रामद्वारा में संत गोपालराम महाराज ने सुनाया शिव-पार्वती विवाह प्रसंग

ब्यावर, 9 जून। रामद्वारा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन शिव-पार्वती विवाह उत्सव मनाया गया। संत गोपालराम महाराज ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विवाह माता-पिता की सहमति से ही होना चाहिए। प्रेम विवाह का चलन समाज के लिए ठीक नहीं है।
संत ने कहा कि महात्मा आत्मा को परमात्मा से मिलवाने का कार्य करते हैं। मन को परमात्मा के चरणों मे लगाने के लिए गुरु मंत्र चाहिए। गुरु का मंत्र छोटा होता है लेकिन बड़ा ताकतवर होता है। भगवान के गुण गाने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। महाराज ने कहा कि उन लोगों से बचना चाहिए जो सनातन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं। सनातन धर्म श्रेष्ठ धर्म है जो मर्यादा और संस्कार सिखाता है। उन्होंने कहा कि हम भगवान का स्मरण करना भूल जाएं वही विपत्ति है। जब-जब दुःख का समय आए तो समझना परमात्मा से मिलन होगा। कुंती ने भगवान से दुःख मांगा था क्योंकि उन्हें पता था कि विपत्तियों में भगवान साथ रहेंगे। सत्संग सुनने मात्र से मुक्ति मिल जाती है। जहां कथा होती है वहां भगवान का वास होता है। इंसान भगवान को पाने के लिए भटक रहा है जबकि भगवान भक्तों के हृदय में ही है। अपनी अस्थियां गिरे उससे पहले ईश्वर से वास्ता जोड़कर मोक्ष का रास्ता निकाल लो।
संत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चार प्रकार की सेवा अवश्य करनी चाहिए। पहली देह सेवा, दूसरी देश सेवा, तीसरी देव सेवा और चौथी दिल सेवा। कथा के बीच पीनी है तो प्याली हरि नाम वाली पी.., वृंदावन जाने को जी चाहता है.. जैसे मधुर भजनों पर श्रोता झूम उठे। दक्ष गुप्ता ने शिव व गर्विता अग्रवाल ने पार्वती का रुप धरकर विवाह का सजीव मंचन किया। आयोजक अजय अग्रवाल, अमित बंसल, विजय पारीक, सुनील सिंहल, अनुपम रुणीवाल, राजेश मुरारका, राजेश रांका, निखिल जिंदल ने महाराजश्री का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। कथा में सीता देवी, प्रेम जिंदल, रानी अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, निधि मित्तल, सीमा अग्रवाल, मोनिका गुप्ता, वृति सहित कई श्रोताओं ने धर्मलाभ लिया। मीडिया प्रभारी सुमित सारस्वत ने बताया कि सोमवार को भक्त प्रहलाद चरित्र और नृसिंह अवतार प्रसंग का गुणानुवाद होगा। कथा का समय प्रातः 8 से 11 बजे तक है।

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