श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ अंतर्गत पुष्कर रोड़ स्थित श्री कलापूर्ण सूरि आराधना भवन प्रांगण में जिनवाणी प्रवचन में मुनि श्री मुनीश्वर विजय महाराज ने फरमाया कि परोपकार पांच प्रकार के होते है प्रथम – अहंकार भाव होने से परोपकार – अपने अहंकार को बढ़ावा देने के लिये, दूसरा – पदार्थ की अधिकता होने से किया हुआ उपकार, तीसरा – अत्याग्रह से किया हुआ परोपकार-यानि किसी की प्रेरणा अथवा आग्रह से किया हुआ परोपकार, चौथा-आनन्द भाव से किया गया परोपकार – मात्र आनन्द की अनुभूति से किया गया परोपकार, पाँचवा-अहोभाव से किया हुआ परोपकार-जीव मात्र के प्रति रहा हुआ अहोभाव, सद्भाव इस परोपकार का मूल कारण है, परोपकार करने वाले में मोक्ष प्राप्ति की पात्रता विकसित होती है।
रिखबचंद सचेती
मंत्री