सिंधी देश की सबसे प्राचीन, मधुर, समृद्ध व संस्कारवान भाषा

अजमेर, 09 अप्रेल 2019। विधायक अजमेर उत्तर एवं पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि सिंधी भाषा देश की प्राचीनतम, मधुर, समृद्ध एवं संस्कारवान भाषा है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। देवनानी आज अजमेर सिंधी समाज द्वारा सिंधी भाषा दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम गडजाणी को सम्बोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि मातृभाषा किसी भी संस्कृति की आत्मा होती है। हमारी मातृभाषा सिंधी इतनी समृद्ध, मधुर व संस्कारवान है कि यह सर्वाधिक वर्णो वाली तथा संस्कृत की सर्वाधिक निकटतम भाषा है। सिंधी भाषा के दो तिहाई शब्द संस्कृत भाषा मूल के है। उन्होंने कहा कि जब हमारी भाषा इतनी समृद्ध है तो आज की युवा पीढ़ि को इससे विमुख होने के स्थान पर ज्यादा से ज्यादा सिंधी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा को केवल रोजगार की दृष्टि से ही नहीं देखना चाहिए क्योंकि भाषा हमारी संस्कृति की संवाहक एवं मनुष्य के चरित्र निर्माण में सहायक होती है।
देवनानी ने कहा कि हमें सिंधी भाषा पर गर्व होने के साथ ही बोलचाल एवं व्यवहार में इसका अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए क्योंकि मातृभाषा अपने परिवेश, समाज की संस्कृति व विचारों को अभिव्यक्त करने का माध्यम होती है।
देवनानी ने कहा कि 10 अप्रेल 1967 को भारत सरकार द्वारा संविधान में 21वां संशोधन करते हुए सिंधी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में जोड़ा गया जिससे सिंधी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उन्होंने बताया कि सिंधी भाषा को 8वीं अनुसूची में जोड़े जाने से सिंधी भाषियों को अपनी ही मातृभाषा में अध्ययन करने, विभिन्न शैक्षणिक व प्रतियोगी परिक्षाऐं देने का अवसर मिला तथा सिंधी साहित्यकारों की भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी।
कार्यक्रम को वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए साहित्यकार डा. सुरेश बबलाणी ने सिंधी भाषा एवं साहित्य के इतिहास पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय के सेवानिवृति विभागाध्यक्ष डा. हासो दादलाणी ने सभा को संबोधित करते हुए सिंधी भाषा के लाभ गिनाते हुए युवा पीढ़ी को प्रशासनिक सेवाओं में सिंधी भाषा को विषय के रूप में चुनने का आव्हान किया । कार्यक्रम में आर्शीवचन प्रदान करते हुए प्रेमप्रकाश आश्रम वैशाली नगर के संत सांई ओमप्रकाश शास्त्री ने युवा पीड़ी को अपनी भाषा एवं संस्कृति पर गर्व करने एवं बोलचाल में सिंधी भाषा के प्रयोग पर बल दिया । इस अवसर पर आशीर्वाद प्रदान करने के लिए प्रेमप्रकाश आश्रम खारी कुई के संत श्री चेतन किशन जी एवं प्रेमप्रकाश आश्रम के दादा नारायण दास जी, निर्मल उदासीन आश्रम के श्री आतमदास जी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले समाज के विशिष्टजनों का सम्मान किया गया जिसमें श्री ढोलण राही, श्रीमती कमला गोकलानी, श्री अशोक मंगलानी, श्री सुरेश सिंधी, श्री मोहन बदलानी, श्री मुकेश ठाकुर, डाॅ. एफ.सी.मूरजानी, डाॅ. प्रेम चांदवानी, डाॅ. प्रकाश नारवानी, डाॅ. धरमू लौंगानी, श्रीमती शान्ता भिरयानी, श्रीमती मन्जू लालवानी, श्री नवलराय बच्चाणी, श्री घनश्याम भूरानी, श्री प्रभु ठाराणी, श्री ईश्वर पारवानी, श्री दौलत लौंगानी सम्मिलित थे।
कार्यक्रम के अन्त में मनोहर मोटवाणी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन समिति में अजमेर सिंधी समाज के तुलसी सेानी, बलराम हरलाणी, दीपेन्द्र लालवाणी, रमेश चेलाणी, मोहन लालवाणी, जी.डी.वरन्दाणी, राधाकिशन आहूजा, सुन्दर मटाई, दयाल प्रियाणी, श्याम नागराणी, किशन बालाणी, कुमार लालवाणी, गौरव मीरवाणी, गिरीश लालवाणी, ओमप्रकाश हीरानन्दाणी, लक्ष्मण चैनाणी, तेजू लौंगाणी, गोविन्द जैनाणी, कमल लालवाणी, तरूण लालवाणी, राजू मूरजाणी, मनोज झामनाणी, भरत गोकलाणी आदि शामिल हैै।
(दीपेन्द्र लालवाणी) मो. 9929944141

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