज टौंग्या, कैलाश चंद विमल कुमार गदिया परिवार को मिला। कलशाभिषेक उपरांत विश्व में सभी प्रकार से सभी जीवों को शांति,समृद्धि,सुख प्राप्ति की मंगल कामना के भाव लिए बोली द्वारा लाभार्थी मुख्य श्रेष्टी पात्रों ज्ञानचंद आशीष कुमार जैन, कैलाश देवी चेतन कुमार महावीर प्रसाद सूरज टौंग्या, प्रेमचंद मनोज कुमार पाण्डया,प्रकाश चंद कैलाश चंद बज परिवार द्वारा प्रथम शांतिधारा सहित अन्य श्रृद्धालुओं द्वारा शांतिधारा की गई।
शांतिधारा पश्चात् मंदिर के शिखरों पर लाभार्थी परिवारों अंजना देवी कमल कुमार विनोदिनी देवी अनुराग कुमार आशीष कुमार ठोलिया परिवार एवं महावीर प्रसाद विपिन कुमार सचिन कुमार गदिया परिवार द्वारा ध्वज दंड पर धर्म ध्वजा चढ़ाई गई।
श्रावक श्राविकाओं ने बड़े ही भक्तिमय माहौल में धूमधाम, हर्षोल्लास और उत्साह से निर्वाण कांड पाठ करते हुए हाथों में अर्घ,श्री फल,दीपक लेकर मोक्ष के प्रतीक स्वरूप निर्वाण मोदक श्री जिनेन्द्र प्रभु के चरणों में अर्पण किए। मुख्य लाडू अर्पण का सौभाग्य भंवर लाल अरिहंत बज एवं प्रेमचंद मनोज कुमार पाण्डया को मिला।
दोपहर मे चंद्रप्रभु मंडल विधान के दौरान जिनेन्द्र प्रभु का मंगल पाठ मंगलाष्टक स्त्रोत अभिषेक,शांतिधारा पाठ के मंत्रो का उच्चारण करते हुए अभिषेक शांतिधारा की गई। मांगलिक कार्यों हेतु सौधर्म इन्द्र का सौभाग्य जीवन बज को मिला।
संगीतमय चन्द्रप्रभु मंडल विधान के दौरान विधानाचार्यो और श्रद्धालुओं द्वारा सिर सिरेवार की गई भजनों की मनभावन प्रस्तुतियों पर श्रावक श्राविकाओं ने भाव विभोर हो नृत्य किया।
सायंकालीन सत्र में भगवान चन्द्रप्रभु की मंगल आरती की गई।
पंडित भुवनेश जैन ने कहा कि भगवान का मोक्षकल्याणक मनाते समय हमारे भाव भी उसी प्रकार होने चाहिए जिन भावों से भगवान को मोक्ष प्राप्त हुआ। हमे भी उनके समान ही संसार सागर से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति होवे।

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