एमडीएसयू में नव-पीएच.डी. शोधार्थियों हेतु 15 दिवसीय कोर्स वर्क का आयोजन

शोध प्रविधि व डिजिटल अनुसंधान पर विशेष फोकस

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय परिसर में नव प्रवेशित पी.एच.डी. शोधार्थियों के लिए 15 दिवसीय कोर्स वर्क का आयोजन शोध अनुभाग द्वारा किया जा रहा है। यह कोर्स वर्क दिनांक 28 जनवरी से 13 फरवरी तक आयोजित होगा।

‘शोध प्रविधि एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग’ आधारित यह कोर्स वर्क वाणिज्य, प्रबन्ध अध्ययन, शिक्षा शास्त्र एवं शारीरिक शिक्षा संकाय के कुल 91 नव प्रवेशित शोधार्थियों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसमें आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबन्ध, लेखांकन एवं व्यावसायिक सांख्यिकी, व्यावसायिक प्रबंधन, प्रबन्ध अध्ययन, शिक्षा शास्त्र तथा शारीरिक शिक्षा विषयों के शोधार्थी सम्मिलित होंगे।

शोध निदेशक प्रोफेसर सुब्रोतो दत्ता एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अश्विनी तिवारी ने बताया कि इस कोर्स वर्क के अंतर्गत विभिन्न विषयों के अनुभवी शोध पर्यवेक्षक एवं विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे। कोर्स वर्क के माध्यम से शोधार्थियों को शोध प्रविधि, शोध के विभिन्न प्रकार, मापन एवं चयन, आंकड़ों का संग्रहण, शोध प्रस्ताव लेखन, सूचना संग्रह, कंप्यूटर तकनीकों के उपयोग, शोध शुचिता एवं शैक्षणिक सत्यनिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराया जाएगा।

इसके साथ ही यू.जी.सी. इनफ्लिबनेट, गांधीनगर (गुजरात) के अंतर्गत संचालित विभिन्न प्रोजेक्ट—शोध चक्र, शोध गंगा, शोध गंगोत्री, शोध शुद्धि तथा ‘वन नेशन, वन सब्स्क्रिप्शन’—पर भी व्याख्यान एवं ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण आयोजित किए जाएंगे।

इस अवसर पर डॉ. आशीष पारीक ने शोधार्थियों को उच्च स्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य के लिए प्रेरित किया। कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल ने सभी शोधार्थियों को कोर्स वर्क हेतु शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

उल्लेखनीय है कि महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय राजस्थान राज्य का प्रथम विश्वविद्यालय है, जिसने नवीन ‘शोध चक्र प्रोजेक्ट’ को आरम्भ किया है। इस प्रोजेक्ट का अनुबंध 2 दिसम्बर 2025 को कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल एवं कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा द्वारा यू.जी.सी. इनफ्लिबनेट केन्द्र, गांधीनगर, गुजरात के साथ हस्ताक्षरित किया गया था। यह प्रोजेक्ट शोधार्थियों को ऑनलाइन रिसर्च लाइफ साइकिल उपलब्ध कराता है, जिससे शोध पर्यवेक्षक शोध कार्य की प्रगति ऑनलाइन देख सकेंगे तथा शोध अनुभाग शोधार्थी एवं पर्यवेक्षक के साथ संवाद, निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग जैसे कार्य प्रभावी रूप से कर सकेगा।

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