जहॅा राजा और प्रजा एक साथ बैठते है उसी का नाम राम राज्य है
विश्व हिंदू परिषद अजयमेरू महानगर द्वारा विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतरगर्त चल रही संगीतमय राम कथा के आठवें दिन कथा वाचक राष्ट्रीय संत परम पूज्ज दिव्य मुरारी बापू ने आज अपने श्रीमुख से भगवान के राम वनवास केवट प्रसंग भरत चरित्र प्रसंग का चित्रण किया।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रचार प्रमुख शरद गोयल ने बताया की पूजा अर्चना के पश्चात संत श्री आज के प्रसंग में महाराज दशरथ भगवान राम का राज्य अभिषेक करना चाहते है, लेकिन देवताओं की प्रेरणा से सरस्वति माता ने मथंरा की बुद्वि बिगाड दी, मथंरा ने महारानी कैकई कि बुद्वि बिगाड दी। जिससे महारानी कैकई ने भगवान के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। इस प्रसंग मे गौस्वामी जी ने संगत को महत्तव दिया है। हमारे जीवन मे संगत का बहुत असर पडता है, हमें जैसा बनने की इच्छा है वैसे का संगत करे। महारानी कैकई ने मंथरा का संगत किया इसलिए भगवान अयोध्या छोड के चले गये। संगत से हमारे जीवन में भी बडे से बडा संकट आ सकता है।
केवट प्रंसग से भगवान राम राम राज्य की नीवं रखते है, राम राज्य का मतलब है, जहॅा किसी प्रकार का भेद भाव न हो । भगवान कौल भील लोगो से गले मिले। गौस्वामी तुलसी दास जी महाराज कहते है कि यही राम राज्य की नींव भगवान ने रखी। जहॅा राजा और प्रजा एक साथ बैठते है उसी का नाम राम राज्य है ।
भरत चरित्र में बन्धु प्रेम पर गौस्वामी जी ने प्रकाश डाला। रामायण की कथा हमारे कत्र्तव्य का बोध कराती है प्रेरणा देती है कत्र्तव्य पालन से भगवान में स्वत रूची उत्पन्न होती है। जैसे हमारा सर्व विधि कल्याण होता है। धर्म शास्त्र में कत्र्तव्य पालन के लिए प्रेरणा दी गई है । और सभी सन्तों ने भी कत्र्तव्य पालन करते हुये भगवान की अराधना करने को कहा है। रामायण में त्याग की भवना सिखाई गई। जहा त्याग है वही रामायण है जहा स्वार्थ है, वही कलंह लडाई झगडा है। जहा सब कुछ तुम्हारा है वही रामायण है। जहा सब कुछ मेरा है वहा कलंह व संकट है। हमारा जीवन रामायण जैसा होना चाहिए।
कथा के व्यवस्थापक श्री श्री 108 श्री घनश्यामदास जी महाराज ने बताया कल कथा मे श्री राम लक्ष्मण एवं माता सीता के वनवास सिता हरण एंव सुन्दर काडं का चित्रण किया जाएगा। रामायण एवं संत श्री की पूजा आज के जजमान श्री डा॰ निरज खुगर के द्वारा की गई। प्रशाद वितरण श्री गोपाल पंवार एंव श्री नरेन्द्र वैष्णव के द्वारा किया गया। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आनंद अरोड़ा महानगर मंत्री शशिप्रकाश इन्दोरिया श्री सुनीलदत्त जैन सर्वेश्वर अग्रवाल श्री ओमप्रकाश सोमानी श्री ओम जी मंगल श्री किशन जी बंसल श्री विष्णु जी ममता मिष्ठान श्री गोविंद जादम श्री आनंद सिंह राजावत श्री अशोक मेघवाल लेखराज सिंह श्रीमती अल्का गौड़ सोहनलाल बरूपाल श्री सुभाष माहेश्वरी प्रभा गुप्ता श्री देवीलाल श्री सम्मान सिंह श्याम बिहारी शर्मा कैलाश भाटी नरेंद्र चंडक सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम मे रोजाना हजारो श्रद्धालु कथा सुनने आ रहे है। यह कथा दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक विभिन्न अध्यायों के माध्यम से चलेंगी, जिसमे प्रतिदिन रामायण के अलग अलग सोपानों पर संगीतमय कथा का वाचन होगा। 21 तारीख को दोपहर 12.15 बजे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। जिसमे देश भर के अनैक संत महात्मा उपस्थित रहेंगे।
प्रचार प्रमुख
शरद गोयल 9414002132