राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने वाले प्रशिक्षक लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विभिन्न एजेंसियों के अंतर्गत कार्यरत प्रशिक्षकों का 3 से 15 माह तक का मानदेय बकाया होने से प्रदेश के लगभग 5,000 प्रशिक्षक परिवार प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए रक्षाबंधन का त्योहार भी बिना वेतन के बीत गया। अब दीपावली नजदीक आने के साथ ही समय पर मानदेय मिलने की उम्मीद भी धूमिल होती नजर आ रही है। प्रशिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण घरेलू खर्च, बच्चों की फीस, किस्तों और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
प्रशिक्षकों के अनुसार, ICA, LNJ, IISD, HWO, SIBIN, Mind Leader, Orion Edutech एवं i-Daksha सहित विभिन्न एजेंसियों के अंतर्गत कार्यरत प्रशिक्षकों का मानदेय अलग-अलग अवधि से लंबित है। प्रशिक्षकों का आरोप है कि भुगतान के संबंध में विभागीय निर्देश जारी होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष आर एन रावत ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा देने वाले प्रशिक्षक स्वयं आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर भी मानदेय नहीं मिला और अब दीपावली पर भी भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आखिर प्रशिक्षक अपने परिवार की जिम्मेदारियां कैसे निभाएं?
पवन गर्ग ने राज्य सरकार एवं संबंधित विभाग से मांग की कि सभी लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करवाया जाए, भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में प्रत्येक माह समय पर वेतन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षकों की आर्थिक समस्याओं का समाधान आवश्यक है। सरकार को दीपावली से पहले लंबित मानदेय जारी करवाकर हजारों प्रशिक्षक परिवारों को राहत प्रदान करनी चाहिए।
मुख्य मांग: दीपावली से पहले बकाया मानदेय का भुगतान, संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करना तथा भविष्य में समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना।