साहित्यायन फाउंडेशन ने साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए किया सम्मानित
मुंबई के आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्टस एकेडमी में समारोह का आयोजन
पुरस्कार के तौर पर मिली ढाई लाख की राशि, सम्मान-पत्र और मोमेंटो
मुजफ्फरपुर. शहर की लेखिका डॉ भावना को वर्ष 2026 के लिए मुंबई के साहित्यायन फाउंडेशन का नंदलाल पाठक साहित्य पुरस्कार दिया गया. मुंबई के आइएनटी आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्टस एकेडमी में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया. पुरस्कार के तौर पर उन्हें ढाई लाख की राशि, सम्मान-पत्र और मोमेंटो दिया गया. फाउंडेशन ने इनका चयन साहित्य में उत्कृष्ट योगदान, साहित्यिक साधना और उपलब्धियों के आधार पर किया था. डॉ भावना को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. बिहार सरकार द्वारा कविता और आलोचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु उन्हें ‘महादेवी वर्मा पुरस्कार’प्रदान सहित ‘अंबिका प्रसाद दिव्य अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘राजभाषा पांडुलिप पुरस्कार, ‘दुष्यंत कुमार रजत स्मृति सम्मान’, अपराजिता सम्मान, ‘लिच्छवी महोत्सव सम्मान, ‘तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान, ‘उर्मिला कॉल सम्मान, ‘सृजन लोक युवा कविता सम्मान, ‘गजलकार दुष्यंत कुमार सम्मान, ‘अनिता-शिव अंतर्राष्ट्रीय बज्जिका संबंध सेतु सम्मान’और ‘साहित्य सर्जक सम्मान’ प्राप्त हो चुके हैं. डॉ भावना को यह सम्मान मिलने पर अनिरुद्ध सिन्हा, राहुल शिवाय, प्रोफेसर डॉ नवैदुल हक, डॉ अभय नंदा श्रीवास्तव, डॉ जयनाथ, डॉ प्रियरंजन कुमार, डॉ जियाउर रहमान जाफरी और डॉ अविनाश भारती ने बधाई दी है.
गजल, कविता, आलोचना और संपादन में 26 पुस्तकें प्रकाशित
डॉ. भावना समकालीन हिंदी ग़ज़ल, कविता, आलोचना और बज्जिका साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाकार हैं. उनकी रचनात्मक यात्रा अत्यंत व्यापक और बहुआयामी है. उनके प्रकाशित ग़ज़ल-संग्रहों में ‘अक्स कोई तुम-सा, ‘शब्दों की कीमत’, ‘चुप्पियों के बीच’, ‘मेरी माँ में बसी है…’, ‘धुंध में धूप’ तथा ‘चिड़ियों की दावेदारी’ विशेष रूप से चर्चित हैं. ‘सपनों को मरने मत देना’उनका महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह है. आलोचना के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है. ‘हिंदी ग़ज़ल के बढ़ते आयामश्, ‘हिंदी ग़ज़ल भाषा और मूल्यांकन’, ‘कसौटी पर कृतियां’, ‘बदलते परिवेश में हिंदी ग़ज़ल’, ‘हिंदी गजल दृष्टि और संकल्पनाएं’हिन्दी ग़ज़ल का स्त्री स्वर और ‘हिंदी गजल के युगबोध’ जैसी पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने हिंदी गजल की आलोचनात्मक परंपरा को समृद्ध किया है. बज्जिका भाषा में उनका कविता-संग्रह ‘हम्मर लेहु तोहर देह’तथा उपन्यास ‘लाडो’भी अत्यंत चर्चित रहे हैं. रसायन-शास्त्र विषय पर उनकी पुस्तक ‘सम कॉम्प्लेक्सिस ऑफ बेंज़ोथियाज़ोल डेरिवेटिव भी प्रकाशित है. रचनात्मक लेखन के साथ-साथ संपादन के क्षेत्र में भी डॉ. भावना का उल्लेखनीय योगदान है. उन्होंने ‘कविता के दरवेश : दरवेश भारती’, ‘इक्कीसवीं सदी की गजलें’, ‘यह समय कुछ खल रहा है’, ‘संकल्प से सिद्धि तक’, ‘समकालीन ग़ज़ल के हस्ताक्षर’, ‘हमन है इश्क़ मस्ताना’, ‘अग्निपथ पर भी टहल कर देखता हूँ मैं और ‘ज़ख़्मों का उजाला’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया है. वह हिंदी साहित्य की इ-साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘आंच’का संपादन भी कर रही हैं.
उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यलय के एमए पाठ्यक्रम में रचनाएं शामिल
डॉ. भावना की साहित्यिक उपलब्धियाँ अत्यंत उल्लेखनीय हैं. उनकी रचनाशीलता और साहित्यिक योगदान को देखते हुए उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगा.व के एम. (हिंदी) द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में सम्मिलित पुस्तक ‘हिन्दी गजल के पंचरत्न’में उन्हें गजलकार के रूप में स्थान दिया गया है. उनके साहित्य और व्यक्तित्व पर केंद्रित अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं. ‘डॉ. भावना की ग़ज़ल धर्मिता : विविध आयाम और मूल्यांकन’का संपादन प्रो डॉ माधवी ने किया है, जबकि ‘डॉ भावना का ग़ज़ल साहित्य : चिंतन और दृष्टि’के संपादक डॉ जियाउर रहमान जाफ़री हैं. ‘डॉ भावना के चुने हुए शेर’का संपादन हरेराम समीप ने किया है. ‘डॉ भावना की प्रतिनिधि ग़ज़लें’ के संपादक प्रो डॉ विनय कुमार शुक्ल हैं और ‘डॉ भावना के चुनींदा अशआर’का संपादन विजय कुमार ने किया है.