टेंडर के कारण लाखों विधार्थियो व हजारों शिक्षकों का भविष्य प्रभावित, प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट

70 से अधिक विधायक- मंत्री लिख चुके है व्यावसायिक शिक्षा को विभाग में समायोजन हेतु मुख्यमंत्री के नाम डिजायर
अजमेर :राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा समग्र शिक्षा योजना अन्तर्गत व्यावसायिक शिक्षा योजना का बंटाधार हो रहा है सरकार कि ठेका निविदा व्यवस्था से विधार्थियो व व्यावसायिक शिक्षकों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राजस्थान में 2527 व्यावसायिक शिक्षकों को लगभग 2 वर्ष बाद अप्रैल माह में नियुक्ति मिली तो पहले से कार्यरत लगभग 2000 वोकेशनल ट्रेनर  का 14 माह तक का वेतन बकाया चल रहा है।स्कूल शिक्षा परिषद ने व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता को भुगतान जारी करने के आदेश तो जारी कर दिए है परन्तु वो खोखले साबित हो रहे है आदेश जारी किए जाने के बावजूद कई निजी प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) कंपनियों ने आदेश  पालना नहीं की है। इससे कई प्रशिक्षक आज भी  बकाया मानदेय का इंतजार कर रहे हैं।
जिला अध्यक्ष आर एन ने बताया कि सरकार कि टेंडर प्रकिया के कारण विधार्थियो को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है साथ ही व्यावसायिक शिक्षक स्वयं भुगतान को तरस रहे है।
दूसरे राज्यों में व्यावसायिक शिक्षा का संचालन सीधे विभाग द्वारा किया जा रहा है जिससे विधार्थियो कि शिक्षा प्रभावित नहीं होती है और योजना का सही क्रियान्वयन हो पाता है.
सरकार द्वारा टेंडर करने से 8-12 महीने का समय ख़राब हो जाता है जिससे हर साल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है
 30 जून से हजारों व्यावसायिक विद्यालय में नहीं होंगे प्रशिक्षक
राजस्थान कि लगभग  2000 व्यावसायिक विद्यालयों के प्रशिक्षकों का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहा है जिससे वहाँ व्यावसायिक पढ़ाई ठप हो जाएगी
वेतन भुगतान में भी गड़बड़ी
प्रशिक्षकों का आरोप है कि मई 2026 तक का बकाया मानदेय देने के निर्देश भी जारी हुए थे, लेकिन कुछ प्रदाता ने भुगतान तो किया परन्तु अधिकतर ने भुगतान को लटका दिया है कई प्रदाता का 8-14 महीनो का वेतन बकाया है इससे कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
कंपनियों से संपर्क करने पर नहीं मिल रहा जवाब
प्रभावित प्रशिक्षकों का कहना है कि वे लगातार संबंधित कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। कई मामलों में कंपनियों द्वारा कोई जवाब तक नहीं दिया जा रहा इस कारण कई व्यावसायिक शिक्षक आत्महत्या का प्रयास भी कर चुके है।
इन कंपनियों का नाम आ रहा सामने
इस योजना में कार्यरत कुछ निजी प्रशिक्षण प्रदाता जिन पर प्रशिक्षकों ने आदेश की पालना नहीं करने के आरोप लगाए हैं:
SIBIN Learning Centre Private Limited
VLCC Healthcare Limited
Amigos Solutions Private Limited
Kamal Engineers & Contractors Pvt Ltd
Orion Edutech Pvt Ltd
Indian Institute of Skill Development (IISD)
Times Centre for Learning Limited
Highline Educare India Pvt Ltd
विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी खतरा
सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ रहे विद्यार्थियों की व्यावसायिक शिक्षा इन प्रशिक्षकों पर निर्भर है। यदि समय पर नियुक्तियां नहीं हुई तो विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल स्किल शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
लाखों करोड़ो रूपये का बजट लापरवाही में
व्यावसायिक शिक्षा में केंद्र सरकार द्वारा लाखों करोड़ो रूपये का बजट मिलता है जिसका सही से इस्तेमाल नहीं करने से व्यर्थ जा सकते है.
सभी व्यावसायिक विद्यालयों को प्रती वर्ष 3-4 लाख रु का बजट मिलता है लेकिन व्यावसायिक प्रशिक्षक नहीं होने से लीलापोती हो रही है।
जिम्मेदार कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
जब परिषद ने आदेश जारी कर दिया तो उसकी पालना क्यों नहीं हो रही?
सभी योग्य प्रशिक्षकों को समान अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा?
बकाया वेतन का पूरा भुगतान क्यों नहीं हुआ?
आदेश की अवहेलना करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी?
जिला शिक्षा अधिकारी यह बोल कर पल्ला झाड देते है कि आप कम्पनियो के कर्मचारी हो, कंपनी यह बोलती है कि सरकार बजट नहीं देती और मानदेय ज्यादा जरूरी है तो नौकरी छोड़ दो।
प्रशिक्षकों की मांग
प्रभावित प्रशिक्षकों ने राज्य सरकार और राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर:
सभी पात्र प्रशिक्षकों को तुरंत नियुक्ति दी जाए
बकाया वेतन का भुगतान कराया जाए
चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
दोषी कंपनियों पर कार्रवाई की जाए।
हरियाणा असम सहित अन्य राज्यों कि तरह बने पॉलिसी
आर एन रावत ने बताया कि हरियाणा असम कि तरह पॉलिसी बनाने से व्यावसायिक शिक्षा का सही क्रियान्वयन हो पायेगा, विधार्थियो व वोकेशनल टीचरों का शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होगा, बजट का सही क्रियान्वयन हो सकेगा.
 कौशल के गुणात्मक, प्रायोगिक,हेंड प्रैक्टिस, हुनर का विकास हो पायेगा।
इस हेतु 70 से ज्यादा विधायक मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को डिज़ायर लिख व्यावसायिक शिक्षा को विभाग में लेने का अनुशंसा  पत्र लिखा है।

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