प्रतिपल समर्पित भक्ति भाव से भरा जीवन ही एक उत्सव है।
-निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज।
केकड़ी 16 जनवरी(पवन राठी)संत निरंकारी सत्संग भवन संत कालूराम निरंकारी के सानिध्य में भक्ति पर्वत समागम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संत कालूराम ने कहा कि एक को जानकर,एक को मानकर,एक होकर जो भक्ति करता है वही भक्ति परवान होती है।
केकड़ी ब्रांच मुखी अशोक कुमार रंगवानी के अनुसार ‘प्रतिपल समर्पित भाव से जीवन जीने का नाम ही भक्ति है जिसमें जीवन का हर पल उत्सव के समान बन जाता है।’ उक्त् उद्गार निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा (हरियाणा) में आयोजित ‘भक्ति पर्व समागम’ के विशेष सत्संग समारोह के अवसर पर एकत्रित विशाल जन-समूह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए गये। इस कार्यक्रम का लाभ लेने हेतु दिल्ली एंव एन. सी. आर. सहित अन्य स्थानों से भी हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए। भक्ति पर्व समागम के अवसर पर परम संत सन्तोख सिंह जी एवं अन्य संतों भक्तों के तप-त्याग को स्मरण किया जाता है जिन्होंने ब्रह्मज्ञान की दिव्य रोशनी के प्रचार प्रसार हेतु निरंतर प्रयास किया।
केकड़ी मीडिया सहायक राम चन्द टहलानी ने बताया कि यह पर्व समूचे विश्व में मनाया गया।भक्ति की परिभाषा को सार्थक रूप में बताते हुए सत्गुरु माता जी ने फरमाया कि भक्ति का अर्थ तो सरल अवस्था में जीवन जीना है जिस पर चलकर आनंद की अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है।