लाइफ स्टाइट व डाइट पर डिटेल काउंसलिंग जरूरी

मित्तल हॉस्पिटल लगा निःशुल्क गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजी परामर्श शिविर
बच्चों व बड़ों में लीवर, आँत, पेनक्रियास, गाॅल ब्लेडर व पेट संबंधित रोगियों ने पाया लाभ

अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, मेडता सिटी, नागौर से आए अनेक रोगी
अजमेर,21 अक्टूबर। मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में रविवार, 21 अक्टूबर को लगे निःशुल्क गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजी परामर्श शिविर में अनेक बच्चों व बड़ों ने लाभ उठाया। शिविर में लीवर, आँत, पेनक्रियास, गाॅल ब्लेडर व पेट संबंधित सभी तरह के रोगों से पीड़ित निःशुल्क परामर्श लाभ लेने पहुंचे। इनमें अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, मेड़तासिटी, नागौर से आए पुरुष, महिलाएं, युवा व बच्चे एवं वृद्ध शामिल थे।
मित्तल हाॅस्पिटल के गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजिस्ट डाॅ मनोज कुमार व पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजिस्ट डाॅ प्रियंका उदावत ने रोगियों को निःशुल्क परामर्श दिया।
शिविर के दौरान जो महत्वपूर्ण बात उभर कर सामने आई उसमें बच्चों व बड़ों में लाइफ स्टाइल व डाइट को लेकर डिटेल कांउसलिंग की जरूरत महसूस की गई। दोनों ही गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजिस्ट ने अनेक रोगियों की पेट, आंत व लीवर संबंधित समस्याओं को जानने के बाद बताया कि सही डाइट के साथ सही उपचार नहीं करना ही लोगों में पेट, आंत, लीवर, पेनक्रियास, गाॅल ब्लेडर संबंधित बीमारियों के बढ़ने की वजह है।
गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजिस्ट डाॅ मनोज कुमार ने बताया कि युवा एवं वृद्ध स्त्रियों में गैस और कब्ज की शिकायत से पीड़ित, पेट में दर्द रहने, बार-बार उल्टी आने, खाना नहीं पचने की बीमारियों से ग्रसित शिविर में परामर्श लाभ लेने पहुंचे। उन्होंने बताया कि बहुत से ऐसे रोगी भी शिविर में निःशुल्क परामर्श लाभ लेने पहुंचे जिनका पूर्व में उपचार चल रहा था और जांचें भी कराई जा चुकी थीं, अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाने के कारण रोगियों ने निःशुल्क शिविर का लाभ उठाने की दृष्टि से परामर्श प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि कुछ रोगियों को पेट व आंत की एण्डोस्कोपिक ( दूरबीन द्वारा ) जांच, काॅलोनोस्कोपी जांच कराए जाने की सलाह दी गई हैं।
मित्तल हाॅस्पिटल की पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएण्ट्रोलाॅजिस्ट डाॅ प्रियंका उदावत ने बताया कि वर्तमान में भोजन के पाश्चात्यकरण का चलन होने के कारण बच्चों व बड़ों को फास्ट फूड व पैक्ड फूड अधिक पसंद आ रहा है। इसकी वजह से बच्चे कई तरह की पेट की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। शिविर में आए एक बच्चे के बारे में डाॅ प्रियंका ने बताया कि बच्चा चाॅकलेट व टाॅफी बहुत सेवन करता है। उसके परिवारजन उपचार भी करा रहे हैं किन्तु उपचार के साथ डाइट पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। नतीजतन बच्चे के पेट की तकलीफ बढ़ती जा रही है।
डाॅ प्रियंका का कहना है कि बच्चों के मामले में उनकी बीमारी का रूट काॅज पता चलता है और सही उपचार के साथ सही आहार मिलता है तो रोग से जल्दी स्वस्थ्य हुआ जा सकता है।
कोल्डड्रिंक पीने व फास्ट फूड खाने की आदत से पेट से संबंधित बीमारियां बच्चों में सामान्य तौर पर रहने लगी हैं। उनके पेट में अल्सर की समस्या हो जाती है, जिसका बाद में पता चलता है। लीवर कमजोर हो जाता है, पित्त की थैली व नली में पथरी होती है, बच्चों में कब्ज, एसीडिटी रहती है, भूख नहीं लगती, शरीर का विकास रुक जाता है, चिड़चिड़ापन रहने लगता है, बच्चों के शरीर में विविध पोषक तत्वों की कमी होने लग जाती है। लम्बे समय तक पौष्टिक आहार नहीं लेने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है, जो बाद में एलर्जी होने आदि अन्य तकलीफों का कारण बन जाती हैं।
डाॅ प्रियंका ने बताया कि गेहूं से एलर्जी पीड़ित बच्चों की संख्या भी इनदिनों ज्यादा बढ़ने लगी है। इसके कारण बच्चों का कद छोटा रहना, दस्त होना, पेट फूलना, खून की कमी रहना, कब्ज होना तथा उपचार ना लिए जाने पर आगे जाकर आंतों के कैंसर की समस्या व लीवर खराब होने की समस्या भी हो सकती है। जो कि प्रत्येक अभिभावक के लिए बच्चों के खान-पान पर ध्यान देने का विषय है। किसी भी तरह का लक्ष्ण दिखाई देने पर उन्हें समय पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। जिससे बच्चों का विकास अवरुद्ध ना रहे।
निदेशक मनोज मित्तल के अनुसार मित्तल हाॅस्पिटल में पेट व आँत की एण्डोस्कोपिक (दूरबीन द्वारा) जांच, काॅलोनोस्कोपी, पित्त की नली की पथरी निकालना (ईआरसीपी) आदि सेवाएं उपलब्ध हैं। शिविर में पंजीकृत रोगियोें को निर्देशित जांचों पर 25 प्रतिशत तथा आॅपरेशन व प्रोसीजर्स पर 10 प्रतिशत की छूट सात दिवस तक प्रदान की जाएगी।

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