माघ मेले में शंकराचार्य जी पर अत्याचार, संतों से मारपीट—राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

धर्माचार्य अपमानित, आस्था आहत, प्रयागराज माघ मेले में शर्मनाक घटनाक्रम- जयपाल

अजमेर, 27 जनवरी2026 । प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान महामहिम शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी (शंकराचार्य पीठ) के साथ हुए कथित धार्मिक अत्याचार, अभद्र व्यवहार एवं उन्हें संगम स्नान से वंचित किए जाने के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत गणराज्य के नाम एक जनहितार्थ ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर अजमेर के माध्यम से राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया.
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल ने प्रेस को जारी बयान में बताया गया कि हिंदू धर्म की चार प्रमुख शंकराचार्य पीठों में से एक के पीठाधीश महामहिम शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज में अपने शिविर में संतों एवं शिष्यों के साथ प्रवासरत थे। वे धर्म रक्षा, गौ-रक्षा एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण हेतु धार्मिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।

दिनांक 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) एवं 23 जनवरी 2026 (बसंत पंचमी) को संगम स्नान के दौरान उत्तर प्रदेश शासन-प्रशासन के अधीन बलों द्वारा शंकराचार्य जी के शिष्यों, संतों एवं साधुओं के साथ लाठीचार्ज, धक्का-मुक्की एवं अभद्र व्यवहार किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यहां तक कि वृद्ध संतों एवं बटुक शिष्यों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसे धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया गया।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का भी उल्लंघन हैं। वर्तमान में महामहिम शंकराचार्य जी प्रयागराज के गंगा-संगम तट पर शांतिपूर्ण धरने पर विराजमान हैं, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय से मांग की गई है कि शंकराचार्य जी के धरने को सम्मानपूर्वक समाप्त कराया जाए, उन्हें एवं उनके साथ उपस्थित संतों-शिष्यों को विधिवत संगम स्नान कराया जाए तथा भविष्य में किसी भी धर्मगुरु, पीठाधीश या संत समाज के साथ इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट एवं कठोर निर्देश जारी किए जाएं।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या संप्रदाय का नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की धार्मिक गरिमा और आस्था से जुड़ा हुआ है, जिस पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से हस्तक्षेप अपेक्षित है।

ज्ञापन देंगे वालों में डेयरी सदर रामचंद्र चौधरी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम द्रोपदी कोली, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र चौधरी, दिनेश शर्मा, अशोक जैन, गुलाम मुस्तफा, भूपेंद्र सिंह राठौड़, विवेक पाराशर, ईश्वर टहलयानी, शैलेन्द्र अग्रवाल, वाहिद मोहम्मद , लक्ष्मी बुंदेल, वसीम खान, मनीष चौरसिया, कुशाल कोमल, बलराम शर्मा, मोहित मल्होत्रा, अंकित घारू, अनुपम शर्मा, प्रेम सिंह गौड़, नवीन कच्छावा, कांति कुमार शर्मा, विजय नागौरा, संजीव खींची, दीनदयाल शर्मा, गणेश चौहान, चंद्रेश सुनिया, सोना धनवानी, सुमित मित्तल, लोकेश शर्मा , पूसा गुर्जर, कौशल चित्तौड़िया, राजेश गोढ़ीवाल, मनीष सैन, अतुल माहेश्वरी, मुकेश सबलानिया, विक्की सिवासिया, शैलेश गुप्ता, सागर मीणा, राजकुमार वर्मा, सुरजीत कपूर, शहनाज, राजेश गोरा भरत, धोलखड़िया, पीयूष सुराणा, पुनीत सांखला एवं समस्त कांग्रेस जन उपस्थित रहे|

कमल वर्मा,
प्रवक्ता,
शहर जिला कांग्रेस कमेटी, अजमेर

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