भाजपा की आपत्ति या महापौर चुनाव की सियासी साजिश

किरण गढ़वाल के खिलाफ आपत्ति पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव कैलाश झालीवाल का पलटवार—कोर्ट में विचाराधीन भूमि विवाद को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप
अजमेर। नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के नामांकन पर भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई बकाया राशि की आपत्ति ने अजमेर की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा प्रत्याशी की ओर से किरण गढ़वाल से जुड़े गढ़वाल पैलेस पर करीब 18 लाख रुपये की निगम राशि बकाया होने का दावा किया गया है।
कैलाश झालीवाल का आरोप है कि जिस संपत्ति/भूमि को लेकर बकाया राशि का विवाद खड़ा किया जा रहा था, उससे जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उस पर हाईकोर्ट से स्थगन आदेश होने का दावा किया जा रहा था। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे विवादित मामले में राशि जमा कराने का दबाव बनाना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि महापौर चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश थी ।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि यदि विवादित राशि को स्वीकार कर जमा करा दिया जाता है तो उससे भूमि संबंधी चल रहे मुकदमे पर गंभीर कानूनी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि किरण गढ़वाल पक्ष पूरे मामले को न्यायिक प्रक्रिया के तहत देखे जाने की बात कह रहा था ।
कांग्रेस का गंभीर आरोप—अधिकारियों पर दबाव क्यों?
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा से जुड़े प्रभावशाली नेता और सत्ता पक्ष के लोग अधिकारियों पर अपनी पसंद के अनुरूप फैसला कराने का दबाव बना रहे थे ।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हुई है। कांग्रेस नेताओं का सवाल है कि अगर मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो प्रशासनिक स्तर पर इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या किसी उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के लिए पुराने अथवा विवादित संपत्ति मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा था ?
आज नामांकन जांच के दौरान निगम कार्यालय में दोनों पक्षों के समर्थकों के पहुंचने और नारेबाजी के बाद भारी पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया।
कांग्रेस ने कहा—फैसला कानून करेगा, सत्ता का दबाव नहीं
कांग्रेस का कहना है कि किरण गढ़वाल अपने पक्ष को लेकर कानूनी दस्तावेजों और न्यायालयीन प्रक्रिया पर भरोसा कर रही हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक चुनाव में किसी प्रत्याशी के नामांकन को प्रशासनिक दबाव के जरिए प्रभावित करने की कोशिश लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।
अजमेर नगर निगम में इस बार मुकाबला बेहद करीबी है। 80 वार्डों में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में महापौर चुनाव से पहले नामांकन विवाद ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। अब असली सवाल—कानून की चलेगी या दबाव की?
महापौर चुनाव से ठीक पहले उठे इस विवाद ने अजमेर की जनता के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी प्रत्याशी की राजनीतिक किस्मत का फैसला चुनावी मैदान में होगा या प्रशासनिक आपत्तियों और दबाव के जरिए?
कांग्रेस ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक फैसला करने की मांग की थी । वहीं भाजपा की ओर से दर्ज आपत्ति को निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दी। सोचने वाली बात यह है कि आखिर इतना समय लगा क्यों।
अजमेर की जनता अब पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी । सवाल सिर्फ किरण गढ़वाल के नामांकन का नहीं, बल्कि यह भी है कि नगर निगम चुनाव में प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी रही ।
कैलाश झालीवाल
सचिव
प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान
9351718975

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