कारगिल शहीदों के आश्रित विद्यार्थियों को परीक्षा एवं शिक्षण शुल्क से पूर्ण छूट
वीर शहीदों के अदम्य साहस और बलिदान को किया नमन, राष्ट्र निर्माण हेतु कर्तव्यनिष्ठा का लिया संकल्प
अजमेर, 25 जुलाई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में शनिवार को कारगिल शौर्य दिवस राष्ट्रभक्ति, गौरव और श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीदों के अद्वितीय शौर्य, अदम्य साहस एवं सर्वोच्च बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण मानवीय एवं राष्ट्रहितैषी घोषणा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत सभी कारगिल शहीदों के आश्रित विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क एवं शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) से पूर्णतः मुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के प्रति विश्वविद्यालय परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि एवं कृतज्ञता का प्रतीक है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि कारगिल विजय केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारत की अदम्य राष्ट्रीय चेतना, अटूट संकल्प और असाधारण वीरता का जीवंत प्रतीक है। हमारे सैनिकों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में अपने प्राणों की आहुति देकर यह सिद्ध किया कि राष्ट्र की रक्षा से बढ़कर कोई कर्तव्य नहीं है। उनका त्याग और बलिदान सदैव देशवासियों तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि “राष्ट्र के प्रति हमारा दायित्व हमारी संस्था के प्रति दायित्व के ईमानदार निर्वहन से प्रारम्भ होता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्यस्थल, अपने उत्तरदायित्व और अपने संस्थान के प्रति निष्ठा, ईमानदारी तथा उत्कृष्टता का परिचय दे, तो वही राष्ट्र निर्माण की सबसे सुदृढ़ आधारशिला बनता है।” उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान किया कि प्रत्येक अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाने का संकल्प लेकर कार्य करे।
कुलगुरु ने कहा कि आज आवश्यकता केवल शहीदों को स्मरण करने की नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की है। अनुशासन, समर्पण, परिश्रम, ईमानदारी तथा “राष्ट्र प्रथम” की भावना ही कारगिल के वीरों का वास्तविक संदेश है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित करे।
युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है जो समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझें और उनके निर्वहन में अग्रणी भूमिका निभाएँ। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चरित्र, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अद्वितीय पराक्रम एवं सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करते हुए सभी उपस्थितजनों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक, प्रबंध मंडल के सदस्य, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, कुलपति सचिवालय के अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने कारगिल के वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सूरजमल राव ने किया तथा अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय गौरव का वातावरण बना रहा।
मुख्य आकर्षण (Highlight)
कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की घोषणा:
“महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में अध्ययनरत सभी कारगिल शहीदों के आश्रित विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क एवं शिक्षण शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया जाएगा। यह निर्णय राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के प्रति विश्वविद्यालय परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि है।”