अजमेर 21 अगस्त। देशभक्ति, स्वाभिमान की रक्षा के लिये सिंध के वीर सपूत रूपलो कोल्ही ने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। हिन्दुस्तान के विभाजन से पूर्व सिंध के स्वतंत्र आंदोलन में ब्रिटिश सत्ता से लोहा लेने वाले ओर सशस्त्र मुकाबला करने के कारण फांसी की सजा प्राप्त करने वाले राष्ट्रीय भक्त स्वतंत्र रूपलो कोल्ही के बलिदान दिवस पर पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश के नाम न्यौछावर होने वाले रूपलो कोल्ही ही हमारी विरासत है, जिन्होनें आजादी की लड़ाई में सम्मिलित होकर सर्व न्यौछावर कर दिया।
कार्यक्रम में विधायक अनिता भदेल ने कहा कि वीर शहीद रूपलो कोल्ही के बलिदान से हम प्रेरणा लेकर देश भक्ति का भाव युवा पीढी में जगाने का प्रयास करेंगे तो सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।
शहर भाजपा अध्यक्ष डॉ. प्रियशील हाडा ने कहा कि कोली समाज की ओर श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुये उनके बलिदान को घर धर तक पहुंचाने का कार्य किया जायेगा। स्मारक अब महापुरूषो ंके बलिदान का प्रेरणा केन्द्र बन गया है।
समारोह समिति के कवंलप्रकाश किशनानी ने कहा कि समिति की ओर से निरंतर स्मारक पर स्थापित मूर्तियों के जीवन को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिये प्रयासरत है और सभी का स्वागत करते हुये कहा कि आने वाले तीर्थयात्रियों व अतिथियों के दर्शन से प्रेरणा मिल रही है।
पूर्व उप-महापौर सम्पत सांखला ने सभी का आभार किया। मोहन तुलस्यिाणी ने हिंगलाज माता का पूजा अर्चना करवाई।
समारोह में कोली समाज के जिला अध्यक्ष लेखराज राजोरिया, कौशल चितौडिया, विमल वर्मा, वंदना खोरवाल, देवी सिंह, हरजीत सिंह, सुरेश खोरवाल, विनोद कुमार, रणजीत सिंह, कविता, आकाश राजा, गुलशन, भैरू गुर्जर, दुर्गाप्रसाद शर्मा, मोहन कोटवाणी, रमेश मेंघाणी, प्रदीप हीरानंदाणी, शिव प्रसाद गौतम सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।
स्वतंत्रता संग्राम के शहीद
सिन्ध के सपूत रूपलो कोल्ही
स्वतंत्रता संग्राम में शहीद रूपलो कोल्ही का जन्म सिन्ध की महान धरती पर 19वीं सदीं की दूसरी दहाई में धारपारकर जिले के नगरपारकर कोल्ही कबीले में हुआ। बाल्याव्यवस्था से ही शूरवीरता और मातृभूमि के प्रेम की भावना उनमें अर्न्तनिहित थी, उनका पालन पोषण कारूंझर पहाड़ों के कतारों के कबीले की रस्मो के मुताबिक खानदानी हथियारों तीर कमानो, भालो और घातक हथियारों को चलाने की महारत हासिल थी। जवानी में पहाड़ों और भट्टो में कई दरिंदों को मार गिराया वह बहादुर फुर्तीले और सुंदर जवान थे वे अपनी दिलेरी जवागर्दी के कारण अपने कबीले में और दूसरे कबीले में बड़े आदर की नजर सेदेखे जाते थे।
15 अप्रैल 1859 को रूपलो और उनके साथियों ने अंग्रेजों के खिलाफ झंडा बुलंद किया। थरपारकर के इन सुरमों ने नगरपारकर के हेड क्वार्टर पर जोरदार हमला किया टेलीग्राफ के तार तोड़े चारों और रास्ते बंद कर दिए सरकारी खजाने को लूटा अंग्रेज रेजीडेंट
जान बचाकर भागे। नगरपारकर के मुख्तियारकार डेयूमल इसकी जानकारी अपने अंग्रेज आकाओं के हैदराबाद में दी। हैदराबाद छावनी के आफिसर कर्नल इयुनिस के प्रतिनिधित्व में थर बलोची में एक विंग नगरपारकर की तरफ रवाना हुई कुछ तोपखाना कराची से रवाना हुआ। उन सभी फौजो की अगवानी कर्नल इयुनिस ने संभाली नगर पारकर हुर्रियत पसंदो को कुचलने के लिए 3 मई 1859 को हमला किया गया। प्यारे वतन सिंध के सिंधियों के पुराने हथियार अंग्रेजो की बंदूको के सामने टिक नहीं सके। इसलिए पहाड़ी किले चंदन गढ़ में बंद हो गए। कर्नल इयुनिस ने कुछ गद्दार सरदारोंकी मदद से चंदन गढ़ किले को तोपो से उड़ा दिया। जहां से कई बहादुर वीरों को गिरफ्तार किया गया और कुछ लोगों ने करूंझर पहाड़ो में जाकर पनाह ली। रूपलो कोल्ही उसके दौरान अपने साथियों को रोटी और खाने के सामान पहुंचाने लगापर किसी गद्ार ने यह जानकारी अंग्रेजों को दी और अंग्रेजों ने रुपलो कोल्ही व अन्य साथियों को घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
उनके गिरफ्तारी के बाद उनके हाथों पर तेल डाल कर दिए जलाए गए, प्रताड़ना दी गयी पर वफादार कोल्ही ने फिर भी फिरंगीयो को अपने दूसरे साथियों के बारे में कुछ नहीं बताया। रुपलो को जागीर की लालच भी दी अन्य प्रलोभन दिये गये पर फिर भी उसने अपने साथियों का पता ठिकाना नहीं बताया बाद में रूपलो कोल्ही और उनके साथियों पर बगावत का मुकदमा चलाया गया। वीर देश भक्त को मौत की सजा सुनाई गई। अंग्रेजों का साथ देने वालों को इनाम में जागिरे दी गई। धरती माता के इस सपूत रुपलो कोल्ही को 21 अगस्त 1859 को फांसी दी गई। उनके किए गए किरदार ने उनको हमेशा के लिए अमर कर दिया। ऐसे थे हमारे महान योद्धा, वीर, देशभक्त अंग्रेजो का डटकर मुकाबला किया व अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।
कल विद्यालयों में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन
कल 22 व 23 अगस्त को विद्यालयों में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है एवं 23 अगस्त को शाम 4 बजे ऑन लाइन विचार गोष्ठी व 25 अगस्त को मुख्य कार्यक्रम प्रातः 9 बजे स्मारक पर सांस्कृतिक व पुरस्कार वितरण कार्यक्रम अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम अजमेर, भारतीय सिन्धु सभा, पर्यटन विभाग, सिन्धु शोध पीठ, म.द.स.विश्वविद्यालय, भारतीय इतिहास संकल्न समिति के संयुक्त तत्वावधान में होगा।
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