किशनगढ़ के सिलोरा में 1999 और 2013 में मुक्त कराए गए श्रमिकों ने बनाया अपना साझा मंच
अजमेर 22 अक्टूबर 2026 जो कभी बंधुआ मजदूरी की बेड़ियों में थे, अब वे अपने समुदाय की आवाज़ बनेंगे। अजमेर जिले की किशनगढ़ पंचायत समिति के सिलोरा में 22 अक्टूबर 2026 को ‘नई उम्मीद लोकल चैप्टर‘ की शुरुआत हुई। इस पहल का उद्देश्य मुक्त श्रमिकों को संगठित करना है, ताकि वे अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़ सकें, अपनी समस्याएं सीधे सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचा सकें और समाधान के लिए सामूहिक नेतृत्व विकसित करें।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मोनिका सहायक लेखा अधिकारी रहीं। राजस्थान महिला कल्याण मंडल, चाचियावास, अजमेर की ओर से गरिमा राठौड़ ने उनका स्वागत किया। इंटरनेशनल जस्टिस मिशन टीम से विजय तथा राजस्थान महिला कल्याण मंडल की टीम के सदस्य भी मौजूद रहे। जिला समन्वयक रमेश सिंह , सुभाष चौधरी , सोनू , पुष्पा वैष्णव, पूजा राजपुरोहित और राहुल गुर्जर सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में 24 लोग शामिल हुए, जो बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाए गए सर्वाइवर थे।
मुक्ति से नेतृत्व तक का सफ़र : कार्यक्रम में वर्ष 1999 में बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए श्रमिक परिवार शामिल हुए। मुक्ति के बाद पुनर्वास में उन्हें सहायता दी गई थी, और जिला प्रशासन व तत्कालीन जिला कलेक्टर के सहयोग से भूमि के पट्टे भी मिले थे। सिलोरा में बसी इन परिवारों की बस्ती आज ‘बी.एल. कॉलोनी‘ के नाम से जानी जाती है। वर्ष 2011 में ईंट-भट्टों से मुक्त कराए गए श्रमिक भी इस मंच पर साथ आए। अलग-अलग समय पर मुक्त हुए श्रमिकों की यह साझी मौजूदगी बताती है कि उनके अनुभवों, समस्याओं और अधिकारों के लिए एक साझा मंच की ज़रूरत कितनी गहरी है।
विजय जी ने लोकल चैप्टर की ज़रूरत, महत्व और इसके संचालन में श्रमिकों की भूमिका समझाई। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर संगठित मंच होने से श्रमिक अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं, आपसी सहयोग से समाधान खोज सकते हैं और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दे अधिकारियों व सरकारी विभागों के सामने खुद रख सकते हैं।
यह पहल मुक्त बंधुआ मजदूरों को अपने समुदाय का नेतृत्व करने का अवसर देने की दिशा में एक अहम कदम है। इसका लक्ष्य श्रमिकों के बीच से ही स्थानीय नेतृत्व तैयार करना है, ताकि वे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ पूरे समुदाय की चुनौतियों के समाधान के लिए भी आगे आएं।
लोकल चैप्टर के माध्यम से श्रमिकों को के लिए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना, संगठनात्मक क्षमता विकसित करना, सरकारी योजनाओं और सहायता तक पहुंच बनाना, प्रशासन के सामने अपनी बात खुद रखना
इस पहल का मूल संदेश साफ़ है: मुक्त श्रमिक दूसरों पर निर्भर न रहें, बल्कि संगठित होकर अपने हक़ की लड़ाई खुद लड़ें और अपने समुदाय की अगुवाई करें। अधिकारों की आवाज़ बनें – लोकल चैप्टर के साथ चलें।”